
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से कर्तव्यनिष्ठा और वीरता की एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हैं। गोंडा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर एक संदिग्ध चोर को कानून के शिकंजे से भागने से रोकने की कोशिश में जीआरपी (Govenment Railway Police) का एक जवान अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी जंग हार गया। इस भीषण गोंडा रेलवे स्टेशन हादसा में सिपाही ने अपराधी को तो पकड़ लिया, लेकिन इस प्रक्रिया में उसे अपने दोनों पैर गंवाने पड़े।
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस के उस साहस की मिसाल है, जहाँ एक जवान ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना अपराधी को भागने नहीं दिया। फिलहाल घायल सिपाही का उपचार अस्पताल में चल रहा है, जहाँ उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।
रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना: आधी रात का वो मंजर
अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना मंगलवार की आधी रात करीब 12 बजे गोंडा जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या एक पर घटित हुई। मऊ जिले के मूल निवासी और 2018 बैच के युवा सिपाही आकाश सिंह (29 वर्ष) ड्यूटी पर तैनात थे। उन्होंने मारपीट और कथित चोरी के एक मामले में सुनील कुमार नामक संदिग्ध को हिरासत में लिया था।
पूछताछ के लिए आरोपी को जीआरपी थाने ले जाया जा रहा था। जैसे ही वे प्लेटफॉर्म संख्या एक पर पहुँचे, तभी अचानक आरोपी सुनील ने सिपाही आकाश का हाथ झटक दिया और अपनी जान बचाकर भागने लगा। उसी समय प्लेटफॉर्म पर डिब्रूगढ़-चंडीगढ़ एक्सप्रेस (15903) धीमी गति से प्रवेश कर रही थी।
मौत को मात देकर अपराधी को दबोचा
आरोपी ने खुद को पुलिस से बचाने के लिए चलती ट्रेन के कोच में चढ़ने का प्रयास किया। सिपाही आकाश सिंह ने तत्परता दिखाते हुए उसका पीछा किया। चश्मदीदों के मुताबिक, आकाश ने अपनी जान जोखिम में डालकर दौड़ती ट्रेन के पायदान पर लटके आरोपी का हाथ पकड़ लिया और उसे पूरी ताकत से नीचे खींच लिया। आरोपी सुनील तो ट्रेन से नीचे गिर गया और पुलिस की पकड़ में आ गया, लेकिन इस संघर्ष में सिपाही आकाश का संतुलन बिगड़ गया।
संतुलन बिगड़ने के कारण आकाश ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच के जानलेवा गैप (खाली जगह) में गिर गए। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, ट्रेन के पहिये उनके पैरों के ऊपर से गुजर गए। प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों और अन्य पुलिसकर्मियों के बीच चीख-पुकार मच गई।
अस्पताल में जिंदगी की जंग: डॉक्टरों ने किए पैर अलग
हादसे के तुरंत बाद लहूलुहान आकाश को साथी पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन में जिला अस्पताल पहुँचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, गोंडा रेलवे स्टेशन हादसा इतना भीषण था कि सिपाही के दोनों पैर बुरी तरह कुचले जा चुके थे, जिन्हें सर्जरी के जरिए शरीर से अलग करना पड़ा है। 29 वर्षीय युवा सिपाही के साथ हुए इस हादसे ने पूरे पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है।
जीआरपी और स्थानीय प्रशासन में शोक की लहर
घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे पुलिस के उच्च अधिकारी और जिला प्रशासन के लोग मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने सिपाही आकाश सिंह के जज्बे की सराहना करते हुए इसे कर्तव्यपरायणता की पराकाष्ठा बताया है।
“आकाश सिंह एक बेहद मेहनती और अनुशासित सिपाही हैं। जिस तरह उन्होंने अपराधी को भागने से रोकने के लिए अपनी जान की बाजी लगाई, वह विभाग के लिए गौरव की बात है, लेकिन उनके साथ हुए इस हादसे ने हमें गहरा दुख पहुँचाया है। विभाग उनके परिवार के साथ खड़ा है।” – वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
परिवार में कोहराम, मऊ से गोंडा तक दुआओं का दौर
आकाश सिंह मूल रूप से मऊ जिले के रहने वाले हैं। 2018 में पुलिस बल में शामिल होने के बाद से ही वे अपनी साफ-सुथरी छवि और बहादुरी के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके घर पर इस हादसे की खबर पहुँचते ही कोहराम मच गया है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस जांबाज सिपाही के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं और सरकार से उनके भविष्य के लिए विशेष आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल: क्या बदला जा सकता था घटनाक्रम?
इस गोंडा रेलवे स्टेशन हादसा ने एक बार फिर रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल और अपराधियों को ले जाते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर बहस छेड़ दी है। हालांकि, सिपाही आकाश ने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच के गैप को कम करने और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अपराधियों की हैंडलिंग के लिए अधिक पुख्ता इंतजाम होने चाहिए।
खाकी का असली हीरो
आकाश सिंह आज अस्पताल के बिस्तर पर एक कठिन संघर्ष लड़ रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह साबित कर दिया कि एक पुलिसकर्मी के लिए उसका फर्ज उसकी अपनी जान से बड़ा होता है। अपराधी सुनील कुमार को पुलिस ने फिर से हिरासत में ले लिया है, लेकिन उसकी एक छोटी सी कोशिश ने एक होनहार सिपाही की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया।
गोंडा की यह मिट्टी आकाश सिंह की बहादुरी को हमेशा याद रखेगी, जिन्होंने अपने पैरों की परवाह न करते हुए कानून के इकबाल को बुलंद रखा।


