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सीजफायर पर संकट: लेबनान में इजरायल के नए हमले, 7 की मौत, मध्य पूर्व में शांति प्रयासों पर मंडराया खतरा

The Hill India News
Last updated: June 20, 2026 11:59 am
The Hill India News
Published: June 20, 2026
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मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच युद्धविराम (सीजफायर) लागू होने की खबरों के महज कुछ घंटों बाद ही लेबनान में नए सिरे से हिंसा भड़क उठी है। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में हवाई और जमीनी हमले किए, जिनमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। इस ताजा घटनाक्रम ने न केवल इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच बने नाजुक संतुलन को खतरे में डाल दिया है, बल्कि क्षेत्र में चल रहे व्यापक शांति प्रयासों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, दक्षिणी शहर नबातिह और उसके आसपास के कई गांव इजरायली हमलों की चपेट में आए। बमबारी के बाद कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और मलबे में लोगों के दबे होने की खबरें सामने आईं। राहत और बचाव दलों ने घंटों तक अभियान चलाकर लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, कम से कम सात लोगों की जान चली गई जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब शुक्रवार को इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष विराम को लेकर सकारात्मक संकेत मिले थे। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की कोशिशों के बाद दोनों पक्षों के बीच लड़ाई रोकने की संभावना जताई गई थी। हालांकि, हालात जल्द ही बिगड़ गए और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगा दिया।

इजरायली सेना का कहना है कि हिज्बुल्लाह ने शुक्रवार रात दक्षिणी लेबनान से इजरायली ठिकानों और सैन्य इकाइयों पर 50 से अधिक प्रोजेक्टाइल और रॉकेट दागे। सेना के अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों के जवाब में सैन्य कार्रवाई शुरू की गई और हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया गया। इजरायल का दावा है कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई है और वह अपने नागरिकों तथा सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।

दूसरी ओर, हिज्बुल्लाह ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि यदि इजरायल युद्धविराम का पालन करता है तो वह भी सीजफायर का सम्मान करेगा। हालांकि संगठन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कोई औपचारिक युद्धविराम पूरी तरह लागू हो चुका है या नहीं। हिज्बुल्लाह के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कतर, अमेरिका और ईरान जैसे देश दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम का असर क्षेत्रीय कूटनीति पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता को भी स्थगित करना पड़ा है। बताया जा रहा है कि ईरानी अधिकारियों ने स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक में भाग लेने की अपनी योजना रद्द कर दी, क्योंकि उनका मानना था कि लेबनान में जारी संघर्ष के बीच किसी सार्थक वार्ता की संभावना कम है। सूत्रों के अनुसार, ईरान चाहता था कि पहले युद्धविराम पूरी तरह प्रभावी हो और हिंसा बंद हो, उसके बाद ही आगे की बातचीत हो।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी अपनी निर्धारित यात्रा को टाल दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वाशिंगटन भी क्षेत्र की बिगड़ती स्थिति को लेकर चिंतित है। अमेरिका लंबे समय से इजरायल और लेबनान के बीच तनाव कम कराने की कोशिशों में शामिल रहा है और उसने कई बार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान हालात मध्य पूर्व में शांति स्थापना की प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बढ़ता है और सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो संघर्ष एक बार फिर बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। इससे न केवल लेबनान और इजरायल प्रभावित होंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर असर पड़ेगा।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इजरायल, हिज्बुल्लाह, अमेरिका, ईरान और अन्य मध्यस्थ देशों की गतिविधियों पर टिकी हुई हैं। दुनिया भर के कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तत्काल हिंसा रोकने की अपील की है। हालांकि जमीन पर जारी हमले और जवाबी कार्रवाई यह संकेत दे रहे हैं कि शांति का रास्ता अभी भी बेहद कठिन और अनिश्चित बना हुआ है।

लेबनान में हुए ताजा हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संघर्ष विराम की घोषणा मात्र से शांति स्थापित नहीं हो सकती। जब तक सभी पक्ष पूरी प्रतिबद्धता के साथ समझौतों का पालन नहीं करते और राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे नहीं बढ़ते, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद अधूरी ही रहेगी।

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