देहरादून: साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और एसटीएफ लगातार अभियान चला रहे हैं, लेकिन साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों और बैंकिंग सिस्टम को निशाना बना रहे हैं। देहरादून के डालनवाला कोतवाली क्षेत्र से सामने आया ताजा मामला इसी बदलते साइबर अपराध की गंभीर तस्वीर पेश करता है। यहां अलग-अलग स्थानों पर लगे छह बैंकों के एटीएम से 5 लाख 61 हजार 256 रुपये से अधिक की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निकासी के लिए म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल किया गया।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल और स्थानीय पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इन बैंक खातों का संचालन कौन कर रहा था और एटीएम से रकम निकालने वाले लोग साइबर ठगी के नेटवर्क से किस तरह जुड़े हुए हैं।
एक नहीं, छह इलाकों के ATM बने निशाना
साइबर सेल की जांच में पता चला है कि आरोपियों ने किसी एक एटीएम को निशाना बनाकर पूरी रकम नहीं निकाली। इसके बजाय अलग-अलग स्थानों पर लगे विभिन्न बैंकों के एटीएम से कई चरणों में पैसे निकाले गए। जांच में करनपुर, ईसी रोड, राजपुर रोड, दर्शन लाल चौक, सर्कुलर रोड और 5th क्रॉस रोड स्थित एटीएम से निकासी की जानकारी सामने आई है।
जांच के दौरान SBI, यूको बैंक, केनरा बैंक, साउथ इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से रकम निकाले जाने की बात सामने आई है। इन सभी स्थानों से हुई निकासी को जोड़ने पर कुल रकम 5,61,256.53 रुपये बताई जा रही है।
एक ही क्षेत्र में अलग-अलग बैंकों के एटीएम से रकम निकाले जाने के कारण पुलिस अब इस पूरे मामले को साइबर अपराध के एक संगठित नेटवर्क से जोड़कर भी जांच कर रही है। हालांकि आरोपियों की पहचान और वारदात में इस्तेमाल किए गए पूरे नेटवर्क की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
म्यूल अकाउंट क्या होता है?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल होना है। म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी या अन्य अवैध गतिविधियों से प्राप्त रकम को प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।
कई मामलों में साइबर ठग दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। कभी-कभी लोगों को नौकरी, कमीशन, आसान कमाई या अन्य लालच देकर उनके खाते में पैसे मंगवाए जाते हैं। इसके बाद उस रकम को एटीएम, ऑनलाइन ट्रांसफर या अन्य माध्यमों से निकाल लिया जाता है। खाता उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति कई बार यह दावा कर सकता है कि उसे रकम के वास्तविक स्रोत की जानकारी नहीं थी। ऐसे मामलों में बैंक खाते और लेनदेन की पूरी कड़ी की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
डालनवाला पुलिस के उपनिरीक्षक विक्की टम्टा के अनुसार, एटीएम से म्यूल अकाउंट के जरिए पैसों की निकासी की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित खाते किसके नाम पर हैं और उनके जरिए रकम किस नेटवर्क तक पहुंची।
CCTV फुटेज से खुलेगा राज
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने संबंधित एटीएम की जानकारी जुटाकर वहां लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। पुलिस को उम्मीद है कि एटीएम से रकम निकालने वाले संदिग्धों की तस्वीरें और गतिविधियां जांच को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अलग-अलग एटीएम से रकम निकालने के लिए क्या एक ही व्यक्ति या समूह सक्रिय था। इसके अलावा निकासी के समय, रकम की किस्तों और संबंधित बैंक खातों के लेनदेन का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि म्यूल अकाउंट तक ठगी की रकम कैसे पहुंची। यदि किसी साइबर ठगी से यह पैसा आया है तो पुलिस उस लेनदेन की शुरुआती कड़ी तक पहुंचने का प्रयास करेगी। इसके बाद खाते के मालिक, रकम निकालने वाले व्यक्ति और साइबर ठगी करने वाले मुख्य आरोपियों के बीच संबंधों की जांच की जाएगी।
एसटीएफ के ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट’ के बाद भी जारी साइबर अपराध
गौरतलब है कि इसी महीने उत्तराखंड एसटीएफ ने साइबर अपराधियों और उनके नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए सात दिवसीय ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट’ चलाया था। इस अभियान के दौरान साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों, सिम कार्ड, एटीएम, चेक और अन्य डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता कराने वाले लोगों पर भी कार्रवाई की गई थी।
अभियान के दौरान 15 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 247 संदिग्धों को कानूनी नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद देहरादून में सामने आया यह मामला बताता है कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर लगातार निगरानी बनाए रखना जरूरी है।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
साइबर सेल से रिपोर्ट मिलने के बाद करनपुर चौकी प्रभारी की तहरीर पर कोतवाली डालनवाला पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। डालनवाला कोतवाली प्रभारी विनोद गुसाईं ने बताया कि उपनिरीक्षक विक्की टम्टा की शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है।
पुलिस अब CCTV फुटेज, बैंकिंग लेनदेन और संबंधित खातों की जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच में यह भी सामने आ सकता है कि म्यूल अकाउंट किस व्यक्ति के नाम पर था और खाते से जुड़ी रकम को किन-किन माध्यमों से आगे बढ़ाया गया।
लोग भी रहें सतर्क, अपना बैंक अकाउंट किसी को न दें
यह मामला आम लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। किसी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, UPI PIN, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड, OTP या बैंकिंग से जुड़ी अन्य गोपनीय जानकारी उपलब्ध नहीं करानी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति आपके खाते का इस्तेमाल रकम प्राप्त करने या निकालने के बदले कमीशन देने की बात करता है, तो बेहद सावधान रहने की जरूरत है।
साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाला बैंक खाता बाद में जांच के दायरे में आ सकता है। इसलिए आसान कमाई या कमीशन के लालच में किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में संदिग्ध रकम मंगाना भारी पड़ सकता है।
देहरादून में छह अलग-अलग बैंकों के एटीएम से 5.61 लाख रुपये से अधिक की निकासी का यह मामला फिलहाल पुलिस जांच के अधीन है। CCTV फुटेज और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल किस तरह किया गया। पुलिस की जांच अब संदिग्धों की पहचान और रकम की पूरी कड़ी तक पहुंचने पर केंद्रित है।
