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उत्तराखंड में ‘ध्वस्त’ होती कानून व्यवस्था पर कांग्रेस का राजभवन मार्च: राज्यपाल से मिलकर उठाई उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग

The Hill India News
Last updated: May 14, 2026 2:10 am
The Hill India News
Published: May 14, 2026
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Photo: @GaneshGodiyal
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देहरादून: उत्तराखंड की शांत वादियों में बिगड़ती कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों के बीच मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और विधायक लखपत बुटोला के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) से मुलाकात की। कांग्रेस ने राज्य में हालिया महीनों में हुई संदिग्ध घटनाओं, विवादित पुलिस मुठभेड़ों और सत्ताधारी दल के भीतर उपजे असंतोष को आधार बनाते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

Contents
राजपुर रोड बार प्रकरण: रसूखदारों के संरक्षण पर घेरासंदिग्ध एनकाउंटर और पुलिस प्रताड़ना के गंभीर आरोपसत्ताधारी विधायक की असुरक्षा और सरकार की घेराबंदीनर्सिंग अभ्यर्थियों के भविष्य पर हस्तक्षेप की मांगराजभवन से न्याय की उम्मीदसुलगते सवालों के बीच धामी सरकार

कांग्रेस का स्पष्ट आरोप है कि प्रदेश में उत्तराखंड कानून व्यवस्था संकट इस कदर गहरा गया है कि अब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं और आम आदमी का पुलिसिया तंत्र से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।

राजपुर रोड बार प्रकरण: रसूखदारों के संरक्षण पर घेरा

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल का ध्यान देहरादून के पॉश इलाके राजपुर रोड स्थित एक बार में हुई हालिया घटना की ओर खींचा। ज्ञापन में कहा गया है कि इस मामले ने न केवल प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पुलिस विभाग के भीतर के अंतर्विरोधों को भी सार्वजनिक कर दिया है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बार प्रकरण में पुलिस के उच्चाधिकारियों के बीच समन्वय की भारी कमी दिखी, जिससे यह संदेश गया कि कानून का उल्लंघन करने वालों को ‘ऊपर’ से संरक्षण मिल रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि शहर के बीचों-बीच ऐसी घटनाओं का होना और उसमें प्रभावशाली व्यक्तियों की संलिप्तता की चर्चाएं शासन की साख पर बट्टा लगा रही हैं। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है।

संदिग्ध एनकाउंटर और पुलिस प्रताड़ना के गंभीर आरोप

ज्ञापन में 30 अप्रैल 2026 को हुई एक पुलिस मुठभेड़ का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। कांग्रेस ने इस एनकाउंटर को ‘संदिग्ध’ करार देते हुए कहा कि एक कथित अपराधी की मृत्यु के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे पुलिस की थ्योरी से मेल नहीं खाते।

कांग्रेस ने राज्यपाल के समक्ष सवाल उठाया कि क्या इस मुठभेड़ के दौरान मानवाधिकारों और निर्धारित पुलिस मानकों का पालन किया गया? स्वतंत्र साक्ष्यों के अभाव का जिक्र करते हुए कांग्रेस ने मांग की है कि इस एनकाउंटर की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके।

इसके साथ ही, प्रतिनिधिमंडल ने 2 मई 2026 को पौड़ी जिले के सतपुली में एक युवक द्वारा पुलिस प्रताड़ना के कारण की गई आत्महत्या और 6 मई को चंपावत में एक नाबालिग युवती के साथ हुए मामले में पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली पर भी कड़ा रोष व्यक्त किया।

सत्ताधारी विधायक की असुरक्षा और सरकार की घेराबंदी

कांग्रेस ने उत्तराखंड कानून व्यवस्था संकट को प्रमाणित करने के लिए भाजपा के ही गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के हालिया बयानों का सहारा लिया। ज्ञापन में कहा गया कि जब सत्ताधारी दल के विधायक खुद मुख्यमंत्री पर पुलिस के माध्यम से उत्पीड़न और षड्यंत्र रचने का आरोप लगा रहे हों, तो राज्य की सामान्य जनता की सुरक्षा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। कांग्रेस ने तर्क दिया कि यह स्थिति ‘संवैधानिक तंत्र की विफलता’ की ओर इशारा करती है।

नर्सिंग अभ्यर्थियों के भविष्य पर हस्तक्षेप की मांग

कानून व्यवस्था के अलावा, कांग्रेस ने नर्सिंग अभ्यर्थियों के लंबे समय से लंबित मामले को भी राज्यपाल के समक्ष प्रमुखता से रखा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि स्वास्थ्य महानिदेशिका की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के बावजूद राज्य सरकार निर्णय लेने में देरी कर रही है। कांग्रेस ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे राज्य सरकार को निर्देशित करें कि नर्सिंग अभ्यर्थियों के हित में तत्काल प्रभाव से निर्णय लिया जाए, ताकि युवाओं का भविष्य अंधकारमय न हो।

राजभवन से न्याय की उम्मीद

मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, “उत्तराखंड में आज कोई सुरक्षित नहीं है। पुलिस का इस्तेमाल अपराधियों को पकड़ने के बजाय राजनीतिक विरोधियों को दबाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए किया जा रहा है। हमने महामहिम राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है क्योंकि वे राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं।”

विधायक लखपत बुटोला ने कहा कि राज्य में प्रशासनिक अराजकता का माहौल है और यदि समय रहते न्यायिक जांच सुनिश्चित नहीं की गई, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर फूटेगा।

सुलगते सवालों के बीच धामी सरकार

कांग्रेस के इस राजभवन मार्च ने पुष्कर सिंह धामी सरकार के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। एक तरफ जहां विपक्ष हमलावर है, वहीं दूसरी तरफ अपनों के ही बागी सुर और पुलिस की संदिग्ध कार्यप्रणाली सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर सवालिया निशान लगा रही है। अब देखना यह होगा कि राजभवन इन गंभीर शिकायतों पर क्या संज्ञान लेता है और क्या सरकार इन मामलों में न्यायिक जांच की मांग को स्वीकार करती है।

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TAGGED:Dehradun Rajpur Road bar caseGovernor Gurmeet Singhharish rawatnursing candidate agitation.police encounter investigationUttarakhand Congress
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