
नई दिल्ली: भारतीय उपमहाद्वीप के वायुमंडल में इस समय मौसम के कई रंग एक साथ देखने को मिल रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी, मूसलाधार बारिश, ओलावृष्टि और मानसूनी रफ्तार का एक अनूठा और जटिल संयोजन बना हुआ है। जहां एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में झमाझम बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बनी हुई है, वहीं उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य अब भी भीषण लू (Heatwave) की चपेट में झुलस रहे हैं। दूसरी तरफ, दक्षिण और पूर्वी भारत में मानसून की सक्रियता ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे आने वाले दिनों में देश के बड़े हिस्से को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।
पश्चिमी विक्षोभ का डबल अटैक: 13 तारीख तक आंधी, बिजली और ओलावृष्टि का अलर्ट
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत के वायुमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते आगामी 13 तारीख तक मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदला रहेगा। इस मौसमी सिस्टम के कारण आसमान में घने बादलों की आवाजाही के साथ रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रहने की प्रबल संभावना है।
इस सिस्टम का सबसे आक्रामक रूप मुख्य रूप से 11 और 12 तारीख को देखने को मिलेगा, जब मैदानी इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने, आकाशीय बिजली चमकने और गंभीर ओलावृष्टि होने की चेतावनी दी गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसलों और मंडियों में रखे अनाज को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें, क्योंकि अचानक होने वाली ओलावृष्टि फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
पिछले 24 घंटों का लेखा-जोखा: कहीं समंदर जैसी बारिश, कहीं गिरे ओले
बीते 24 घंटों के दौरान देश के कई राज्यों में कुदरत का उग्र रूप देखने को मिला है। हिमालयी क्षेत्रों, पश्चिम बंगाल और सुदूर दक्षिण के राज्य तमिलनाडु में मानसून और पश्चिमी विक्षोभ की जुगलबंदी के कारण कुछ स्थानों पर 12 से लेकर 20 सेंटीमीटर तक अत्यंत भारी बारिश दर्ज की गई है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है।
इसके अलावा, दक्षिण कोंकण, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा, केरल, लक्षद्वीप और तेलंगाना में भी एक-दो स्थानों पर मूसलाधार बारिश ने दस्तक दी है। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश सहित पंजाब, हरियाणा और पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में अचानक हुई ओलावृष्टि ने तापमान को तो नीचे गिराया है, लेकिन जनजीवन को आंशिक रूप से प्रभावित किया है। देश के एक बड़े भूभाग में गरज-चमक के साथ तेज हवाओं का दौर लगातार बना हुआ है।
मानसून की प्रोग्रेस रिपोर्ट: छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड में जल्द दस्तक
देश के अन्नदाताओं के लिए राहत की खबर यह है कि मानसून के आगे बढ़ने के लिए वायुमंडलीय परिस्थितियां पूरी तरह से अनुकूल बनी हुई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र, कर्नाटक के शेष हिस्सों, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में तेजी से आगे बढ़ सकता है। इसी अवधि के दौरान मानसून तमिलनाडु के बचे हुए हिस्सों को भी पूरी तरह से कवर कर लेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसी सप्ताह के अंत तक छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और उड़ीसा के कुछ हिस्सों में मानसून अपनी पहली अधिकारिक दस्तक दे सकता है। मध्य भारत में बने निम्न दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) के कारण मानसूनी हवाओं को मुख्य भूमि की ओर बढ़ने में काफी मदद मिल रही है।
तापमान का उतार-चढ़ाव: पारा गिरने के बाद फिर सताएगी गर्मी
पश्चिमी विक्षोभ के चलते मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के तापमान में अगले 24 घंटों के दौरान कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। हालांकि, इसके बाद यानी 11 से 13 तारीख के बीच उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में पारे में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को भीषण तपिश से कुछ समय के लिए बड़ी राहत मिलेगी।
मौसम का यू-टर्न: मौसम विभाग ने सचेत किया है कि यह राहत अस्थायी होगी। 13 तारीख के बाद पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव कम होते ही तापमान में फिर से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
इसी तरह, देश के मध्य भाग में 12 तारीख तक मौसम स्थिर रहेगा, जिसके बाद तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आएगी। पूर्वी भारत के राज्यों में भी 12 से 14 के बीच पारा 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक नीचे लुढ़कने का अनुमान है।
मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी
मौसम की गंभीरता को देखते हुए आईएमडी ने देश के एक बड़े हिस्से के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ (Orange Alert) जारी किया है। पूर्वी मध्य प्रदेश, झारखंड, उड़ीसा, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय के साथ-साथ अंडमान निकोबार द्वीप समूह में प्रशासन को अलर्ट पर रहने को कहा गया है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कुछ जगहों पर अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, तेलंगाना, तटीय कर्नाटक, केरल और लक्षद्वीप में भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। तटीय इलाकों जैसे कर्नाटक, गोवा और केरल में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के कारण मछुआरों को समुद्र में न जाने की हिदायत दी गई है।
यूपी-कश्मीर में लू का सितम बरकरार, राजस्थान में धूल भरी आंधी
एक तरफ जहां आधा देश बारिश से सराबोर है, वहीं जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में लू का कहर लगातार नागरिकों की परीक्षा ले रहा है। शुष्क और गर्म पछुआ हवाओं के कारण इन राज्यों में दोपहर का तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर चल रहा है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि पश्चिमी विक्षोभ के टकराव के कारण जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में अचानक मौसम बदलकर ओले गिर सकते हैं, जिसके लिए यहां भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके विपरीत, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मरुस्थलीय व मैदानी इलाकों में एक-दो स्थानों पर 50 किमी/घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी (Dust Storm) चलने की आशंका है, जो दृश्यता (Visibility) को प्रभावित कर सकती है। पूर्वी भारत में भी आंधी-तूफान का असर देखने को मिलेगा।



