नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार का दिन एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम का गवाह बना। नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर देश की सियासत अपने चरम पर पहुँच गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के समीप अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। मुख्य विपक्षी दल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे, संसद के दोनों सदनों में गहन चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़ा हुआ है।
रात के अंधेरे में सड़क पर गूंजते नारे, गाड़ियों की बत्तियां और चारों तरफ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था—यह दृश्य केवल एक विरोध प्रदर्शन का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों से जुड़े उस मुद्दे की भयावहता को दर्शाता है जिसने संसद से लेकर सड़क तक की नींव हिला दी है।
पीएमओ के मंत्री पहुंचे मनाने, नहीं बनी बात
प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से मध्यस्थता की पहल की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह खुद धरना स्थल पर पहुंचे। जितेंद्र सिंह ने काफी देर तक राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं से सीधी बातचीत की।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से कांग्रेस को यह प्रस्ताव दिया गया कि सरकार बुधवार को संसद में इस पूरे विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, राहुल गांधी ने इस सरकारी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। विपक्षी नेताओं का स्पष्ट कहना है कि अब केवल चर्चा से बात नहीं बनेगी; जब तक जिम्मेदार मंत्री का इस्तीफा नहीं होता और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, यह प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा।
कांग्रेस की 5 सूत्रीय मांगें: आर-पार के मूड में विपक्ष
कांग्रेस पार्टी ने इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष पांच प्रमुख शर्तें (मांगें) रखी हैं:
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शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
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संसद में निष्पक्ष चर्चा: संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में अन्य सभी विधायी कार्यों को रोककर पेपर लीक मामले पर नियम 267 के तहत विस्तृत चर्चा कराई जाए।
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गृह मंत्री का आधिकारिक बयान: राजधानी दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों सदनों में आधिकारिक जवाब दें।
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छात्रों की सीधी सुनवाई: देश के पीड़ित अभ्यर्थियों और छात्र प्रतिनिधियों की मांगों को सरकार आधिकारिक तौर पर सुने और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करे।
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लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच: दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिसिया बर्बरता की किसी निष्पक्ष संस्था से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
राज्यों के मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता भी सड़क पर उतरे
इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन में केवल दिल्ली के सांसद ही नहीं, बल्कि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पदाधिकारी भी भारी संख्या में शामिल हुए।
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और केरल में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन विशेष रूप से दिल्ली पहुंचे और राहुल गांधी के साथ सड़क पर बैठे।
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प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी सरकार की नीतियों के खिलाफ तीखा हमला बोला।
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी धरना स्थल पर पूरी मजबूती के साथ डटे रहे। बाद में दिल्ली पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का हवाला देते हुए खड़गे समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया और उन्हें गाड़ियों में ले जाया गया।
हिरासत में लिए जाने के दौरान बस की खिड़की से मीडिया से बात करते हुए सीनियर सांसद के. सुरेश ने कहा:
“देश के भविष्य, हमारे होनहार छात्रों पर सड़कों पर बहुत बेरहमी से हमला किया गया है। वे अपना हक मांग रहे हैं, लेकिन माननीय प्रधानमंत्री चुप हैं और गृह मंत्री अमित शाह एक शब्द बोलने को तैयार नहीं हैं। इसीलिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के प्रतिनिधि आज सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हुए हैं।”
राजनीतिक मायने और युवाओं का भविष्य
राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष ने इस बार सीधे देश के युवा वोट बैंक और शिक्षा प्रणाली में फैली कथित अनियमितताओं को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है। संसद सत्र के दौरान इस तरह का उग्र प्रदर्शन केंद्र सरकार पर बड़ा नैतिक दबाव बना रहा है।
शिक्षा माफियाओं और प्रशासनिक तंत्र की साठगांठ से परेशान लाखों अभ्यर्थियों के लिए यह मुद्दा अब केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि उनके भविष्य और स्वाभिमान का प्रश्न बन चुका है। विपक्षी दलों का यह आक्रामक रुख यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही का सुचारू रूप से चलना बेहद मुश्किल होगा।
फिलहाल, राजधानी दिल्ली का यह वीआईपी इलाका छावनी में तब्दील है। पुलिस बल और पैरामिलिट्री की कई कंपनियां तैनात की गई हैं। एक तरफ जहां सरकार संसद के पटल पर चर्चा कराकर मामले को शांत करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी के नेतृत्व में संयुक्त विपक्ष सीधी कार्रवाई और इस्तीफे से कम पर समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहा है। अब सभी की निगाहें बुधवार को होने वाली संसद की बैठक और सरकार के अगले संभावित कदम पर टिकी हैं।
