उत्तराखंड सरकार के बड़े फैसले: गौ पालन योजना का दायरा बढ़ा, मजदूरी भुगतान की समयसीमा तय; हल्द्वानी में हाईकोर्ट के लिए 30 हेक्टेयर जमीन, राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय में 122 पदों को मंजूरी
देहरादून: उत्तराखंड की धामी सरकार ने शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 15 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों में जहां सामान्य वर्ग के लोगों के लिए गौ पालन योजना का दायरा बढ़ाने का निर्णय महत्वपूर्ण है, वहीं श्रमिकों, छात्रों, सहकारी समितियों, खेल विश्वविद्यालय, जल जीवन मिशन और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली है।
बैठक के बाद सामने आए फैसलों को प्रदेश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, श्रमिक हितों, शिक्षा, पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जोड़कर देखा जा रहा है। खास तौर पर उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली को मंजूरी मिलने से संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के हितों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सामान्य वर्ग के लोगों को भी मिलेगा गौ पालन योजना का लाभ
कैबिनेट के सबसे अहम फैसलों में से एक प्रदेश में संचालित गौ पालन योजना से जुड़ा है। अब तक योजना के लाभ को लेकर जो दायरा निर्धारित था, उसमें बदलाव करते हुए सामान्य वर्ग के लोगों को भी इसका लाभ देने का रास्ता साफ किया गया है।
सरकार के इस फैसले से उन लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है जो पशुपालन और गौ पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाना चाहते हैं। पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन लंबे समय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में योजना का दायरा बढ़ने से अधिक लोगों को इससे जोड़ने की संभावना है।
मजदूरों के लिए भी कैबिनेट का बड़ा फैसला
कैबिनेट ने उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली को मंजूरी दी है। इसके तहत श्रमिकों के हितों को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सबसे अहम बात यह है कि श्रमिकों को हर महीने की 7 तारीख तक मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा पुरुष और महिला श्रमिकों के लिए समान कार्य के लिए समान मजदूरी का प्रावधान भी महत्वपूर्ण है। इससे कार्यस्थल पर लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का उद्देश्य संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के हितों का संरक्षण करना है। मजदूरी भुगतान में देरी और काम से जुड़े विवादों को कम करने की दिशा में भी यह नियमावली महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हल्द्वानी में हाईकोर्ट के लिए 30 हेक्टेयर जमीन
कैबिनेट ने नैनीताल हाईकोर्ट को हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में 30 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह फैसला हाईकोर्ट से जुड़े भविष्य के बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हल्द्वानी-गौलापार क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने से संबंधित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है। इस फैसले को लंबे समय से चल रही न्यायिक एवं प्रशासनिक बुनियादी ढांचे की जरूरतों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय में 122 पदों को मंजूरी
खेल के क्षेत्र में भी धामी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के लिए 122 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।
राज्य में खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए खेल विश्वविद्यालय को महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है। नए पदों के सृजन से विश्वविद्यालय के संचालन और प्रशासनिक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
छात्रावासों के संचालन के लिए नई नियमावली
समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित छात्रावासों को लेकर भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रावासों के संचालन के लिए नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई है।
नई नियमावली के जरिए छात्रावासों के संचालन, प्रबंधन और व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जाएगा। इससे छात्र-छात्राओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
जल जीवन मिशन में योजनाओं के हस्तांतरण का रास्ता साफ
कैबिनेट ने जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार की गाइडलाइंस को उत्तराखंड में लागू करने की मंजूरी दी है। इसके बाद नियमों के अनुसार योजनाओं का हस्तांतरण किया जा सकेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधाओं को मजबूत करने के लिहाज से यह फैसला महत्वपूर्ण है। जल जीवन मिशन के तहत तैयार होने वाली योजनाओं के संचालन और हस्तांतरण की प्रक्रिया स्पष्ट होने से योजनाओं को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति भी सहकारी समिति का सदस्य बन सकेगा
कैबिनेट ने उत्तराखंड सहकारी समिति नियमावली के तहत भी महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी है। अब कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति को सहकारी समिति का सदस्य बनने से रोकने वाली व्यवस्था में बदलाव का रास्ता साफ हुआ है।
यह फैसला सामाजिक समावेशन और समान अवसर की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इससे प्रभावित लोगों को आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी का अवसर मिल सकेगा।
मेरठ-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर भी बड़ा कदम
कैबिनेट ने गंगा एक्सप्रेसवे के मेरठ से हरिद्वार तक विस्तार के संबंध में पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ने को मंजूरी दी है।
उत्तराखंड के लिए हरिद्वार धार्मिक, पर्यटन और औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क भी और मजबूत हो सकता है।
औद्योगिक क्षेत्र के लिए नई नियमावली
कैबिनेट ने उत्तराखंड औद्योगिक नियमावली को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य नियोजक और कर्मकार के बीच संबंधों को बेहतर बनाना तथा औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी शिकायतों का तेजी से समाधान सुनिश्चित करना है।
शिकायत समिति के सदस्यों के चयन की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। इससे औद्योगिक संस्थानों में कर्मचारियों की शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
छंटनी किए गए कर्मचारियों को मिलेगा दोबारा मौका
कैबिनेट बैठक में छंटनी किए गए कर्मचारियों से जुड़ा प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण रहा। छंटनी किए गए कर्मचारियों को दोबारा मौका देने की व्यवस्था को मंजूरी दी गई है। इससे ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है जो किसी कारणवश अपनी सेवाएं जारी नहीं रख सके थे।
वन विकास निगम में स्केलर के लिए 100 अंकों की परीक्षा
उत्तराखंड वन विकास निगम सेवा संशोधन नियमावली को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली है। इसके तहत स्केलर पद के लिए 100 अंकों की परीक्षा का प्रावधान किया गया है।
कुल मिलाकर धामी कैबिनेट के फैसलों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन, श्रमिक हित, खेल, शिक्षा, पेयजल, औद्योगिक क्षेत्र और कनेक्टिविटी जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। खासतौर पर सामान्य वर्ग को गौ पालन योजना में शामिल करने और मजदूरों के लिए समय पर मजदूरी भुगतान का प्रावधान आम लोगों के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में गिना जा रहा है।
अब इन फैसलों के शासनादेश और संबंधित विभागों की विस्तृत कार्ययोजना सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इनका जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन किस तरह किया जाएगा।
