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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > हरिद्वार में अपनी ही मासूम बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को 20 साल की कठोर सजा, मोबाइल रिकॉर्डिंग बनी सबसे बड़ा सबूत
उत्तराखंडफीचर्ड

हरिद्वार में अपनी ही मासूम बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को 20 साल की कठोर सजा, मोबाइल रिकॉर्डिंग बनी सबसे बड़ा सबूत

The Hill India News
Last updated: February 22, 2026 3:57 am
The Hill India News
Published: February 22, 2026
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सांकेतिक तस्वीर
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हरिद्वार | धर्मनगरी हरिद्वार में रिश्तों को तार-तार कर देने वाले एक जघन्य मामले में न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाया है। अपनी ही 11 साल की नाबालिग बेटी के साथ कई वर्षों तक दुष्कर्म करने और उसे जान से मारने की धमकी देने वाले कलयुगी पिता को अदालत ने 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला जज (FTSC) चंद्रमणि राय की अदालत ने न केवल आरोपी को जेल भेजा, बल्कि उस पर 36 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

Contents
2023 में दर्ज हुआ था मुकदमा: पीड़िता की आपबीतीजब अपनों ने ही फेर लिया मुंह: समाज और परिवार की उदासीनताडिजिटल साक्ष्य: मोबाइल रिकॉर्डिंग ने पलटा पूरा केसकोर्ट का सख्त फैसला और मुआवजान्याय की जीत और समाज को संदेश

यह मामला समाज के उस काले चेहरे को उजागर करता है जहां एक रक्षक ही भक्षक बन गया, लेकिन अंततः कानून की जीत हुई। Haridwar Court Verdict ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि इस तरह के घृणित अपराधों के लिए न्याय प्रणाली में कोई जगह नहीं है।


2023 में दर्ज हुआ था मुकदमा: पीड़िता की आपबीती

मामले की शुरुआत 27 फरवरी 2023 को हुई थी, जब हरिद्वार के कनखल थाना क्षेत्र में इस घृणित अपराध का खुलासा हुआ। शासकीय अधिवक्ता भूपेंद्र चौहान के अनुसार, 11 वर्षीय पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर अपने पिता के खिलाफ तहरीर दी थी।

पीड़िता ने जो खुलासा किया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। उसने बताया कि जब वह महज 8-9 साल की थी, तब से उसका पिता उसके साथ जबरदस्ती गलत काम (दुष्कर्म) कर रहा था। आरोपी पिता उसे डराता-धमकाता था कि यदि उसने यह बात किसी को बताई, तो वह उसे जान से मार देगा। POCSO Case Conviction की दिशा में यह पीड़िता का पहला और सबसे साहसी कदम था।

जब अपनों ने ही फेर लिया मुंह: समाज और परिवार की उदासीनता

इस मामले का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि मासूम बच्ची ने मदद के लिए अपने परिवार के अन्य सदस्यों की ओर भी हाथ फैलाया था। उसने परिजनों को पिता की करतूतों के बारे में बताया, लेकिन ‘लोक-लाज’ और ‘पारिवारिक बदनामी’ के डर से अन्य सदस्य उसकी बात को अनसुना करते रहे। यह सामाजिक उदासीनता ही थी जिसने आरोपी को लंबे समय तक अपराध करने का साहस दिया।


डिजिटल साक्ष्य: मोबाइल रिकॉर्डिंग ने पलटा पूरा केस

जब किसी ने पीड़िता की बात पर यकीन नहीं किया, तो उस नन्ही बच्ची ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने कोर्ट में आरोपी की गर्दन पकड़ ली। पीड़िता ने अपने और पिता के बीच हुई बातचीत की मोबाइल रिकॉर्डिंग कर ली।

  1. ठोस सबूत: यह रिकॉर्डिंग ही इस केस में ‘ट्रम्प कार्ड’ साबित हुई।

  2. सीएफएसएल जांच: पुलिस ने उस रिकॉर्डिंग को जब्त कर आरोपी की आवाज के परीक्षण (Voice Profiling) के लिए CFSL (Central Forensic Science Laboratory) भेजा।

  3. पुष्टि: जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाज आरोपी पिता की ही है।

इस डिजिटल सबूत ने बचाव पक्ष के तमाम दावों को ध्वस्त कर दिया और पुलिस को कोर्ट में एक मजबूत चार्जशीट दाखिल करने में मदद की।


कोर्ट का सख्त फैसला और मुआवजा

मुकदमे की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से 6 गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष ने 2 गवाहों के माध्यम से अपना पक्ष रखने की कोशिश की। सबूतों और गवाहों के मद्देनजर कोर्ट ने आरोपी पिता को दोषी करार देते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई:

  • कारावास: 20 वर्ष की कठोर कैद।

  • अर्थदंड: 30 हजार रुपये का जुर्माना (जमा न करने पर 3 महीने की अतिरिक्त कैद)।

  • मुआवजा: कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि पीड़िता को एक महीने के भीतर 4 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान की जाए।

अदालत ने इस निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जिलाधिकारी को भेजकर उचित प्रतिकर दिलाने के कड़े निर्देश दिए हैं।


न्याय की जीत और समाज को संदेश

Haridwar Crime News की यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर घर के भीतर मासूम बच्चे कितने सुरक्षित हैं? हालांकि, इस केस में पीड़िता की बहादुरी और तकनीकी साक्ष्य (रिकॉर्डिंग) ने न्याय सुनिश्चित किया। कोर्ट का यह फैसला उन अपराधियों के लिए नजीर है जो रिश्तों की गरिमा को पैरों तले रौंदते हैं।

यह मामला यह भी सिखाता है कि बच्चों की बातों को कभी भी अनसुना नहीं किया जाना चाहिए। उनकी छोटी-छोटी शिकायतें किसी बड़े अपराध की आहट हो सकती हैं।

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