By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: थलपति विजय की सियासी पारी: क्या बिना गठबंधन तमिलनाडु में जीत पाएंगे मैदान?
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > थलपति विजय की सियासी पारी: क्या बिना गठबंधन तमिलनाडु में जीत पाएंगे मैदान?
देशफीचर्ड

थलपति विजय की सियासी पारी: क्या बिना गठबंधन तमिलनाडु में जीत पाएंगे मैदान?

The Hill India News
Last updated: August 22, 2025 3:48 pm
The Hill India News
Published: August 22, 2025
Share
SHARE

चेन्नई, 22 अगस्त: साउथ सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय अब राजनीति के मैदान में उतर चुके हैं। गुरुवार को मदुरै में आयोजित अपनी पहली बड़ी रैली में उन्होंने साफ ऐलान किया कि उनकी नई पार्टी किसी भी बड़े दल से गठबंधन नहीं करेगी। विजय ने कहा कि वे न तो सत्ताधारी डीएमके से हाथ मिलाएंगे और न ही बीजेपी से। उनके बयान से यह भी स्पष्ट है कि वे एआईएडीएमके को भी गंभीरता से नहीं ले रहे।

Contents
तमिलनाडु की राजनीति: गठबंधन का खेलDMK और AIADMK का अटूट जनाधारविजय का स्टारडम: प्लस या माइनस?गठबंधन से दूरी: साहस या जोखिम?

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या विजय बिना किसी गठबंधन के तमिलनाडु जैसे राजनीतिक समीकरणों से भरे राज्य में सत्ता तक पहुँच पाएंगे?


तमिलनाडु की राजनीति: गठबंधन का खेल

तमिलनाडु की राजनीति का इतिहास गवाह है कि यहां गठबंधन के बिना सत्ता तक पहुंचना लगभग असंभव रहा है।
सत्ताधारी डीएमके लगातार अपने गठबंधन को मजबूत कर रही है और पहले से ही दस से अधिक दल उनके साथ खड़े हैं। दूसरी तरफ एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन भी अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश में जुटा है।

चुनावी गणित को समझने के लिए कुछ उदाहरण अहम हैं—

  • 1996 में अपने सबसे बुरे दौर में भी एआईएडीएमके को लगभग 27% वोट शेयर मिला था, लेकिन सीटें केवल 4 ही मिल पाईं।
  • 2011 के विधानसभा चुनाव में डीएमके गठबंधन ने करीब 39% वोट शेयर हासिल किया, मगर 234 सीटों में से सिर्फ 31 सीटें ही जीत सका।

इससे साफ है कि 30% से ज्यादा वोट शेयर भी सत्ता दिलाने की गारंटी नहीं है, जब तक सही गठबंधन का गणित न बैठाया जाए।


DMK और AIADMK का अटूट जनाधार

पिछले कई दशकों से तमिलनाडु की राजनीति दो ध्रुवों—डीएमके और एआईएडीएमके—के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
यहां तक कि करुणानिधि, एमजीआर और जयललिता जैसे दिग्गज नेताओं के समय में भी, दोनों दलों ने गठबंधन बनाकर ही अपनी सत्ता सुनिश्चित की थी।
आज भी इन दोनों पार्टियों के पास मजबूत कैडर, स्थायी वोट बैंक और घर-घर पहचाने जाने वाले चुनाव चिन्ह हैं। यही वजह है कि नए खिलाड़ी को राजनीतिक जमीन पर पैर जमाना आसान नहीं है।


विजय का स्टारडम: प्लस या माइनस?

थलपति विजय का सिनेमा में स्टारडम निर्विवाद है। उनकी लोकप्रियता सिर्फ तमिलनाडु ही नहीं, हिंदी भाषी राज्यों में भी है। यही वजह है कि उनके राजनीति में उतरते ही चर्चा तेज हो गई है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या स्टारडम वोटों में तब्दील हो पाएगा?
इतिहास बताता है कि तमिलनाडु में फिल्मी पृष्ठभूमि से आए नेताओं को जनता ने सिर-आंखों पर बैठाया है—चाहे वह एमजीआर हों या जयललिता। पर उनकी सफलता की वजह सिर्फ स्टारडम नहीं, बल्कि मजबूत राजनीतिक संगठन और गठबंधन की रणनीति भी रही।


गठबंधन से दूरी: साहस या जोखिम?

