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अंकिता भंडारी हत्याकांड: ‘इंसाफ’ की मशाल लेकर सड़कों पर उतरी कांग्रेस, ‘VIP’ चेहरे पर घिरी सरकार; कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की विपक्षी दलों को खुली चुनौती

नैनीताल/मसूरी: उत्तराखंड की शांत वादियों में डेढ़ साल पहले हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड की गूंज एक बार फिर सुनाई दे रही है। इंसाफ की धीमी रफ्तार और कथित ‘वीआईपी’ (VIP) चेहरे को बचाने के आरोपों के बीच प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त उबाल आ गया है। जहाँ एक ओर कांग्रेस ने नैनीताल की सड़कों पर कैंडल मार्च निकालकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने विपक्ष को चुनौती दी है कि वे केवल राजनीति न करें बल्कि ठोस सबूत पेश करें।

नैनीताल में जनसैलाब: कांग्रेस का ‘न्याय मार्च’ और बीजेपी सरकार पर तीखे प्रहार

नैनीताल के मल्लीताल पंत पार्क से तल्लीताल डांठ तक का इलाका गुरुवार को नारों और मोमबत्तियों की रोशनी से सराबोर रहा। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कैंडल मार्च निकाला। इस मार्च का उद्देश्य अंकिता भंडारी के परिजनों को न्याय दिलाना और मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने की मांग करना था।

यशपाल आर्या ने सीधे तौर पर राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “अंकिता हमारी बेटी थी, लेकिन सरकार उसे न्याय देने के बजाय अपराधियों को संरक्षण दे रही है। उस वीआईपी चेहरे का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है, जिसके दबाव में अंकिता की जान ली गई? हम मांग करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई इस पूरे प्रकरण की जांच करे।”

अंकिता हत्याकांड: वो सवाल जो अब भी अनुत्तरित हैं

कांग्रेस के पूर्व विधायक संजीव आर्या ने इस दौरान एक कथित ऑडियो क्लिप का जिक्र कर सनसनी फैला दी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के ही एक पूर्व विधायक का ऑडियो सामने आया है, जिसमें वीआईपी प्रेशर और हत्या की साजिश की बात कही गई है। संजीव आर्या ने आरोप लगाया कि साक्ष्यों को सोची-समझी रणनीति के तहत नष्ट किया गया है और पुलिस प्रशासन केवल प्यादों को पकड़कर असली मास्टरमाइंड को बचा रहा है।


महिला कांग्रेस का आक्रोश: “बेटियों की सुरक्षा केवल नारा बनकर रह गई”

प्रदेश महिला कांग्रेस की वरिष्ठ उपाध्यक्ष जया कर्नाटक ने भी इस प्रदर्शन में प्रमुखता से हिस्सा लिया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अंकिता भंडारी उत्तराखंड की हर बेटी का प्रतीक है। अगर देवभूमि में एक बेटी सुरक्षित नहीं है और उसकी हत्या के बाद सरकार चुप्पी साधे हुए है, तो यह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। विधायक सुमित हृदयेश ने भी इस लड़ाई को तब तक जारी रखने का संकल्प लिया जब तक कि दोषियों को फांसी की सजा नहीं मिल जाती।


सरकार का पलटवार: कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की विपक्षी दलों को खुली चुनौती

इधर, नैनीताल में कांग्रेस के प्रदर्शन के बीच मसूरी में धामी सरकार के कद्दावर मंत्री गणेश जोशी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल ‘चुनावी स्टंट’ करार दिया।

“सबूत दें तो हम हर जांच को तैयार”

गणेश जोशी ने स्पष्ट लहजे में कहा, “सरकार किसी भी अपराधी को बचाने के पक्ष में नहीं है। अंकिता के हत्यारे जेल की सलाखों के पीछे हैं। लेकिन केवल राजनीतिक द्वेष और कोरी बयानबाजी के आधार पर सीबीआई जांच के आदेश नहीं दिए जा सकते। यदि विपक्ष के पास कोई ठोस साक्ष्य है, तो वे उसे अदालत या सरकार के सामने क्यों नहीं रखते?”

उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड की जनता समझदार है और वह जानती है कि कौन विकास की बात कर रहा है और कौन लाशों पर राजनीति। जोशी ने भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम की संगठनात्मक क्षमता की सराहना करते हुए दावा किया कि कांग्रेस आगामी चुनावों में अपनी हार सुनिश्चित देख रही है, इसलिए जनता को भ्रमित करने के लिए पुराने मामलों को उछाल रही है।


क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड का पूरा मामला? (Background)

सितंबर 2022 में ऋषिकेश के एक निजी रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। आरोप रिजॉर्ट मालिक और उसके साथियों पर लगा। जांच में यह बात सामने आई थी कि अंकिता पर किसी ‘VIP गेस्ट’ को ‘स्पेशल सर्विस’ देने का दबाव बनाया जा रहा था, जिससे इनकार करने पर उसे नहर में धक्का देकर मार दिया गया।

तभी से उत्तराखंड की जनता और विपक्षी दल उस ‘VIP’ का नाम उजागर करने की मांग कर रहे हैं। रिजॉर्ट के ध्वस्तीकरण की जल्दबाजी ने भी पुलिस की जांच पर सवाल खड़े किए थे, जिसे विपक्ष आज भी एक बड़ा मुद्दा बना रहा है।


न्याय की आस और राजनीतिक रार

अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह उत्तराखंड की अस्मिता और कानून व्यवस्था का लिटमस टेस्ट बन गया है। जहाँ कांग्रेस इसे ‘बेटी बचाओ’ के नारे की विफलता बता रही है, वहीं भाजपा इसे अपनी कार्यप्रणाली पर अनावश्यक हमला मान रही है।

विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सीबीआई जांच की घोषणा नहीं की गई, तो यह आंदोलन केवल नैनीताल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश की सड़कों पर जन-आंदोलन का रूप लेगा। अब देखना यह है कि क्या धामी सरकार विपक्ष की मांगों के आगे झुकते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश करती है या फिर कानूनी साक्ष्यों के आधार पर इस विवाद का पटाक्षेप होता है।

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