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भारत के ‘प्रथम गांव’ माणा से मुख्यमंत्री धामी का हुंकार: शत-प्रतिशत ‘लखपति दीदी’ गांव बना आत्मनिर्भरता का वैश्विक मॉडल

देहरादून/चमोली: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को चीन सीमा से सटे भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा का दौरा कर विकास कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने माणा को केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता का ‘ग्रोथ इंजन’ करार दिया। विशेष रूप से, माणा गांव अब उत्तराखंड का पहला ऐसा गांव बन गया है जहाँ की सभी कार्यशील महिलाएं ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत आर्थिक रूप से सशक्त हो चुकी हैं।

माणा: ‘अंतिम’ से ‘प्रथम’ बनने की विकास यात्रा

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों में जिन्हें ‘अंतिम गांव’ मानकर उपेक्षित छोड़ दिया गया था, आज वे मोदी जी के नेतृत्व में देश के ‘प्रथम गांव’ के रूप में विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। वाइब्रेंट विलेज योजना (Vibrant Village Program) के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और पर्यटन का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, माणा आज केवल एक गांव नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक जीती-जागती मिसाल है। यहाँ की महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति और सरकारी प्रोत्साहन का संगम हो, तो हिमालय की दुर्गम चोटियों पर भी समृद्धि की फसल लहलहा सकती है।”

शत-प्रतिशत ‘लखपति दीदी’ गांव: एक आर्थिक क्रांति

चमोली जनपद के ज्योतिर्मठ विकासखंड के अंतर्गत आने वाला माणा गांव अब शत-प्रतिशत “लखपति दीदी” गांव का गौरव हासिल कर चुका है। आंकड़ों के अनुसार:

  • गांव में कुल 12 स्वयं सहायता समूह (SHGs) सक्रिय हैं।

  • इन समूहों से 82 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हैं।

  • ‘घुंघटी महिला ग्राम संगठन’ और ‘योगबंदी क्लस्टर स्तरीय संगठन’ के माध्यम से यहाँ की सभी 82 महिलाएं सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।

ये महिलाएं न केवल पारंपरिक ऊनी वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों का निर्माण कर रही हैं, बल्कि फर्नीचर, मसाले, खाद्य प्रसंस्करण, होमस्टे और मत्स्य पालन जैसे आधुनिक स्वरोजगार के क्षेत्रों में भी अपनी धाक जमा चुकी हैं।

चारधाम यात्रियों से विशेष अपील: ‘लोकल के लिए वोकल’ बनें

मुख्यमंत्री ने बद्रीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि यात्रा को केवल दर्शन तक सीमित न रखें, बल्कि स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान दें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब एक श्रद्धालु माणा के हस्तशिल्प या स्थानीय दालें खरीदता है, तो उसका सीधा लाभ सीमांत क्षेत्र की एक ‘लखपति दीदी’ को मिलता है।

साथ ही, उन्होंने चारधाम यात्रा को सुरक्षित, स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने पर्यटकों से ‘हरित यात्रा’ (Green Yatra) का हिस्सा बनने और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को अक्षुण्ण रखने का आग्रह किया।

विकास कार्यों का निरीक्षण और आत्मीय संवाद

दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय जनता और श्रद्धालुओं से मुलाकात की। माणा की महिलाओं ने पारंपरिक ‘मांगलगीत’ और स्थानीय भेंट के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया। सीएम धामी ने गांव की गलियों में घूमकर विकास कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि वाइब्रेंट विलेज के तहत चल रही परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

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