महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना के दोनों गुटों के बीच जारी सियासी संघर्ष चर्चा का विषय बन गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कोल्हापुर दौरे के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का परिचय कराते हुए कहा कि अब उनके नाम के आगे ‘शिंदे गुट’ लगाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब केवल एक ही शिवसेना बची है और कोई दूसरा गुट शेष नहीं रहा है। अमित शाह का यह बयान सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना (यूबीटी) गुट पर तंज के रूप में देखा जा रहा है।
कोल्हापुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने मुस्कुराते हुए कहा कि पहले एकनाथ शिंदे को ‘शिंदे गुट’ का नेता कहा जाता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब केवल शिवसेना है और किसी अन्य गुट का कोई अस्तित्व नहीं है। उनके इस बयान ने यह संकेत दिया कि भाजपा और शिंदे गुट खुद को शिवसेना की वास्तविक राजनीतिक विरासत का प्रतिनिधि मानते हैं।
गृह मंत्री अमित शाह शनिवार सुबह अपने परिवार के साथ कोल्हापुर पहुंचे थे। यहां उन्होंने प्रसिद्ध महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर में पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर के विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मौजूद रहे। इस अवसर पर तीर्थक्षेत्र विकास योजना के तहत परिक्रमा मार्ग और राम मंदिर के संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों की शुरुआत की गई।
सरकार द्वारा इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए लगभग 1,442 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य कोल्हापुर को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। कार्यक्रम में अमित शाह का सम्मान भी किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस योजना को कोल्हापुर के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।
अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब शिवसेना (यूबीटी) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच राजनीतिक खींचतान फिर तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसद किसी भी समय शिंदे खेमे में शामिल हो सकते हैं। इन अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में अपने सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक भी बुलाई थी, लेकिन जिन सांसदों के दल बदलने की चर्चा है, वे बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है।
सूत्रों के अनुसार, इन छह सांसदों की नाराजगी लंबे समय से चल रही है और वे संगठन की कार्यशैली तथा नेतृत्व से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके व्यवहार और गतिविधियों को देखकर राजनीतिक विश्लेषक संभावित बड़े बदलाव की संभावना जता रहे हैं।
इस बीच शुक्रवार को शिवसेना की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दोनों गुटों ने अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए। कई स्थानों पर दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच तनातनी और नारेबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। इससे साफ संकेत मिला कि शिवसेना की विरासत और संगठन पर दावा करने की लड़ाई अभी भी खत्म नहीं हुई है।
उद्धव ठाकरे गुट के प्रमुख नेता संजय राउत लगातार एकनाथ शिंदे और उनके समर्थकों पर हमला बोल रहे हैं। उन्होंने कथित रूप से पार्टी छोड़ने की तैयारी कर रहे नेताओं और सांसदों को ‘गद्दार’ करार दिया है। वहीं शिंदे गुट भी राउत के बयानों का तीखा जवाब दे रहा है। दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी का दौर लगातार जारी है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति और अधिक गर्माती जा रही है।
अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस और उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे कांग्रेस की गोद में जाकर बैठ गए हैं। शाह ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर भाजपा सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में अवैध रूप से रहने वाले घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और उन्हें देश से बाहर भेजा जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए अमित शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में कई ऐसे कार्य हुए हैं जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम, केदारनाथ पुनर्विकास, सोमनाथ और कामाख्या मंदिरों के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब कोल्हापुर में भी अंबाबाई मंदिर कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को नई पहचान मिली है। शाह ने दावा किया कि भारत के इतिहास में नरेंद्र मोदी सबसे लंबे समय तक जनसमर्थन पाने वाले प्रधानमंत्रियों में दर्ज होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में विकास की नई परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं और जनता का विश्वास भाजपा के साथ लगातार मजबूत हो रहा है।
अमित शाह के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक तरफ भाजपा और शिंदे गुट इसे शिवसेना की वास्तविक पहचान की पुष्टि बता रहे हैं, वहीं उद्धव ठाकरे समर्थक इसे राजनीतिक हमला करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि उद्धव गुट के सांसदों के दल बदलने की अटकलें सच साबित होती हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल सकता है। फिलहाल अमित शाह का यह बयान शिवसेना की अंदरूनी लड़ाई को लेकर नए राजनीतिक संकेत दे गया है।
