By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: डीआरडीओ ने तैयार किया नई पीढ़ी का ‘अंडरवॉटर व्हीकल’, बारूदी सुरंग निरोधक अभियानों में मिलेगी निर्णायक बढ़त
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > डीआरडीओ ने तैयार किया नई पीढ़ी का ‘अंडरवॉटर व्हीकल’, बारूदी सुरंग निरोधक अभियानों में मिलेगी निर्णायक बढ़त
देशफीचर्ड

डीआरडीओ ने तैयार किया नई पीढ़ी का ‘अंडरवॉटर व्हीकल’, बारूदी सुरंग निरोधक अभियानों में मिलेगी निर्णायक बढ़त

The Hill India News
Last updated: November 15, 2025 2:51 am
The Hill India News
Published: November 15, 2025
Share
SHARE

नई दिल्ली, 15 नवंबर। भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को नई दिशा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने नई पीढ़ी के ऐसे स्वायत्त अंडरवॉटर व्हीकल विकसित किए हैं, जो समुद्र तल पर बिछाई गई बारूदी सुरंगों, विस्फोटक उपकरणों और अन्य संदिग्ध वस्तुओं का वास्तविक समय में पता लगाने की अत्याधुनिक क्षमता रखते हैं।

Contents
समुद्री सुरक्षा में बड़ा कदम, हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी रणनीतिक मजबूतीउन्नत तकनीक से लैस: साइड स्कैन सोनार से समुद्र तल का हाई-रिज़ोल्यूशन स्कैन1. साइड स्कैन सोनार (Side Scan Sonar)2. हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरे3. उन्नत स्वायत्त नेविगेशन प्रणालीमैन-पोर्टेबल डिजाइन: तेज तैनाती और बहुउद्देश्यीय उपयोगभारतीय नौसेना के साथ समन्वय: वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयारकड़े परीक्षणों में शानदार सफलताआत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में एक और उपलब्धिअगला चरण: AI आधारित सुरंग पहचान और बड़े AUV मॉडल विकास

रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी औपचारिक घोषणा करते हुए बताया कि DRDO की विशाखापत्तनम स्थित नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजी लेबोरेटरी (NSTL) ने मैन-पोर्टेबल ऑटोनोमस अंडर-वॉटर व्हीकल्स (MP-AUV) का सफल विकास और परीक्षण पूरा कर लिया है, जिससे भारतीय नौसेना भविष्य के किसी भी बारूदी सुरंग निरोधक अभियान में अधिक सुरक्षित, तेज और सटीक कार्रवाई कर सकेगी।


समुद्री सुरक्षा में बड़ा कदम, हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी रणनीतिक मजबूती

भारत के पास लगभग 7,500 किमी लंबी समुद्री सीमा है, जिसके तीन ओर से घिरे तटों की सुरक्षा वैश्विक समुद्री परिदृश्य में लगातार महत्वपूर्ण बनती जा रही है। हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन सहित कई देशों की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति भारत की सुरक्षा रणनीति को और अधिक जटिल बनाती है।

ऐसे में बारूदी सुरंगें किसी भी समुद्री टुकड़ी और नौसैनिक जहाजों के लिए बेहद खतरनाक और समय-खाऊ चुनौती होती हैं। परंपरागत तरीके से सुरंगों की तलाश में गोताखोरों और बड़े पोतों का इस्तेमाल किया जाता रहा है, जो जोखिमपूर्ण और महंगा साबित होता है।

DRDO की यह नई तकनीक भारतीय नौसेना को आधुनिक Mine Countermeasure क्षमता प्रदान करती है, जिसके जरिए न केवल खतरनाक सुरंगों का पता लगाया जा सकेगा, बल्कि दुश्मन की समुद्री रणनीति का पूर्वानुमान लगाना भी आसान होगा।


उन्नत तकनीक से लैस: साइड स्कैन सोनार से समुद्र तल का हाई-रिज़ोल्यूशन स्कैन

DRDO द्वारा विकसित MP-AUV में अत्याधुनिक तकनीक के कई फीचर शामिल हैं।
इनका सबसे प्रमुख हिस्सा है—

1. साइड स्कैन सोनार (Side Scan Sonar)

यह सिस्टम समुद्र तल का हाई-रिज़ोल्यूशन 2D स्कैन तैयार करता है।
इसके प्रमुख फायदे—

