नई दिल्ली। देशभर के किसानों का गुस्सा एक बार फिर राजधानी दिल्ली की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार (ट्रेड) समझौते के विरोध में मंगलवार को आयोजित किसान महापंचायत ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल सहित कई राज्यों से किसान संगठनों के प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचने की तैयारी में हैं। किसानों का कहना है कि यदि प्रस्तावित व्यापार समझौते को लागू किया गया तो भारतीय कृषि, डेयरी उद्योग और छोटे किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट आ सकता है। इसी आशंका को लेकर हजारों किसान दिल्ली के किसान घाट पर महापंचायत के लिए एकजुट होने का आह्वान कर रहे हैं।
किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए हरियाणा और दिल्ली पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गई है। पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। सीमा पर भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ सीमेंट के बैरिकेड, लोहे के अवरोधक और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं ताकि बड़ी संख्या में किसानों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके। घग्गर नदी पर बने पुल सहित कई संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, जबकि किसान संगठन शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा कर रहे हैं।
महापंचायत से पहले भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी को हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर ने आंदोलन को और तेज कर दिया है। किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश बैंस को भी हिरासत में लेने का दावा किया गया है। इन घटनाओं के बाद कई स्थानों पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया।
अंबाला के निकट शंभू टोल प्लाजा पर किसानों के एक समूह ने कुछ समय के लिए जाम भी लगाया, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। हिसार-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग के थाना गांव स्थित टोल प्लाजा पर भी बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए। पुलिस और प्रशासन लगातार किसानों से बातचीत कर स्थिति को सामान्य बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
किसान संगठनों का सबसे बड़ा विरोध भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर है। उनका कहना है कि यदि इस समझौते के तहत अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पाद और डेयरी सामान भारत में बड़े पैमाने पर आयात किए गए तो इसका सीधा असर देश के छोटे और मध्यम किसानों पर पड़ेगा। किसानों का दावा है कि विदेशी उत्पादों की कम कीमतों के कारण भारतीय किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। इससे कृषि क्षेत्र में आर्थिक संकट गहरा सकता है और लाखों किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
किसान नेताओं का यह भी कहना है कि प्रस्तावित समझौते के कारण भारत के लिए कुछ व्यापारिक सुरक्षा उपायों का उपयोग करना कठिन हो सकता है, जिससे घरेलू उत्पादकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर होगी। उनका मानना है कि कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि करोड़ों परिवारों के जीवन का आधार है, इसलिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले किसानों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।
देशभर के कई किसान संगठनों ने इस मुद्दे पर एक साझा मंच बनाते हुए व्यापक जनआंदोलन का ऐलान किया है। किसान नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई केवल किसानों की नहीं बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि आधारित रोजगार की भी है। महापंचायत के माध्यम से सरकार तक अपनी चिंताओं को पहुंचाने और प्रस्तावित व्यापार समझौते पर पुनर्विचार की मांग की जाएगी।
उधर, दिल्ली पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर विशेष एडवाइजरी जारी की है। यात्रियों को सत्याग्रह मार्ग, वेलोड्रोम रोड, राजघाट डीटीसी डिपो रोड तथा आसपास के इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। पुलिस ने एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों से भी पर्याप्त समय पहले घर से निकलने की अपील की है, क्योंकि प्रदर्शन और सुरक्षा जांच के कारण कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है।
राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए भी निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति कानून के दायरे में है, लेकिन किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फिलहाल पूरे देश की नजर दिल्ली में होने वाली किसान महापंचायत पर टिकी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि किसानों की मांगों पर सरकार क्या रुख अपनाती है और प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर आगे क्या निर्णय सामने आते हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन केवल कृषि नीति ही नहीं बल्कि देश की आर्थिक और राजनीतिक दिशा पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
