कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केंद्रीय चुनाव समिति ने राज्य में होने वाले आगामी उच्च सदन के संग्राम के लिए अपने पत्ते खोल दिए हैं। बीजेपी ने पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव 2026 के लिए अपने तीन उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भगवा दल ने उन तीन चेहरों पर दांव लगाया है, जो कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मजबूत स्तंभ माने जाते थे।
बीजेपी की ओर से जारी सूची के अनुसार, टीएमसी से बगावत करने वाले कद्दावर नेता सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक को राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया गया है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि बीजेपी का यह कदम न केवल ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका है, बल्कि इससे बंगाल में सत्ता के समीकरण भी पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं।
आज ही थामा था दामन, कुछ ही घंटों में मिला बड़ा इनाम
इस पूरे सियासी घटनाक्रम की क्रोनोलॉजी बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाली है। राज्यसभा टिकट पाने वाले ये तीनों ही नेता पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक घमासान के बाद पार्टी से इस्तीफा दे चुके थे। सुखेंदु शेखर रॉय ने जहां 8 जून को टीएमसी को अलविदा कहा था, वहीं सुष्मिता देव ने 10 जून और प्रकाश चिक बराइक ने 11 जून को अपना इस्तीफा ममता बनर्जी को सौंपा था। तीनों ही नेताओं ने खुलेआम टीएमसी सुप्रीमो और शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उनका आरोप था कि पार्टी अब लोकतांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि पूरी तरह से मनमाने ढंग से चलाई जा रही है, जहां वरिष्ठ नेताओं की आवाज को दबाया जा रहा है।
इस्तीफा देने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि ये नेता भगवा पाले में जा सकते हैं। आखिरकार आज इन तीनों नेताओं को पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और कई अन्य वरिष्ठ राष्ट्रीय व प्रांतीय नेताओं की गरिमामयी मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता दिलाई गई। कोलकाता के साल्ट लेक स्थित बीजेपी के भव्य दफ्तर में आयोजित एक विशेष मिलन समारोह में सामिक भट्टाचार्य ने तीनों नेताओं को बीजेपी का झंडा सौंपकर पार्टी में उनका स्वागत किया। इस मौके पर भट्टाचार्य ने कहा, “इन तीनों नेताओं का लंबा राजनीतिक अनुभव और जमीन पर इनकी पकड़ जगजाहिर है। इनके आने से न केवल बंगाल में भाजपा सांगठनिक रूप से मजबूत होगी, बल्कि राज्य से तानाशाही शासन के अंत की शुरुआत भी होगी।” इस जॉइनिंग के महज कुछ ही घंटों के भीतर दिल्ली दरबार से इन्हें राज्यसभा का टिकट मिलना यह साफ करता है कि स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी थी।
क्या है वोटिंग, काउंटिंग और नामांकन का पूरा शेड्यूल?
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव 2026 की प्रक्रिया बेहद तेजी से पूरी की जाएगी। इस बेहद महत्वपूर्ण उपचुनाव के लिए आधिकारिक अधिसूचना 7 जुलाई को जारी कर दी जाएगी। इसके बाद प्रत्याशी 14 जुलाई तक अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।
नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी (जांच) 15 जुलाई को की जाएगी। इसके बाद, सबसे महत्वपूर्ण दिन 24 जुलाई का होगा, जब इन तीनों सीटों के लिए सुबह से वोटिंग (मतदान) शुरू होगी। इसी दिन शाम को मतदान खत्म होने के तुरंत बाद वोटों की गिनती (काउंटिंग) की जाएगी और देर शाम तक आधिकारिक परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
विधानसभा का बदला ढांचा और जीत का पूरा ‘गणित’
पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव 2026 में इस बार का मुकाबला बेहद एकतरफा नजर आ रहा है। विधानसभा के मौजूदा संख्या बल और हालिया राजनीतिक टूट-फूट के समीकरणों पर नजर डालें, तो बीजेपी के तीनों ही उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। आइए समझते हैं कि आखिर विधानसभा के भीतर सीटों का गणित इस समय किस करवट बैठा है:
| राजनैतिक दल / गुट | विधायकों की संख्या | भूमिका / स्थिति |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 208 | पूर्ण बहुमत स्थिति (तीनों सीटों पर जीत तय) |
| ऋतब्रत बनर्जी गुट (TMC से अलग) | 60 | टीएमसी से अलग हुआ बागी धड़ा |
| मूल तृणमूल कांग्रेस (TMC – ममता गुट) | 20 | विपक्ष में सिमटी मुख्य पार्टी |
वर्तमान में पश्चिम बंगाल विधानसभा की कुल स्थिति को देखें तो बीजेपी के पास इस समय 208 विधायकों का प्रचंड बहुमत है। राज्यसभा के नियमों के मुताबिक, बीजेपी के उम्मीदवारों को पटखनी देने के लिए विपक्ष को कम से कम 70 वोटों की सख्त आवश्यकता होगी। हालांकि, विपक्षी खेमे की हालत इस समय बेहद पतली है।
पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 80 सीटें जीती थीं। लेकिन सत्ता के भीतर मचे घमासान के कारण टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। कुल 80 विधायकों में से 60 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बगावत कर दी और अपना एक बिल्कुल अलग गुट बना लिया। इस अभूतपूर्व टूट के बाद अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे में सिर्फ और सिर्फ 20 विधायक ही शेष बचे हैं। ऐसे में विपक्ष के पास बीजेपी को चुनौती देने के लिए न तो पर्याप्त संख्या बल है और न ही कोई मजबूत रणनीतिक आधार।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपचुनाव महज तीन सांसदों को दिल्ली भेजने का जरिया नहीं है, बल्कि यह राज्य की भावी राजनीति का एक बड़ा ट्रेलर है। टीएमसी के तीन प्रमुख चेहरों का टूटना और फिर तुरंत बाद बीजेपी द्वारा उन्हें संसद भेजने का फैसला यह संदेश देता है कि भाजपा अब पुराने तृणमूल कैडरों और नेताओं को अपने पाले में लाकर ममता के किले को पूरी तरह से ढहाना चाहती है।
असहनीय आंतरिक कलह से जूझ रही टीएमसी के लिए अपने बचे हुए 20 विधायकों को बचाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव 2026 के परिणाम भले ही 24 जुलाई को आएंगे, लेकिन इसके सियासी नतीजों ने अभी से ही कोलकाता से लेकर दिल्ली तक की राजनीति की सरगर्मियां बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में ममता बनर्जी इस बड़े नुकसान की भरपाई कैसे करती हैं और बीजेपी इस नए समीकरण के सहारे बंगाल की जनता के बीच क्या नैरेटिव सेट करती है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।
