नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में CJP (सिविल जस्टिस प्लेटफॉर्म) के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस लाठीचार्ज और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत के इस कदम को मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों को सुरक्षित रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया। साथ ही, यह भी दावा किया गया कि जंतर-मंतर पर मौजूद सोनम वांगचुक को जबरन वहां से हटाया गया। याचिका में इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए ताकि भविष्य में जांच या सुनवाई के दौरान किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो।
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि घटनास्थल के CCTV फुटेज, पुलिसकर्मियों के बॉडी-वॉर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग, वीडियो क्लिप, डिजिटल रिकॉर्ड तथा अन्य सभी उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। अदालत का मानना है कि ऐसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस द्वारा जवाब दाखिल किए जाने के बाद याचिकाकर्ता को भी अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए भी चार सप्ताह का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई में अदालत सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें प्रदर्शन के अधिकार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और पुलिस की कार्रवाई की वैधता जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। अब सभी की नजरें केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के जवाब पर टिकी हैं, जिसके बाद यह स्पष्ट होगा कि अदालत इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है। फिलहाल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित एजेंसियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना पक्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जबकि सभी महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू रहेंगे।
