
उत्तरकाशी जहाँ एक ओर समूचा राष्ट्र 77वें गणतंत्र दिवस के उल्लास में डूबा था, वहीं उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में आपदा की मार झेल रहे ग्रामीणों के चेहरों पर मायूसी और आक्रोश की लकीरें साफ दिखाई दीं। अगस्त 2025 की उस भयावह त्रासदी को बीते महीनों बीत चुके हैं, लेकिन धराली के ग्रामीणों के घाव आज भी हरे हैं। सोमवार को अपनी लंबित मांगों और सरकार की ‘अनदेखी’ के खिलाफ सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय का रुख किया और कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए।
ADM और SDM के साथ वार्ता रही विफल
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने शुरुआत में ADM और SDM को वार्ता के लिए भेजा। घंटों चली बातचीत के बावजूद ग्रामीणों का रुख कड़ा बना रहा। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि उन्हें अब कोरे आश्वासनों की नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। अधिकारियों के साथ वार्ता विफल होने के बाद आंदोलन और उग्र होने लगा, जिसके बाद स्वयं जिलाधिकारी (DM) प्रशांत आर्य को मोर्चा संभालना पड़ा।
DM प्रशांत आर्य का 15 दिनों का अल्टीमेटम
स्थित को बिगड़ते देख जिलाधिकारी प्रशांत आर्य आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की व्यथा को सुना और मानवीय आधार पर उनकी मांगों को जायज ठहराया। DM ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि अगले 15 दिनों के भीतर उनकी सभी प्रमुख मांगों का निस्तारण कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी के इस ठोस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना धरना स्थगित करने का निर्णय लिया। हालांकि, ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन में समाधान नहीं हुआ, तो वे कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।
धराली आपदा पीड़ितों की प्रमुख मांगें: एक नजर में
धराली के ग्रामीणों ने अपनी मांगों का एक विस्तृत मांग पत्र प्रशासन को सौंपा है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
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कल्प केदार मंदिर का जीर्णोद्धार: मलबे में दबे प्राचीन और पौराणिक कल्प केदार मंदिर का पुनरुद्धार कर उसकी गरिमा बहाल की जाए।
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पुनर्वास नीति के तहत बसावट: जिन लोगों के घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थानों पर भूमि आवंटित कर बसाया जाए।
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व्यवसायिक मुआवजा: होटल और अन्य छोटे-बड़े व्यवसाय चलाने वाले व्यापारियों को उचित आर्थिक सहायता और दोबारा काम शुरू करने के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाए।
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वाहनों और दुकानों की क्षतिपूर्ति: मलबे में दबे टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर और पूरी तरह नष्ट हो चुकी दुकानों का पूर्ण मुआवजा दिया जाए।
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कृषि कर्ज माफी: लघु एवं सीमांत किसानों के कृषि ऋण को मानवीय आधार पर माफ किया जाए, क्योंकि उनकी उपजाऊ भूमि मलबे में तब्दील हो चुकी है।
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किरायेदारों को सहायता: आपदा में नुकसान झेलने वाले किरायेदारों को भी उचित राहत राशि दी जाए।
फ्लैशबैक: 5 अगस्त 2025 की वो काली रात
गौरतलब है कि बीते वर्ष 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धराली में कुदरत का कहर टूटा था। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण आया मलबा देखते ही देखते पूरे धराली बाजार को लील गया। पूरा इलाका लगभग 30 से 40 फीट मलबे के नीचे दब गया था। इस भीषण आपदा में 50 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और करोड़ों की संपत्ति खाक हो गई थी। आज भी कई परिवार ऐसे हैं जिनके पास न रहने को छत है और न आजीविका का कोई साधन।
ग्रामीणों का दर्द: “अब और नहीं सहेंगे अनदेखी”
काली कमली धर्मशाला में आयोजित सभा के दौरान ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की सुस्ती ने उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है। ग्रामीणों ने कहा, “हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन हमारी आजीविका और अस्तित्व के संकट पर सरकार कब जागेगी?”
प्रशासनिक दृष्टिकोण और आगे की राह
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रशासन आपदा पीड़ितों के प्रति संवेदनशील है। सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। 15 दिनों का समय इसलिए लिया गया है ताकि तकनीकी बाधाओं को दूर कर पीड़ितों के बैंक खातों में सीधे सहायता राशि पहुंचाई जा सके।
अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन 15 दिनों की अपनी समय सीमा पर खरा उतरता है या धराली के ग्रामीणों को एक बार फिर कलेक्ट्रेट की चौखट पर दस्तक देनी पड़ेगी।



