देश की राजधानी नई दिल्ली में पिछले कई दिनों से जारी भारी उथल-पुथल के बीच आज एक बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं और प्रदर्शनकारियों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल (डेलीगेशन) ने आज केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। कई घंटों तक चली इस मैराथन बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बयान जारी कर बताया कि यह पूरी मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध को तोड़ने की दिशा में इसे पहली बड़ी आधिकारिक कोशिश माना जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में जहां सरकार की ओर से शांति बहाली की अपील की गई, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपना धरना प्रदर्शन समाप्त करने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सरकार को उनकी तीन प्रमुख और बेहद संवेदनशील शर्तें माननी होंगी।
जेपी नड्डा का बयान: ‘प्रस्ताव के बाद हुई विस्तार से चर्चा’
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस महत्वपूर्ण बैठक की तस्वीरें अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए पूरी वार्ता का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि सरकार हमेशा से संवाद के पक्ष में रही है और जैसे ही प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत की पहल हुई, सरकार ने तुरंत इसका सकारात्मक जवाब दिया।
जेपी नड्डा ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा:
“आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव आया और सुबह 11:50 बजे से ही हमारी बातचीत जारी है। सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुलाकात हुई। उनके डेलीगेशन के साथ विस्तार से पहले मौखिक चर्चा हुई और उनके द्वारा लगभग 4 बजे मुझे लिखित याचिका दी गई। मैंने सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि वे अपने धरना प्रदर्शन समाप्त करें और सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन की मदद करें।”
केंद्रीय मंत्री ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि लोकतंत्र में हर समस्या का समाधान बातचीत के जरिए संभव है, इसलिए सड़कों पर आंदोलन के बजाय संवाद का रास्ता चुना जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों का रुख: ‘भरोसा मिला है, लेकिन वादा नहीं’
दूसरी तरफ, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रमुख रणनीतिकार और प्रदर्शनकारी सौरव दास ने भी सोशल मीडिया के जरिए इस बैठक की पुष्टि की और आंदोलनकारियों का पक्ष मजबूती से सामने रखा। सौरव दास ने बताया कि वे और उनके साथी आशुतोष रांका दोपहर 12 बजे से ही केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर डटे हुए थे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को बेहद सख्त लहजे में सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया।
सौरव दास ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा:
“जरूरी घोषणा: आशुतोष रांका और मैं दोपहर 12 बजे से जेपी नड्डा के घर पर हैं। धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे/बर्खास्तगी सहित मांगों से अवगत करा दिया गया है। मंत्री ने हमें भरोसा दिलाया कि वह इस पर सही लेवल पर बात करेंगे। हालांकि, अभी तक कोई वादा नहीं किया गया है। शांति से प्रदर्शन करने वाले तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती!”
धरना प्रदर्शन समाप्त करने के लिए CJP की तीन बड़ी शर्तें
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और आंदोलनकारी छात्रों के डेलीगेशन ने सरकार के सामने जो लिखित याचिका सौंपी है, उसमें आंदोलन को पूरी तरह रोकने और धरना प्रदर्शन समाप्त करने के एवज में तीन प्रमुख शर्तें रखी गई हैं, जिन पर राजनीतिक गलियारों में भारी चर्चा हो रही है:
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शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें या फिर सरकार उन्हें उनके पद से बर्खास्त करे।
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सोनम वांगचुक को अनुमति: प्रख्यात पर्यावरणविद् और आंदोलनकारी सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आने की पूर्ण अनुमति दी जाए और सरकार पहल करके सम्मानपूर्वक उनका अनशन खत्म कराए।
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पीड़ित छात्रों को मुआवजा: हाल ही में नीट (NEET) परीक्षा से उपजे मानसिक तनाव के कारण जिन भी छात्रों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया है, उनके शोक संतप्त परिजनों को सरकार की ओर से एक-एक करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा और सहायता राशि दी जानी चाहिए।
सड़कों पर संग्राम: दिल्ली पुलिस की भारी मशक्कत और कार्रवाई
इस हाई-प्रोफाइल बैठक के समानांतर दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारी तनाव देखा गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों द्वारा किए जा रहे ‘संसद मार्च’ को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) भी करना पड़ा।
इस टकराव के बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य धरने वाली जगह को पूरी तरह से खाली करा दिया है। प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए तमाम टेंट उखाड़ दिए गए हैं। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी वहां से हटकर कनॉट प्लेस (CP) के आसपास के इलाकों में जुट गए हैं, जिसके कारण लुटियंस दिल्ली और मध्य दिल्ली में भारी भीड़ जमा हो गई है और सड़कों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया है।
घायलों के दावों पर दिल्ली पुलिस का खंडन और अफवाहों से बचने की अपील
आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर उस समय तनाव और बढ़ गया जब प्रदर्शनकारी सौरव दास ने एक एक्स पोस्ट के जरिए दावा किया कि पुलिसिया कार्रवाई में एक लड़की पर हमला हुआ है और लगभग 40 से 50 प्रदर्शनकारियों के सिर फूट गए हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा यह दावा पूरी तरह से झूठी अफवाह और मनगढ़ंत है।
दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक हैंडल से नागरिकों और प्रदर्शनकारियों से सहयोग की अपील करते हुए लिखा:
“दिल्ली पुलिस सभी प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और शांति व कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील करती है। सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करें। किसी भी गैर-कानूनी या हिंसक गतिविधि में शामिल न हों और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए कानूनी निर्देशों का पालन करें। जनता को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अफवाहों, गलत जानकारी या अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें और न ही उन्हें फैलाएं। नागरिकों से अनुरोध है कि वे जानकारी के विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करें और शांति, सद्भाव व कानून-व्यवस्था बनाए रखने में दिल्ली पुलिस का सहयोग करें।”
फिलहाल, गेंद पूरी तरह से केंद्र सरकार के पाले में है। जहां एक तरफ जेपी नड्डा के आवास पर हुई बातचीत ने शांति की एक धुंधली उम्मीद जगाई है, वहीं सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा और सीजेपी की तीन सख्त शर्तें यह बताती हैं कि जब तक सरकार इन मांगों पर कोई ठोस और लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक प्रदर्शनकारियों का धरना प्रदर्शन समाप्त होना आसान नहीं दिख रहा है। आने वाले कुछ घंटे दिल्ली की कानून-व्यवस्था और इस राजनीतिक गतिरोध के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।
