देहरादून, 15 जुलाई। मसूरी वन प्रभाग के अंतर्गत कोलूखेत क्षेत्र में कथित अवैध वन कटान, जंगल झाड़ियों की सफाई, वन भूमि पर अतिक्रमण तथा पर्यावरण को हो रहे नुकसान के संबंध में पूर्व भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता रविन्द्र जुगरान द्वारा प्रमुख सचिव (वन), उत्तराखंड आर.के. सुधांशु को भेजे गए पत्र का शासन ने गंभीरता से संज्ञान लिया है।
रविन्द्र जुगरान ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि मसूरी के कोलूखेत क्षेत्र में लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में वन संपदा को व्यापक क्षति पहुंचाई जा रही है। उन्होंने अवैध कटान, जंगल झाड़ियों की सफाई, वन भूमि पर अतिक्रमण, सड़कों के नाम पर पेड़ों की कटाई तथा पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी जैसे गंभीर मुद्दे उठाए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि यह क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और अतीत में भी अनियंत्रित खनन एवं वनों के दोहन के दुष्परिणाम सामने आ चुके हैं।
शिकायत प्राप्त होने के मात्र तीन दिन के भीतर 11 जुलाई 2026 को प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल), पौड़ी को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए। शासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि शिकायत का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा की गई कार्रवाई से शासन को अवगत कराया जाए। आदेश की प्रति प्रमुख वन संरक्षक (HoFF), उत्तराखंड को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है।
रविन्द्र जुगरान ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि हिमालयी पर्यावरण, वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करेगा, जिससे भविष्य में वन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सके।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने प्रमुख सचिव द्वारा त्वरित संज्ञान लिए जाने को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि यदि शिकायतों पर इसी प्रकार समयबद्ध कार्रवाई होती रही तो उत्तराखंड की वन संपदा और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता रविन्द्र जुगरान लंबे समय से उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से जुड़े हुए हैं। अवैध कटान, वन भूमि पर अतिक्रमण, अवैध खनन, बेरोजगारी तथा अन्य जनहित के मुद्दों पर वे वर्षों से लगातार मुखर रहे हैं। उनके द्वारा उठाए गए अनेक जनहित के विषयों पर शासन और प्रशासन ने समय-समय पर संज्ञान लेकर कार्रवाई भी की है। पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण वे राज्य में एक जागरूक एवं सक्रिय जनप्रतिनिधि स्वर के रूप में जाने जाते हैं।

