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डिजिटल युग में ऐतिहासिक कदम: Census 2027 की शुरुआत, पहली बार मिलेगी स्व-गणना की सुविधा

नई दिल्ली: देश में जनगणना की प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए Census 2027 का पहला चरण आज से शुरू हो गया है। यह भारत की 16वीं जनगणना और आज़ादी के बाद 8वीं जनगणना है, जिसे इस बार पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित किया जा रहा है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक डेटा संग्रह अभियान भी माना जा रहा है।

इस बार की जनगणना कई मायनों में खास है, क्योंकि पहली बार नागरिकों को “स्व-गणना” (Self-enumeration) का विकल्प दिया गया है। यानी अब लोग खुद ही ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए अपनी जानकारी भर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया तेज, सटीक और अधिक पारदर्शी होगी।

दो चरणों में पूरी होगी जनगणना

सरकार ने Census 2027 को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया है। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना (HLO) का है, जो अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच पूरा किया जाएगा। इस चरण में देशभर के घरों की स्थिति, बुनियादी सुविधाएं, संपत्ति और आवास से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी।

प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश को इस कार्य को पूरा करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। इसके पहले 15 दिनों की अवधि नागरिकों के लिए स्व-गणना के रूप में निर्धारित की गई है, जिसमें वे स्वयं ऑनलाइन डेटा दर्ज कर सकते हैं।

दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जो फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। हालांकि, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के कुछ बर्फीले और दुर्गम क्षेत्रों, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में यह प्रक्रिया पहले यानी सितंबर 2026 में ही पूरी कर ली जाएगी।

पहली बार होगी जातीय गणना

इस बार की जनगणना में एक बड़ा बदलाव यह है कि दूसरे चरण में जातियों की गिनती भी की जाएगी। इससे सरकार को सामाजिक-आर्थिक नीतियों को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति से उसकी जनसांख्यिकीय स्थिति, शिक्षा स्तर, आर्थिक स्थिति, प्रवासन और प्रजनन से जुड़ी जानकारी ली जाएगी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगा पूरा डेटा संग्रह

Census 2027 के तहत इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से की जा रही है। एन्यूमेरेटर यानी जनगणना कर्मी अब कागज की बजाय स्मार्टफोन का इस्तेमाल करेंगे। वे एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए डेटा सीधे सर्वर पर अपलोड करेंगे, जिससे डेटा एंट्री में गलती की संभावना कम होगी और प्रोसेसिंग तेज होगी।

इसके अलावा, आम नागरिकों के लिए भी एक ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध कराया गया है, जहां वे खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी सहित कुल 16 भाषाओं में उपलब्ध होगा, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों के लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकें।

स्व-गणना से बढ़ेगी पारदर्शिता और सुविधा

स्व-गणना का विकल्प इस बार की जनगणना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। इससे लोगों को सरकारी कर्मचारी के इंतजार की जरूरत नहीं होगी और वे अपनी सुविधा के अनुसार समय पर जानकारी भर सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डेटा की सटीकता भी बढ़ेगी, क्योंकि लोग स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करेंगे। साथ ही, इससे समय और संसाधनों की भी बचत होगी।

राज्यवार तय की गई तारीखें

सरकार ने विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए अलग-अलग समय-सीमा निर्धारित की है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली (नई दिल्ली नगर परिषद और दिल्ली छावनी बोर्ड), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में 16 अप्रैल से 15 मई 2026 तक हाउस लिस्टिंग का काम किया जाएगा।

इन क्षेत्रों में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक स्व-गणना का समय दिया गया है। वहीं मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में 1 मई से 30 मई 2026 तक हाउस लिस्टिंग की जाएगी और 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक स्व-गणना का अवसर मिलेगा।

11,000 करोड़ से अधिक का बजट

केंद्र सरकार ने Census 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। यह बजट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधनों और डेटा प्रबंधन के लिए खर्च किया जाएगा।

क्यों है यह जनगणना खास?

यह जनगणना कई कारणों से ऐतिहासिक मानी जा रही है। पहला, यह पूरी तरह डिजिटल होगी। दूसरा, इसमें स्व-गणना की सुविधा दी गई है। तीसरा, इसमें जातीय आंकड़ों का संग्रह भी किया जाएगा। और चौथा, यह सरकार की नीतियों और योजनाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी।

जनगणना से प्राप्त आंकड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसलिए यह सिर्फ एक डेटा संग्रह प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण आधार है।

 

 

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