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Uttarakhand: जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार: उत्तराखंड में धामी सरकार का ‘सुशासन मॉडल’ बना मिसाल, गाँवों में पहुँच रहा प्रशासन

The Hill India News
Last updated: January 10, 2026 1:44 pm
The Hill India News
Published: January 10, 2026
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देहरादून | उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियाँ हमेशा से प्रशासनिक पहुँच के लिए एक बड़ी चुनौती रही हैं। लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस धारणा को बदलते हुए “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के जरिए एक नई इबारत लिख दी है। शासन को फाइलों से निकालकर सीधे जनता की दहलीज तक पहुँचाने के इस महाभियान ने प्रदेश में सुशासन और संवेदनशीलता की नई परिभाषा गढ़ी है।

Contents
क्या है “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान?ग्राम चौपाल और बहुउद्देश्यीय शिविर: समाधान का केंद्रमुख्यमंत्री धामी की सीधी मॉनिटरिंग और औचक निरीक्षणलाखों नागरिकों तक पहुँचा लाभ: आँकड़ों की जुबानीउत्तराखंड अस्मिता और सुशासन का समन्वयभविष्य की राह: डिजिटल और व्यक्तिगत सेवा का संगम

17 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ यह अभियान अब अपने चरमोत्कर्ष पर है, जिससे राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लाखों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

क्या है “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान?

यह अभियान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें वे ‘सरलीकरण, समाधान और निस्तारण’ पर जोर देते हैं। इस पहल के तहत प्रशासन को जिला मुख्यालयों और तहसीलों से निकालकर न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर ले जाया गया है।

45 दिनों तक चलने वाले इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन लोगों तक पहुँचना है जो अपनी समस्याओं को लेकर देहरादून या जिला मुख्यालयों तक नहीं पहुँच पाते। इस अभियान के माध्यम से सरकार स्वयं जनता के पास जाकर उनकी शिकायतों का मौके पर निस्तारण कर रही है।

ग्राम चौपाल और बहुउद्देश्यीय शिविर: समाधान का केंद्र

इस अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार प्रदेश के सभी 13 जनपदों में आयोजित हो रहे बहुउद्देश्यीय शिविर हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित इन शिविरों में स्वास्थ्य, राजस्व, समाज कल्याण, कृषि और पशुपालन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी एक ही छत के नीचे मौजूद रहते हैं।

  • मौके पर निस्तारण: शिविरों में आने वाली शिकायतों का एक बड़ा हिस्सा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा तत्काल सुलझाया जा रहा है।

  • प्रमाण पत्र और योजनाएँ: नागरिकों को आय, जाति, मूल निवास जैसे महत्वपूर्ण प्रमाण पत्रों के लिए अब हफ्तों इंतजार नहीं करना पड़ता। इन शिविरों में आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।

  • सामाजिक सुरक्षा: वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं के लाभार्थियों का मौके पर ही पंजीकरण और सत्यापन किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री धामी की सीधी मॉनिटरिंग और औचक निरीक्षण

अभियान की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं विभिन्न जनपदों के शिविरों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। सीएम धामी ने न केवल अधिकारियों को जवाबदेह बनाया है, बल्कि वे स्वयं ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है: “लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है। सरकार का कर्तव्य है कि वह जनता के द्वार जाए, न कि जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ें।” मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) स्तर से प्रत्येक जिले की प्रगति की रोजाना मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे इस अभियान की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बनी हुई है।

लाखों नागरिकों तक पहुँचा लाभ: आँकड़ों की जुबानी

अभियान के तहत अब तक आयोजित सैंकड़ों शिविरों में लाखों लोग शामिल हो चुके हैं। दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक, इस पहल को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।

  1. आजीविका और रोजगार: युवाओं को स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी और ऋण संबंधी सहायता प्रदान की जा रही है।

  2. आर्थिक सहायता: केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुँचाने की प्रक्रिया को सुगम बनाया गया है।

  3. जनसंवाद: शासन और जनता के बीच की दूरी कम होने से लोगों में सरकार के प्रति विश्वास और सकारात्मकता बढ़ी है।


उत्तराखंड अस्मिता और सुशासन का समन्वय

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की अस्मिता और जवाबदेही का एक मॉडल है। राज्य की कठिन परिस्थितियों में रहने वाली ‘मातृशक्ति’ और बुजुर्गों के लिए यह अभियान किसी वरदान से कम नहीं है।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के जमीनी कार्यक्रमों से सरकारी मशीनरी में सक्रियता आती है और लंबित फाइलों का बोझ कम होता है। यह अभियान सीधे तौर पर भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा रहा है क्योंकि बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है।

भविष्य की राह: डिजिटल और व्यक्तिगत सेवा का संगम

जहाँ एक ओर सरकार ने 6 नए राजस्व पोर्टल्स के जरिए डिजिटल क्रांति की शुरुआत की है, वहीं “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” के माध्यम से व्यक्तिगत संपर्क (Physical Outreach) को भी बनाए रखा है। यह डिजिटल और फिजिकल गवर्नेंस का एक अनूठा संगम है, जो ‘विकसित उत्तराखंड’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह जनसेवा पहल उत्तराखंड में एक नए युग की शुरुआत है। प्रशासन का जनता के प्रति संवेदनशील होना और समस्याओं के समाधान के लिए स्वयं चलकर द्वार तक आना, लोकतंत्र की असली जीत है। 45 दिनों का यह सफर समाप्त होने के बाद भी, इसके दूरगामी परिणाम प्रदेश की विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित होंगे।

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