  • कम रोशनी या धुंधले जल में भी सुरंगों का सटीक पता
  • समुद्र तल पर मौजूद किसी भी असामान्य या संदिग्ध वस्तु की स्पष्ट पहचान
  • लंबी दूरी तक डेटा कैप्चर करने की क्षमता

2. हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरे

वाहन में लगे कैमरे वास्तविक समय में समुद्र तल की तस्वीरें भेजते हैं, जिससे ऑपरेटर को तुरंत कार्रवाई का अवसर मिलता है।
यह तकनीक सुरंग जैसी वस्तुओं की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

3. उन्नत स्वायत्त नेविगेशन प्रणाली

  • पूर्व निर्धारित मार्ग पर खुद संचालित
  • समुद्र की धाराओं, गहराई और दिशा में परिवर्तन के अनुसार स्वतः संतुलन
  • GPS आधारित सतही संचार से मिशन नियंत्रण को तत्काल अपडेट

ये सुविधाएँ MP-AUV को ऐसे कठिन समुद्री अभियानों के लिए तैयार करती हैं, जहां मानव पहुंचना मुश्किल होता है।


मैन-पोर्टेबल डिजाइन: तेज तैनाती और बहुउद्देश्यीय उपयोग

MP-AUV की सबसे बड़ी खासियत इसका मैन-पोर्टेबल डिजाइन है, जिसे कुछ ही मिनटों में—

  • किसी जहाज,
  • छोटी नौका,
  • हेलिकॉप्टर,
  • या समुद्री गश्ती टीम

द्वारा तैनात किया जा सकता है।

इस डिजाइन का उद्देश्य सुरंग निरोधक अभियानों को अधिक फुर्तीला और सुरक्षित बनाना है।
सैनिक इसे तटवर्ती क्षेत्रों के अलावा युद्धक्षेत्र, नौसैनिक बेस, जहाजों के मार्ग और मानवीय राहत मिशनों से पहले भी उपयोग कर सकते हैं।

यह डिज़ाइन भारतीय नौसेना द्वारा ‘तेज तैनाती क्षमता’ की अवधारणा के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य है—

“कम समय में अधिक सुरक्षा कवरेज देना।”


भारतीय नौसेना के साथ समन्वय: वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार

DRDO ने इस प्रोजेक्ट पर काम करते समय नौसेना के विशेषज्ञों से तकनीकी और सामरिक आवश्यकताओं का पूरा आकलन किया।
नौसेना के MCM (Mine Counter Measure) विशेषज्ञों के फीडबैक के आधार पर MP-AUV का

  • आकार,
  • वजन,
  • सेंसर सिस्टम
    और
  • संचालन क्षमता

तय की गई।

इससे यह सुनिश्चित किया गया कि यह प्लेटफॉर्म समुद्री परिस्थितियों, गहराई और तापमान जैसी चुनौतियों का सामना आसानी से कर सके।

NSTL ने बताया—

“यह अंडरवॉटर प्रणाली पूरी तरह भारतीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। इसमें विदेशी तकनीक पर निर्भरता लगभग शून्य है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है।”


कड़े परीक्षणों में शानदार सफलता

MP-AUV के विभिन्न परीक्षण—

  • विशाखापत्तनम के समुद्री तट,
  • गहरे जल क्षेत्रों,
  • नौसेना की परीक्षण रेंज
    और
  • नियंत्रित मिशन सिमुलेशन

में किए गए।

इन परीक्षणों में वाहन ने—

  • लंबी दूरी की यात्रा
  • गहरे पानी में स्थिर संचालन
  • सटीक सुरंग पहचान
  • बाधाओं से बचाव
  • वास्तविक समय में डेटा प्रेषण

जैसे सभी मानकों पर शानदार प्रदर्शन किया।

DRDO अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली अब उत्पादन और तैनाती के अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है।


आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में एक और उपलब्धि

भारत पिछले कुछ वर्षों में रक्षा तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है।
MP-AUV—

  • पूरी तरह स्वदेशी
  • लागत में किफायती
  • भविष्य में निर्यात योग्य

उत्पाद के रूप में उभर सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, विश्वभर में Mine Countermeasure तकनीक की भारी मांग है और भारत की यह उन्नत प्रणाली अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी महत्वपूर्ण स्थान बना सकती है।


