
बद्रीनाथ/चमोली: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को भू-वैकुंठ बद्रीनाथ धाम पहुंचकर बद्रीनाथ मास्टर प्लान के तहत चल रहे पुनर्विकास कार्यों का ‘ग्राउंड जीरो’ पर उतरकर स्थलीय निरीक्षण किया। कड़ाके की ठंड और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की एक-एक ईंट का हिसाब लिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और समयसीमा का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आस्था और आधुनिकता का संगम: मास्टर प्लान की समीक्षा
मुख्यमंत्री धामी ने निरीक्षण की शुरुआत बीआरओ बाईपास और अराइवल प्लाजा से की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘बद्रीनाथ मास्टर प्लान’ केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का पुनरुद्धार है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा, “बद्रीनाथ धाम में होने वाला हर निर्माण कार्य मंदिर की दिव्यता और भव्यता के अनुरूप होना चाहिए। हमारा लक्ष्य केवल भवनों का निर्माण करना नहीं, बल्कि एक ऐसा ईको-सिस्टम विकसित करना है जहाँ श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और विश्वस्तरीय सुविधाओं का एक साथ अनुभव कर सकें।”
पूर्ण परियोजनाओं के तत्काल हस्तांतरण का आदेश
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उन प्रोजेक्ट्स पर नाराजगी जाहिर की जो पूर्ण हो चुके हैं लेकिन अभी तक संबंधित विभागों को हस्तांतरित (Handover) नहीं किए गए हैं। उन्होंने आईएसबीटी (ISBT), सिविक एमिनिटी भवन, लूप रोड और लेक के शीघ्र हस्तांतरण हेतु अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक देरी के कारण जनता को सुविधाओं से वंचित रखना अनुचित है। उन्होंने जिलाधिकारी को इन संपत्तियों के संचालन और रखरखाव (O&M) के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए ताकि लंबे समय तक इनकी उपयोगिता बनी रहे।
जिलाधिकारी की सीधी निगरानी और सख्त मॉनिटरिंग
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को ‘मॉनिटरिंग मोड’ में रहने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि:
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प्रत्येक कार्य की दैनिक प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाए।
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निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच के लिए रैंडम सैंपलिंग बढ़ाई जाए।
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लेबर और मशीनरी की संख्या बढ़ाकर कार्यों में तेजी लाई जाए ताकि शीतकाल के बाधा बनने से पहले अधिकतम काम पूरा हो सके।
पर्यावरण संरक्षण और ‘ग्रीन बद्रीनाथ’ पर जोर
हिमालय की संवेदनशीलता को देखते हुए सीएम धामी ने निर्माण एजेंसियों को सतत विकास (Sustainable Development) के सिद्धांतों का पालन करने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान निकलने वाले मलबे का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से हो और गंगा की पवित्रता व स्थानीय पारिस्थितिकी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। बद्रीनाथ धाम की सुंदरता को बनाए रखने के लिए हरित मानकों और स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होगा।
श्रद्धालुओं के लिए ‘स्मार्ट सुविधाएं’
मास्टर प्लान के पूर्ण होने के बाद बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं को रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, क्यू मैनेजमेंट सिस्टम और आधुनिक सुविधाओं से लैस अराइवल प्लाजा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन विकास कार्यों के पूरा होने के बाद बद्रीनाथ धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक आदर्श और भव्य तीर्थस्थल के रूप में स्थापित होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।



