मायावती के भतीजे आकाश आनंद की राजनीति में फिर दमदार वापसी, यूपी विधानसभा चुनाव से पहले संभाला मोर्चा; कांग्रेस, बीजेपी और सपा पर हमलावर तेवरों से गरमाई सियासत
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राजनीति में इन दिनों एक नाम फिर तेजी से चर्चा में है और वह है आकाश आनंद। बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय समन्वयक भी बनाया गया है और अब वह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और पार्टी की जमीन तैयार करने में जुटे दिखाई दे रहे हैं। हाल के दिनों में उनके तीखे राजनीतिक बयानों ने यूपी की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।
आकाश आनंद ने कांग्रेस, बीजेपी और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए विपक्षी नेताओं पर जमकर हमला बोला। अपने बयानों में उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को ‘अंकल’ तक कह दिया। उनके इस अंदाज को बसपा समर्थकों के बीच आकाश की राजनीतिक वापसी और आक्रामक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
लेकिन सवाल है कि आखिर मायावती के भतीजे आकाश आनंद हैं कौन? उनकी राजनीति में एंट्री कैसे हुई, मायावती ने उन पर भरोसा क्यों जताया और उनकी निजी जिंदगी की कहानी क्या है?
मायावती के छोटे भाई के बेटे हैं आकाश आनंद
आकाश आनंद, मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। परिवार में मायावती की राजनीतिक विरासत का सबसे नजदीकी चेहरा होने के कारण आकाश लंबे समय से राजनीतिक चर्चाओं में रहे हैं।
आकाश की शिक्षा विदेश में हुई है। उन्होंने लंदन से MBA की पढ़ाई की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना और वर्ष 2017 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। मायावती ने अपने भतीजे की राजनीतिक क्षमता को पहचानते हुए उन्हें पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी।
धीरे-धीरे आकाश आनंद बसपा के युवा और आक्रामक चेहरे के तौर पर उभरने लगे। उन्होंने पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई और ‘बहुजन अधिकार यात्रा’ जैसे अभियानों के जरिए जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाया।
बसपा में बढ़ी आकाश की भूमिका
मायावती के बाद पार्टी के भीतर आकाश आनंद का नाम सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल हो गया है। उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी देकर पार्टी संगठन को विस्तार देने की भूमिका दी गई।
आकाश की राजनीति में सबसे खास बात उनका संवाद और भाषण का अंदाज माना जाता है। वह युवाओं के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की कोशिश करते रहे हैं। बसपा की पारंपरिक राजनीति जहां सामाजिक समीकरणों और बहुजन वोट बैंक पर केंद्रित रही है, वहीं आकाश के भाषणों में रोजगार, शिक्षा, युवाओं और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
यूपी की राजनीति में उनकी सक्रियता ऐसे समय में बढ़ रही है जब बसपा अपने पुराने जनाधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आकाश आनंद के सामने चुनौती केवल चुनावी सभाएं करने की नहीं, बल्कि पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की भी है।
लंदन में शुरू हुई प्रेम कहानी, क्लासमेट से हुआ प्यार
आकाश आनंद की निजी जिंदगी भी काफी दिलचस्प है। लंदन में MBA की पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात प्रज्ञा सिद्धार्थ से हुई। दोनों एक ही शैक्षणिक माहौल में पढ़ाई कर रहे थे। बताया जाता है कि पढ़ाई के दौरान दोनों के बीच दोस्ती हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया।
इसके बाद 26 मार्च 2023 को गुरुग्राम में आकाश आनंद और प्रज्ञा सिद्धार्थ शादी के बंधन में बंध गए। इस शादी ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं, क्योंकि प्रज्ञा का परिवार भी बसपा से गहराई से जुड़ा रहा है।
प्रज्ञा के पिता अशोक सिद्धार्थ पेशे से डॉक्टर हैं। उन्होंने वर्ष 2008 में अपने पेशेवर करियर की दिशा बदलते हुए बसपा की राजनीति में कदम रखा था।
ससुर का भी मायावती से रहा करीबी रिश्ता
अशोक सिद्धार्थ का बसपा में राजनीतिक सफर भी काफी प्रभावशाली रहा। पार्टी में शामिल होने के कुछ समय बाद ही उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2009 में मायावती ने उन्हें विधान परिषद का सदस्य (MLC) बनाया।
इसके बाद उनकी राजनीतिक भूमिका और मजबूत हुई। वर्ष 2016 से 2022 तक वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे। इस तरह आकाश आनंद का वैवाहिक रिश्ता भी ऐसे राजनीतिक परिवार से जुड़ गया, जिसकी बसपा संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
यही वजह है कि आकाश और प्रज्ञा की शादी को केवल पारिवारिक संबंध के तौर पर ही नहीं, बल्कि बसपा से जुड़े दो राजनीतिक परिवारों के रिश्ते के रूप में भी देखा गया।
अब यूपी की राजनीति में क्या भूमिका होगी?
आकाश आनंद के सामने सबसे बड़ी चुनौती बसपा को फिर से मजबूत करना है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी बेहद प्रभावशाली रही बसपा को पिछले कुछ चुनावों में लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में पार्टी की नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति में आकाश आनंद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उनके आक्रामक बयानों से यह संकेत जरूर मिल रहा है कि वह आगामी चुनावी राजनीति में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। अब देखना होगा कि उनका यह अंदाज बसपा के पारंपरिक मतदाताओं को फिर से जोड़ने में कितना कामयाब होता है और युवा मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ कितनी मजबूत होती है।
फिलहाल इतना साफ है कि आकाश आनंद अब केवल मायावती के भतीजे के रूप में नहीं, बल्कि बसपा के एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चेहरे के तौर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले चुनावों में उनकी सक्रियता यह तय करने में अहम हो सकती है कि बसपा उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने पुराने प्रभाव को किस हद तक वापस ला पाती है।
