डिजिटल इंडिया के इस दौर में मोबाइल ऐप हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। बैंकिंग से लेकर निवेश, खरीदारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक लगभग हर काम अब स्मार्टफोन के जरिए होने लगा है। ऐसे में अधिकांश लोग यह मानकर चलते हैं कि यदि कोई ऐप Google Play Store पर उपलब्ध है तो वह पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद होगी। लेकिन हैदराबाद में सामने आए साइबर ठगी के तीन मामलों ने इस धारणा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां तीन लोगों को कथित तौर पर Google Play Store पर उपलब्ध फर्जी निवेश संबंधी ऐप डाउनलोड करवाकर लाखों रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने धोखाधड़ी करने वाले आरोपियों के साथ-साथ Google इंडिया के प्रमुख को भी सह-आरोपी बनाते हुए मामला दर्ज किया है। यह घटनाक्रम देशभर के करोड़ों स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार तीन अलग-अलग शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें सोशल मीडिया विज्ञापनों और ऑनलाइन लिंक के माध्यम से निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया गया। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि यदि वे एक विशेष निवेश प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगे तो हर सप्ताह लाखों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं। जब पीड़ितों ने विज्ञापन पर क्लिक किया तो उन्हें Google Play Store से एक एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा गया। चूंकि ऐप आधिकारिक स्टोर पर उपलब्ध था, इसलिए उन्हें किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ और उन्होंने उसे सुरक्षित समझकर अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर लिया।
ऐप डाउनलोड करने के बाद ठगों ने पीड़ितों को निवेश की प्रक्रिया समझाई और शुरुआत में छोटे-छोटे लाभ का भ्रम पैदा किया। इसके बाद अधिक मुनाफे का लालच देकर बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। जब पीड़ितों ने लाखों रुपये जमा कर दिए और अपनी राशि वापस निकालने का प्रयास किया तो उन्हें तरह-तरह के बहाने बनाकर टाल दिया गया। अंततः उनका पूरा निवेश फंस गया और उन्हें समझ आया कि वे साइबर अपराधियों के जाल में फंस चुके हैं।
सबसे चर्चित मामले में 69 वर्षीय एक बुजुर्ग ने पुलिस को बताया कि मई महीने में सोशल मीडिया पर उन्हें एक आकर्षक विज्ञापन दिखाई दिया, जिसमें दावा किया गया था कि निवेशक हर सप्ताह 22 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं। विज्ञापन को वास्तविक समझकर उन्होंने उस पर क्लिक किया और अपना मोबाइल नंबर दर्ज किया। इसके बाद एक महिला ने मैसेजिंग ऐप के माध्यम से उनसे संपर्क किया और उन्हें निवेश संबंधी जानकारी देने लगी। कुछ समय बाद उनसे Google Play Store से एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया गया। धीरे-धीरे विश्वास जीतने के बाद उनसे बड़ी रकम निवेश करवाई गई। जब उन्होंने अपनी राशि वापस लेने की कोशिश की तो उनके साथ संपर्क समाप्त कर दिया गया। इस मामले में उन्हें लगभग 24.37 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
दूसरे मामले में 40 वर्षीय व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे भी ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर एक फर्जी सिक्योरिटीज प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया। उसे Play Store से ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया और बेहतर रिटर्न का लालच देकर करीब 17 लाख रुपये निवेश करा लिए गए। बाद में जब उसने पैसे निकालने का प्रयास किया तो कोई जवाब नहीं मिला और उसका पूरा निवेश डूब गया।
इसी प्रकार तीसरे मामले में 71 वर्षीय सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उन्हें एक नकली ट्रेडिंग एवं निवेश एप्लिकेशन के माध्यम से लगभग 7.42 लाख रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने भी पुलिस से शिकायत करते हुए कहा कि यदि यह ऐप Google Play Store पर उपलब्ध नहीं होता तो शायद वे कभी इसे डाउनलोड नहीं करते।
इन मामलों के सामने आने के बाद हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि वे Google इंडिया को नोटिस जारी कर यह जानकारी मांगेंगे कि संबंधित ऐप किस प्रक्रिया के तहत Play Store पर प्रकाशित हुए, उनकी समीक्षा कैसे की गई और क्या कंटेंट सत्यापन की प्रक्रिया में कोई चूक हुई थी। यदि जांच में यह पाया जाता है कि ऐप वास्तव में धोखाधड़ी के उद्देश्य से संचालित किए जा रहे थे, तो उन्हें तत्काल हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी।
हालांकि यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि किसी कंपनी के अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं होता। पुलिस की जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में किसकी क्या जिम्मेदारी बनती है। फिलहाल जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आजकल अपराधी केवल नकली वेबसाइट ही नहीं बल्कि दिखने में पूरी तरह पेशेवर मोबाइल ऐप भी तैयार कर रहे हैं। कई बार ये ऐप शुरुआती स्तर पर सामान्य तरीके से काम करते हैं ताकि उपयोगकर्ता का विश्वास जीत सकें। इसके बाद निवेश बढ़ने पर या अधिक रकम जमा होने के बाद अचानक पैसा निकालने का विकल्प बंद कर दिया जाता है या ऐप पूरी तरह गायब हो जाता है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि केवल Google Play Store पर ऐप उपलब्ध होना उसकी पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता। उपयोगकर्ताओं को किसी भी निवेश संबंधी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके डेवलपर की जानकारी, डाउनलोड की संख्या, उपयोगकर्ताओं के वास्तविक रिव्यू, आधिकारिक वेबसाइट और संबंधित कंपनी के नियामकीय पंजीकरण की जांच अवश्य करनी चाहिए। यदि कोई ऐप बहुत कम समय में अत्यधिक मुनाफे का दावा कर रहा हो या बिना जोखिम के बड़ी कमाई का वादा कर रहा हो, तो उसे संदेह की नजर से देखना चाहिए।
ऑनलाइन निवेश करने से पहले यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि संबंधित कंपनी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) या अन्य संबंधित नियामक संस्थाओं के साथ पंजीकृत है या नहीं। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक करने, सोशल मीडिया विज्ञापनों के आधार पर निवेश करने या व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से मिले ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए। यदि किसी प्रकार का संदेह हो तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी रिपोर्ट करनी चाहिए।
हैदराबाद में सामने आए ये तीन मामले इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में केवल तकनीकी प्लेटफॉर्म पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक इंटरनेट उपयोगकर्ता को स्वयं भी सतर्क और जागरूक रहना होगा। थोड़ी सी सावधानी, किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले जांच-पड़ताल और निवेश से पहले उचित सत्यापन ही लाखों रुपये की मेहनत की कमाई को साइबर ठगों से सुरक्षित रख सकता है।
