
हल्द्वानी/भीमताल: उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और जवाबदेही तय करने के लिए नैनीताल जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अरविंद कुमार पाण्डेय द्वारा धारी और भीमताल ब्लॉक के विद्यालयों में किए गए औचक निरीक्षण ने विभाग के भीतर हड़कंप मचा दिया है। जहाँ एक स्कूल में पिछले तीन दिनों से ताला लटका मिला और शिक्षक गायब थे, वहीं दूसरे स्कूल में सीडीओ खुद ‘शिक्षक’ की भूमिका में नजर आए।
हेड़िया गांव: तीन दिन से बिना गुरु के ‘ज्ञान का मंदिर’, सुरक्षा पर बड़ा सवाल
नैनीताल विद्यालय औचक निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली और चिंताजनक स्थिति भीमताल ब्लॉक के हेड़िया गांव स्थित राजकीय विद्यालय में देखने को मिली। यहाँ कुल 13 बच्चे अध्ययनरत हैं, जो नियमित रूप से स्कूल पहुंच रहे थे, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाला कोई नहीं था।
जांच में सामने आया कि विद्यालय के दोनों नियमित शिक्षक अवकाश पर थे। उनकी अनुपस्थिति में विभाग द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शिक्षक हरीश चन्द्र पाठक को वहां भेजा गया था, लेकिन विडंबना देखिए कि वे भी बिना किसी सूचना के पिछले तीन दिनों से स्कूल नहीं पहुंच रहे थे। सीडीओ ने जब रजिस्टर और उपस्थिति पंजिका खंगाली, तो विभागीय लापरवाही की परतें खुलती चली गईं।
जंगली जानवरों का खतरा और बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़
सीडीओ अरविंद पाण्डेय ने इस स्थिति पर न केवल नाराजगी जताई, बल्कि इसे बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ करार दिया। उन्होंने कहा कि भीमताल और धारी के ये सुदूरवर्ती इलाके जंगली जानवरों के आतंक के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में छोटे बच्चों को बिना किसी शिक्षक या अभिभावक की निगरानी के स्कूल में छोड़ देना एक बड़ी दुर्घटना को दावत देने जैसा है।
सीडीओ ने तत्काल खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) से स्पष्टीकरण तलब किया है कि आखिर किन परिस्थितियों में स्कूल को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है, जिसमें दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई और निलंबन की संस्तुति की गई है।
पदमपुरी इंटर कॉलेज: जब सीडीओ ने खुद संभाली चॉक और डस्टर
निरीक्षण की अगली कड़ी में सीडीओ धारी ब्लॉक के संत सोमवारी महाराज राजकीय इंटर कॉलेज, पदमपुरी पहुंचे। हेड़िया गांव के विपरीत, यहाँ की तस्वीरें संतोषजनक और सुकून देने वाली मिलीं। स्कूल में कुल 306 छात्र-छात्राएं मौजूद थे और पूरा स्टाफ मुस्तैद पाया गया।
यहाँ सीडीओ का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका से इतर वे एक शिक्षक के रूप में कक्षा 12 के छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों की क्लास ली और उनसे शैक्षणिक विषयों पर सवाल-जवाब किए। सीडीओ ने छात्रों को जीवन में अनुशासन, कड़ी मेहनत और ‘बड़े लक्ष्य’ निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि “परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, शिक्षा ही वह हथियार है जिससे आप अपना और समाज का भविष्य बदल सकते हैं।”
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सर्वांगीण विकास पर जोर
पदमपुरी स्कूल के निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने शिक्षकों को निर्देश दिए कि केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बच्चों के सर्वांगीण विकास (Overall Development) के लिए खेलकूद, संवाद कला और मानसिक कौशल पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्कूल की साफ-सफाई और मिड-डे मील की व्यवस्थाओं को भी बारीकी से परखा। शिक्षकों को दो टूक लहजे में कहा गया कि शिक्षण की गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर गिरावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन का कड़ा संदेश: लापरवाही का दौर अब खत्म
इस औचक निरीक्षण के माध्यम से मुख्य विकास अधिकारी ने जिले के समस्त शिक्षा अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दे दिया है। नैनीताल विद्यालय औचक निरीक्षण अभियान अब थमने वाला नहीं है।
सीडीओ अरविंद पाण्डेय ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। हम बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा के साथ किसी को भी समझौता करने की अनुमति नहीं दे सकते। जो शिक्षक ड्यूटी के प्रति लापरवाह हैं, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।”
सुधरेगी व्यवस्था या कागजों तक रहेगा असर?
नैनीताल के दुर्गम इलाकों में शिक्षा व्यवस्था अक्सर शिक्षकों की कमी या उनकी अनुपस्थिति के कारण सुर्खियों में रहती है। सीडीओ के इस औचक कदम से एक बार फिर उम्मीद जगी है कि धरातल पर बदलाव आएगा। हेड़िया गांव जैसे मामलों में होने वाली त्वरित कार्रवाई अन्य शिक्षकों के लिए एक नजीर साबित होगी। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस फजीहत के बाद अपनी आंतरिक निगरानी प्रणाली को कितना मजबूत करता है।



