नागपुर (महाराष्ट्र): उपराजधानी नागपुर के नंदनवन इलाके से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ तीन लोगों द्वारा कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि आरोपियों ने इस घिनौनी वारदात का वीडियो भी बनाया और इसे वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता को ब्लैमेल किया।
नंदनवन पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है और बुधवार को एक 19 वर्षीय युवक को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि घटना में शामिल दो अन्य नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है।
दोस्ती के नाम पर विश्वासघात: क्या है पूरा मामला?
पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, यह घटना मंगलवार की है। आरोपियों में से एक पीड़ित लड़की का परिचित (दोस्त) बताया जा रहा है। इसी दोस्ती का फायदा उठाते हुए आरोपी ने लड़की को बहला-फुसलाकर नंदनवन स्थित अपने कमरे पर बुलाया। मासूम लड़की अपने दोस्त पर भरोसा कर वहाँ पहुँच गई, लेकिन उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि वहाँ दरिंदगी का जाल पहले से बिछा हुआ था।
जब लड़की कमरे पर पहुँची, तो वहाँ आरोपी के दो अन्य दोस्त भी पहले से मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पीड़िता और उसके दोस्त के बीच के कुछ निजी पलों का छिपकर वीडियो बना लिया।
ब्लैकमेलिंग और सामूहिक बलात्कार की भयावहता
प्राथमिक जांच और पीड़िता की शिकायत के अनुसार, वीडियो बनाने के बाद आरोपियों का असली चेहरा सामने आया। उन्होंने लड़की को वह वीडियो दिखाया और धमकी दी कि अगर उसने उनकी बात नहीं मानी, तो वे इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे और उसे समाज में बदनाम कर देंगे।
इस धमकी के साये में आरोपियों ने नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार किया। आरोपियों के चंगुल से छूटने के बाद जब लड़की घर पहुँची, तो उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहद खराब थी। पीड़िता की तबीयत बिगड़ने के बाद परिजनों को संदेह हुआ, जिसके बाद किशोरी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और POCSO एक्ट
परिजनों ने बिना समय गंवाए पीड़िता को साथ लेकर नंदनवन पुलिस स्टेशन का रुख किया। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज की।
कानूनी कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
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गिरफ्तारी: पुलिस ने 19 वर्षीय मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
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हिरासत: वारदात में शामिल दो अन्य लड़के नाबालिग पाए गए हैं, जिन्हें कानून के मुताबिक बाल सुधार गृह (हिरासत) में भेजा गया है।
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गंभीर धाराएं: पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
नंदनवन पुलिस स्टेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “मामले की जांच बहुत बारीकी से की जा रही है। साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है और पीड़िता को आवश्यक चिकित्सा सहायता व मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग मुहैया कराई जा रही है।”
डिजिटल युग में बढ़ता ‘वीडियो ब्लैकमेलिंग’ का खतरा
यह मामला एक बार फिर उस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है कि कैसे अपराधी अब डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल हथियार के तौर पर कर रहे हैं। नागपुर में पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ वीडियो बनाकर नाबालिगों या महिलाओं को ब्लैकमेल किया गया है।
समाजशास्त्रियों का मानना है कि युवाओं में बढ़ती ‘साइबर क्राइम’ की प्रवृत्ति और नैतिक मूल्यों में गिरावट इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार है। नंदनवन की इस घटना ने स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल चलाकर कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है।
सुरक्षा और जागरूकता की अपील
नागपुर पुलिस ने इस घटना के बाद अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों और उनकी मित्रता पर ध्यान दें। साथ ही, बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा के बारे में भी जागरूक करें।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े वीडियो या पीड़िता की पहचान साझा करने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ भी आईटी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
न्याय की प्रतीक्षा में ‘उपराजधानी’
नागपुर की इस घटना ने शहर की कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर फिर से सवालिया निशान लगा दिए हैं। यद्यपि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को दबोच लिया है, लेकिन 15 वर्षीय पीड़िता के मन पर लगे जख्मों को भरने में लंबा समय लगेगा। अब सबकी नजरें कोर्ट की कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा हो।



