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खटीमा में ‘तलवार फार्म’ कांड पर गरमाई सियासत: 125 एकड़ खड़ी फसल पर चले दर्जनों ट्रैक्टर; कापड़ी बोले- ‘धामी जी, अधिकारियों पर कार्रवाई करें’

The Hill India News
Last updated: February 3, 2026 3:26 am
The Hill India News
Published: February 3, 2026
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खटीमा (ऊधम सिंह नगर)। उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र खटीमा स्थित दमगड़ा ‘तलवार फार्म’ की सवा सौ एकड़ भूमि पर प्रशासन की हालिया कार्रवाई ने एक बड़ा सियासी और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में दर्जनों ट्रैक्टरों द्वारा लहलहाती खड़ी फसल को रौंदने के मामले को लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है। क्षेत्रीय विधायक और विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने इस कार्रवाई को ‘अलोकतांत्रिक और दमनकारी’ करार देते हुए सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हस्तक्षेप की मांग की है।

Contents
खड़ी फसल पर ट्रैक्टर: क्या नियमों को ताक पर रखा गया?मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में ‘अन्याय’ का आरोपस्वतंत्रता सेनानी परिवार के साथ दुर्व्यवहार का मुद्दाप्रशासन की चुप्पी पर उठे सवालसियासी गलियारों में हलचल और किसानों का आक्रोश

खड़ी फसल पर ट्रैक्टर: क्या नियमों को ताक पर रखा गया?

मामला खटीमा तहसील क्षेत्र के दमगड़ा तलवार फार्म का है, जहाँ दो दिन पूर्व प्रशासन की भारी मौजूदगी में लगभग 125 एकड़ भूमि पर ट्रैक्टर चलवाकर उसे जोत दिया गया। इस कार्रवाई का सबसे विवादित पहलू यह रहा कि जिस समय यह भूमि अधिगृहीत की गई, उस समय वहां फसल पूरी तरह तैयार खड़ी थी।

उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए सवाल उठाया कि आखिर किस नियम के तहत खड़ी फसल को बर्बाद किया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि बिना नंबर के ट्रैक्टरों का उपयोग कर जिस तरह से फसल को रौंदा गया, वह किसी सरकारी प्रक्रिया से ज्यादा एक डराने वाली कार्रवाई प्रतीत होती है। कापड़ी के अनुसार, इस घटना ने पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में ‘अन्याय’ का आरोप

भुवन कापड़ी ने इस घटना की संवेदनशीलता को उजागर करते हुए कहा कि यह सब कुछ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पैतृक गांव से मात्र 500 मीटर की दूरी पर हुआ है। उन्होंने कहा, “जब मुख्यमंत्री के अपने गृह क्षेत्र में किसान सुरक्षित नहीं हैं, तो प्रदेश के बाकी हिस्सों में क्या स्थिति होगी? मुख्यमंत्री को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने नियमों का उल्लंघन कर इस कृत्य को अंजाम दिया।”

विधायक ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि प्रशासन अब अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। उनका कहना है कि यदि इस भूमि को लेकर उच्च न्यायालय (High Court) का कोई स्पष्ट आदेश था, तो प्रशासन ने उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया? नियमानुसार भूमि का अधिग्रहण शांतिपूर्ण ढंग से और विधिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए था, न कि किसानों की मेहनत की फसल को इस तरह नष्ट करके।

स्वतंत्रता सेनानी परिवार के साथ दुर्व्यवहार का मुद्दा

इस विवाद का एक भावनात्मक पहलू यह भी है कि तलवार फार्म का संबंध एक स्वतंत्रता सेनानी परिवार से बताया जा रहा है। कापड़ी ने कहा कि जिन परिवारों ने दशकों तक तराई की दुर्गम भूमि को उपजाऊ बनाकर इसे बसाने में अपनी जान लगा दी, आज प्रशासन उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार कर रहा है। दशकों पुराने इतिहास और तराई के विकास में इन परिवारों के योगदान को दरकिनार कर जिस तरह से कार्रवाई की गई, उसकी क्षेत्र में चौतरफा निंदा हो रही है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय प्रशासन इस मामले पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रहा है। उपनेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रशासन की यह चुप्पी संदिग्ध है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उनके मुख्य सवाल निम्नलिखित हैं:

  1. बिना नंबर के ट्रैक्टरों का इस्तेमाल सरकारी कार्रवाई में क्यों किया गया?

  2. क्या फसल कटने तक का इंतजार नहीं किया जा सकता था?

  3. क्या प्रशासन के पास भूमि खाली कराने का वैध कब्जा वारंट था?

सियासी गलियारों में हलचल और किसानों का आक्रोश

खटीमा में हुई इस कार्रवाई के बाद किसानों के बीच गहरा रोष है। किसान संगठनों का कहना है कि यह केवल एक फार्म का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासन की उस कार्यशैली का उदाहरण है जहाँ छोटे और मध्यम किसानों की आवाज को दबाया जा रहा है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

फिलहाल, सभी की निगाहें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर टिकी हैं। भुवन कापड़ी का तर्क है कि आम जनता में यह संदेश जाना अनिवार्य है कि उत्तराखंड में कानून का शासन है, न कि किसी की मनमानी। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में जांच के आदेश देती है या प्रशासन अपने स्टैंड पर कायम रहता है।

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