विजय का गठबंधन से दूर रहने का ऐलान उनकी राजनीति को साफ और स्वतंत्र छवि जरूर देता है, लेकिन यह रणनीति चुनावी मैदान में जोखिम भरी साबित हो सकती है।
तमिलनाडु जैसे राज्य में बिना गठबंधन के वोट शेयर को सीटों में बदलना बेहद कठिन है। विजय को न केवल नए सिरे से संगठन खड़ा करना होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों और पारंपरिक वोट बैंक में भी पैठ बनानी होगी।

विजय का राजनीतिक डेब्यू तमिलनाडु की राजनीति में हलचल मचा चुका है। उनका स्टारडम शुरुआती भीड़ जरूर जुटा सकता है, लेकिन क्या यह समर्थन स्थायी वोट बैंक में बदलेगा?
फिलहाल स्थिति यही कहती है कि बिना गठबंधन के सत्ता का रास्ता बेहद कठिन होगा। विजय को अगर सचमुच एमजीआर जैसा मुकाम पाना है तो उन्हें न केवल जनता से भावनात्मक जुड़ाव बनाना होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्टी को संगठित करना और सही चुनावी रणनीति अपनाना भी जरूरी होगा।

You Might Also Like

Uttarakhand: विकासनगर के पौंधा में जमीन घोटाला, RTI में पूरे मामले का हुआ खुलासा
शख्स ने अपनी लिव-इन पार्टनर की 14 साल की नाबालिग बेटी से किया बलात्‍कार, हुआ गिरफ्तार
Uttarakhand: प्रदेशभर में आयोजित आयुष्मान सभाओं में जुटे हजारों लोग
लद्दाख : सेना प्रमुख ने लद्दाख का दौरा किया
Uttarakhand: युवाओं के ‘भविष्य’ पर सियासी बिसात: राहुल गांधी का देहरादून दौरा और उत्तराखंड पेपर लीक की सुलगती राजनीति
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

दिल्ली में हाई-वोल्टेज ड्रामा: राहुल, प्रियंका और अखिलेश यादव पुलिस हिरासत में, पीएम आवास के बाहर धरना स्थल छावनी में तब्दील

The Hill India News
The Hill India News
July 21, 2026
हरिद्वार आम महोत्सव में मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान: किसान उत्तराखंड की असली ताकत, एप्पल मिशन पर 80% सब्सिडी और ‘हिमालय ब्रांड’ से ग्लोबल पहचान
उत्तराखंड हाईकोर्ट की पुलिस को सख्त फटकार: प्रभात ध्यानी की ट्रेन से गिरफ्तारी पर पूछा- क्या नागरिकों की स्वतंत्रता छीन ली गई है?
राहुल गांधी का 7 लोक कल्याण मार्ग पर धरना: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पेपर लीक पर संसद से सड़क तक संग्राम
बारिश का महाअलर्ट: दिल्ली से हिमाचल और यूपी-बिहार तक मौसम का कहर, 20 राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी; प्रशासन अलर्ट पर
छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरी कांग्रेस: राहुल, प्रियंका और खड़गे का पीएम आवास तक मार्च, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज
‘मेरी पीठ में खंजर घोंपा, सारे चोर भाजपा में चले गए’— ममता बनर्जी का बड़ा हमला, विपक्षी एकता की भी दोहराई अपील
मध्यप्रदेश में UCC को मिली विधानसभा की मंजूरी: हंगामे, ‘जय श्रीराम’ के नारों और तीखी बहस के बीच पास हुआ ऐतिहासिक विधेयक
पेपर लीक पर उत्तराखंड में उबाल: गैरसैंण से हल्द्वानी तक छात्रों का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज
‘लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में…’ बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट में मतभेद, अब चीफ जस्टिस तय करेंगे कानूनी दिशा
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?