हरिद्वार। उत्तराखंड के तीर्थनगरी हरिद्वार से एक बेहद चौंकाने वाली और राहत देने वाली खबर सामने आई है। बुधवार दोपहर भेल (BHEL) क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब नर्सिंग की छात्राओं को लेकर जा रही एक निजी कॉलेज की बस के सीएनजी (CNG) सिलेंडर से अचानक भीषण गैस रिसाव शुरू हो गया। देखते ही देखते गैस की गंध और दबाव के कारण मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
गनीमत रही कि बस चालक ने समय रहते खतरे को भांप लिया और सूझबूझ दिखाते हुए गाड़ी को बीच सड़क पर ही रोक दिया। त्वरित कार्रवाई करते हुए बस में सवार सभी 22 छात्राओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा और दर्दनाक हादसा होने से बच गया। इस हरिद्वार भेल गैस रिसाव हादसा के बाद स्थानीय प्रशासन और परिवहन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दोपहर का सफर और अचानक फैला खौफ
मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार दोपहर को एक निजी संस्थान की बस कॉलेज से नर्सिंग की छात्राओं को लेकर उनके गंतव्य (घरों) की ओर रवाना हुई थी। बस अभी भेल क्षेत्र के एचआरडीसी (HRDC) कार्यालय के समीप पहुंची ही थी कि अचानक हवा में सीएनजी की तेज गंध फैलने लगी।
सिलेंडर से हो रहे भारी रिसाव का आभास होते ही चालक के होश उड़ गए। उसने बिना एक पल गंवाए बस के ब्रेक लगाए और चिल्लाकर छात्राओं को तुरंत नीचे उतरने को कहा। बीच सड़क पर बस रुकने और गैस रिसाव की बात सुनते ही छात्राओं में दहशत फैल गई। सभी छात्राएं आनन-फानन में खिड़कियों और दरवाजों के रास्ते सुरक्षित बाहर की ओर भागीं।
एक घंटे तक हवा में घुलता रहा खतरा, पुलिस और फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा
घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग एक घंटे तक सिलेंडर से लगातार गैस का रिसाव होता रहा, जिससे पूरा इलाका सफेद धुएं और दहशत की चपेट में आ गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और दमकल विभाग को दी।
राहत और बचाव कार्य की मुख्य बातें:
-
त्वरित घेराबंदी: सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पूरे इलाके को कॉर्डन ऑफ (घेराबंदी) कर दिया।
-
रूट डायवर्जन: भेल क्षेत्र की ओर आने-जाने वाले यातायात को अस्थायी रूप से रोक दिया गया और वाहनों को दूसरे रास्तों पर डायवर्ट किया गया।
-
कूलिंग ऑपरेशन: फायर ब्रिगेड की टीम ने भारी दबाव के बीच बस पर पानी की लगातार बौछारें शुरू कीं। यह कदम सीएनजी सिलेंडर को फटने से रोकने और इंजन को ठंडा रखने के लिए उठाया गया था।
बचाव दल की मुस्तैदी के कारण गैस के दबाव को धीरे-धीरे नियंत्रित किया गया, जिसके बाद आसपास के लोगों और प्रशासन ने राहत की सांस ली। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी क्राइम निशा यादव और सीओ सदर एसपी बलूनी भी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
आधिकारिक बयान: स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में
इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक जानकारी देते हुए एसपी क्राइम निशा यादव ने कहा:
“बस के सीएनजी सिलेंडर से गैस रिसाव होने की सूचना प्राप्त होते ही स्थानीय थाने की पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम को तुरंत एक्शन में लाया गया। हमारी प्राथमिकता सबसे पहले जान-माल की सुरक्षा थी। सभी छात्राओं को सुरक्षित बस से उतार लिया गया था। सुरक्षा कारणों से क्षेत्र की घेराबंदी कर यातायात को डायवर्ट किया गया था। अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।”
फिटनेस और मेंटेनेंस पर उठे गंभीर सवाल: क्या हम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
इस हरिद्वार भेल गैस रिसाव हादसा ने भले ही कोई जानी नुकसान न पहुंचाया हो, लेकिन इसने निजी शिक्षण संस्थानों की बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की कलई खोलकर रख दी है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है।
1. क्या नियमित रूप से होती है फिटनेस जांच? नियमों के मुताबिक, व्यावसायिक और स्कूली वाहनों के सीएनजी किट और सिलेंडरों की हाइड्रो-टेस्टिंग और नियमित लीकेज जांच अनिवार्य है। लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि धरातल पर इन नियमों की अनदेखी की जा रही है।
2. छात्राओं की जान के साथ खिलवाड़ क्यों? सोचिए, अगर यह रिसाव किसी बेहद व्यस्त चौराहे या ट्रैफिक जाम के बीच हुआ होता, या फिर इंजन की गर्मी से गैस आग पकड़ लेती, तो परिणाम कितना भयावह हो सकता था? मासूम नर्सिंग छात्राओं की जिंदगी दांव पर लगाने वाले इस प्रबंधन पर आखिर कार्रवाई कब होगी?
मुस्तैदी से टली त्रासदी, पर सतर्कता जरूरी
हरिद्वार का यह वाकया हमें यह सीख देता है कि तकनीकी लापरवाही कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। बस चालक की तत्परता और फायर ब्रिगेड के जांबाज कर्मियों की सूझबूझ की सराहना की जानी चाहिए, जिन्होंने समय रहते मोर्चा संभाला। लेकिन, प्रशासन को अब केवल ‘सब ठीक है’ कहकर शांत नहीं बैठना चाहिए। जरूरत है कि हरिद्वार और पूरे उत्तराखंड में चल रही स्कूली और कॉलेज बसों की सीएनजी किट्स की सघन चेकिंग अभियान चलाई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मासूम को अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।