अगला चरण: AI आधारित सुरंग पहचान और बड़े AUV मॉडल विकास

DRDO अब इस क्षेत्र में और उन्नति की दिशा में काम कर रहा है।
आने वाले समय में—

  • AI संचालित सुरंग पहचान
  • मल्टी-बिम सोनार
  • बड़े आकार के Autonomous Vehicles
  • ड्रोन और AUV के संयुक्त ऑपरेशन
  • और सैटेलाइट लिंक आधारित निगरानी

को प्राथमिकता दी जाएगी।

यह भारत को वैश्विक Mine Countermeasure तकनीक में अग्रणी देशों की सूची में शामिल कर सकता है।

DRDO द्वारा विकसित नई पीढ़ी का MP-AUV (Man-Portable Autonomous Underwater Vehicle) भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता को एक नई दिशा देता है।

अत्याधुनिक सेंसर, साइड स्कैन सोनार, उन्नत कैमरा प्रणाली और मैन-पोर्टेबल डिजाइन इसे भविष्य के सभी समुद्री अभियानों के लिए अनिवार्य और अत्यधिक प्रभावी प्लेटफॉर्म बनाते हैं।

भारत की रक्षा प्रणाली को आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा सक्षम बनाने की दिशा में यह उपलब्धि एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

You Might Also Like

चुनाव आयोग ने जारी किया इलेक्टोरल बॉण्ड की जानकारी, भाजपा-कांग्रेस समेत किसे कितना मिला चंदा
लखनऊ में भीषण बिजली संकट पर फूटा लोगों का गुस्सा, दुबग्गा में सड़क पर उतरे सैकड़ों लोग, सीतापुर हाईवे जाम कर किया प्रदर्शन
भारतीय केले और बेबी कॉर्न ने कनाडा के बाजार में अपनी पहुंच बनाई..
उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने के लिये संकल्पबद्ध है हमारी सरकार -मुख्यमंत्री
Jharkhand: जंगल गई दो लड़कियों की 6 दरिंदों ने लूटी अस्मत, चीखती रहीं पर नहीं आया हैवानों को रहम
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

सितारगंज तहसील में रिश्वत कांड पर बवाल: विजिलेंस टीम रातभर रही ‘कैद’, 20 घंटे तक ठप रहा सरकारी कामकाज, वार्ता के बाद खुला गतिरोध

The Hill India News
The Hill India News
July 30, 2026
जनसेवा के प्रतीक हीरा सिंह बिष्ट को नम आंखों से श्रद्धांजलि, परवादून कांग्रेस ने कहा- उनके आदर्श हमेशा दिखाएंगे राह
‘मैन इन ब्लू’ से ‘केसरिया जर्सी’ तक: भारतीय हॉकी टीम की नई ड्रेस पर छिड़ा सियासी संग्राम, प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल; हॉकी इंडिया ने दी तकनीकी वजह
न्यू नोएडा की ओर बढ़ा बड़ा कदम: 37 गांवों में शुरू होगी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया, जेवर एयरपोर्ट जैसा मिलेगा बंपर मुआवजा, NCR के विकास को मिलेगी नई उड़ान
पैलेट गन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ‘बिना स्पष्ट प्रोटोकॉल नहीं चलेगा बल प्रयोग’, केंद्र सरकार से मांगी SOP; विरोध प्रदर्शनों में इस्तेमाल के नियम तय करने के संकेत
हरिद्वार बना शिवमय: 5 करोड़ श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार देवभूमि, कांवड़ मेले का भव्य शुभारंभ; 6000 जवान तैनात, स्कूलों में छुट्टियां
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग कोर्ट नहीं, केवल जांच, सलाह और सिफारिश तक सीमित; NCSC की शक्तियों पर ऐतिहासिक टिप्पणी
गाजा में फिर बढ़ा तनाव: मस्जिद पर हवाई हमले के बाद मची अफरा-तफरी, इजरायल-हमास संघर्ष के बीच उठे गंभीर सवाल
केदारनाथ यात्रा पर बड़ा संकट: भारी भूस्खलन से पैदल मार्ग बंद, गौरीकुंड के पास गिरे विशाल बोल्डर; यात्रियों की आवाजाही रोकी गई
अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा, भावुक संदेश के साथ खत्म किया शानदार सफर; टीम इंडिया के लिए यादगार रहा योगदान
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?