
नई दिल्ली/रोहिणी: देश की राजधानी दिल्ली का रोहिणी क्षेत्र रविवार को उस समय ‘मिनी उत्तराखण्ड’ के रूप में तब्दील हो गया, जब ‘हम सबका उत्तराखण्ड’ संस्था द्वारा आयोजित ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी सीजन-02’ में लोक संस्कृति, परंपरा और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रवासी उत्तराखण्डियों के साथ संवाद स्थापित किया और राज्य के सर्वांगीण विकास का रोडमैप साझा किया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि उत्तराखण्ड आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकास भी और विरासत भी’ के मूल मंत्र पर चलते हुए न केवल अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सींच रहा है, बल्कि विकास के नए प्रतिमान भी स्थापित कर रहा है।
‘उत्तराखण्ड के सितारे’ सम्मान: प्रतिभाओं का हुआ भव्य सत्कार
महोत्सव का मुख्य आकर्षण उन विभूतियों का सम्मान रहा, जिन्होंने अपनी मेहनत से देश-दुनिया में उत्तराखण्ड का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री धामी ने मंच से ‘उत्तराखण्ड के सितारे’ सम्मान प्रदान किए। सम्मानित होने वालों में शामिल थे:
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सौरभ जोशी: सुप्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, जिन्होंने अपनी व्लॉगिंग के जरिए देवभूमि की जीवनशैली को वैश्विक पटल पर पहुँचाया।
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डॉ. मनोज गोरखेला: हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं वरिष्ठ चिकित्सक, जिनके स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान की सराहना की गई।
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कल्पना चौहान: विख्यात लोक गायिका, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज से उत्तराखण्ड की लोक कला को जीवंत रखा है।
सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव: आने वाली पीढ़ी के लिए संजीवनी
हजारों की संख्या में उपस्थित प्रवासी उत्तराखण्डियों, युवाओं और महिलाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी भावुक भी हुए। उन्होंने कहा कि एक पहाड़ी होने के नाते लोक संस्कृति उनके जीवन का अभिन्न अंग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को अपनी बोली, भाषा और संस्कारों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “जब दिल्ली जैसे महानगर में हमारे बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में थड्या और चौंफला नृत्य करते हैं, तो यह सिद्ध होता है कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक चेतना आज भी अजेय है।”
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था: ‘लखपति दीदी’ से ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ तक
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उन योजनाओं पर प्रकाश डाला जो सीधे तौर पर मातृशक्ति और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड अब महिला नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ रहा है।
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लखपति दीदी योजना: बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
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हाउस ऑफ हिमालयाज: यह ब्रांड उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का माध्यम बन गया है।
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एक जनपद-दो उत्पाद: इस योजना के जरिए स्थानीय हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों को क्लस्टर स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
पर्यटन का नया स्वरूप: वेडिंग डेस्टिनेशन और होम-स्टे
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड अब केवल ‘तीर्थाटन’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग के लिए देश का सबसे पसंदीदा केंद्र बन गया है। ‘वेड इन उत्तराखण्ड’ और ‘होम-स्टे’ जैसी पहलों ने स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के द्वार खोले हैं।
केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के भव्य पुनर्निर्माण और ‘मंदिर माला मिशन’ (मानसखंड कॉरिडोर) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन के बुनियादी ढांचे में सुधार से राज्य की जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सुशासन और कड़े कानून: ‘उत्तराखण्ड का दशक’
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और सुशासन की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि राज्य में लागू किए गए सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रभावी क्रियान्वयन ने उत्तराखण्ड को देश के सबसे सुरक्षित और पारदर्शी राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के उस कथन को याद दिलाया जिसमें उन्होंने कहा था कि “21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा”। धामी ने कहा कि राज्य सरकार इस संकल्प को सिद्ध करने के लिए दिन-रात कार्य कर रही है, जिसके परिणाम स्वरूप आज राज्य बिजली उत्पादन, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
प्रवासी उत्तराखण्डियों का आह्वान
मुख्यमंत्री ने दिल्ली और अन्य क्षेत्रों में रह रहे प्रवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों को न भूलें और वर्ष में कम से कम एक बार अपने पैतृक गांव जरूर जाएं। उन्होंने प्रवासियों को राज्य के विकास में सहभागी बनने के लिए आमंत्रित किया और ‘हम सबका उत्तराखण्ड’ संस्था के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की।
महोत्सव में देवभूमि की पारंपरिक कलाओं, लोक संगीत और व्यंजनों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान कई जनप्रतिनिधि, संस्था के पदाधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।



