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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > मानसून से पहले एक्शन में देहरादून प्रशासन: डीएम का सख्त आदेश- ‘जलभराव वाले 61 हॉटस्पॉट पर तुरंत शुरू हो काम, लापरवाही पर होगी कार्रवाई’
उत्तराखंडफीचर्ड

मानसून से पहले एक्शन में देहरादून प्रशासन: डीएम का सख्त आदेश- ‘जलभराव वाले 61 हॉटस्पॉट पर तुरंत शुरू हो काम, लापरवाही पर होगी कार्रवाई’

The Hill India News
Last updated: June 9, 2026 2:21 pm
The Hill India News
Published: June 9, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले राजधानी देहरादून को जलभराव और बाढ़ जैसी गंभीर नागरिक समस्याओं से बचाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। हर साल बारिश के मौसम में सड़कों के समंदर में तब्दील होने वाले डरावने अनुभवों को इस बार दोहराने से रोकने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मोर्चा संभाल लिया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और हाई-लेवल समीक्षा बैठक में डीएम ने जलभराव की समस्या के त्वरित और स्थायी समाधान के लिए सभी संबंधित विभागों को कड़े तेवर में समयबद्ध कार्ययोजना (Action Plan) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

Contents
चिन्हित हुए 61 ‘डेंजर जोन’: रिस्पना, आईटी पार्क और आईएसबीटी सबसे संवेदनशीलआईटी पार्क के लिए बजट पास, लोनिवि को ‘नो-डिले’ अल्टीमेटमनदी-नालों की सफाई के लिए ‘टाइम-बाउंड’ डेडलाइनआपदा प्रबंधन और जनधन की सुरक्षा ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’

जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मानसून के दौरान आम जनता को किसी भी तरह की प्रशासनिक या तकनीकी खामी की वजह से असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को ‘साइलो’ (अलग-अलग) में काम करने के बजाय आपसी समन्वय (Coordination) स्थापित कर शॉर्ट-टर्म रिलीफ और लॉन्ग-टर्म परमानेंट सोल्यूशन पर एक साथ काम करने को कहा है।

चिन्हित हुए 61 ‘डेंजर जोन’: रिस्पना, आईटी पार्क और आईएसबीटी सबसे संवेदनशील

इस बार की बैठक की सबसे बड़ी बात यह रही कि प्रशासन ने केवल हवा-हवाई बातें करने के बजाय जमीनी स्तर पर डेटा मैपिंग की है। बैठक के दौरान आधिकारिक आंकड़ों के जरिए अवगत कराया गया कि जनपद के चार प्रमुख नगरीय और अर्ध-नगरीय क्षेत्रों—देहरादून, ऋषिकेश, मसूरी और विकासनगर में कुल 61 ऐसे हॉटस्पॉट (स्थान) चिन्हित किए गए हैं, जहां मानसून के दौरान भारी जलभराव होता है और ट्रैफिक से लेकर पैदल चलने वालों की जिंदगी थम जाती है।

इन चिन्हित क्षेत्रों में:

  • आईटी पार्क क्षेत्र (IT Park Area): जहां हर साल तकनीकी और जल निकासी की खामी से पानी भरता है।

  • आईएसबीटी (ISBT Dehradun): यात्रियों की भारी आवाजाही वाला मुख्य बस अड्डा।

  • रिस्पना पुल और रिस्पना नदी के तटीय क्षेत्र: जहां जलस्तर बढ़ने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

डीएम ने इन सभी 61 संवेदनशील स्थानों की सूची के आधार पर प्रत्येक सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM), नगर निगम के अधिकारियों और स्थानीय निकायों को मौके पर जाकर निरीक्षण करने और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने को कहा है।

आईटी पार्क के लिए बजट पास, लोनिवि को ‘नो-डिले’ अल्टीमेटम

देहरादून का आईटी पार्क, जो राज्य के तकनीकी और कॉरपोरेट हब के रूप में जाना जाता है, पिछले कुछ समय से हल्की बारिश में भी टापू बन जाता है। इस बैठक में आईटी पार्क की इस पुरानी समस्या पर विशेष और गंभीर चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों की सुस्ती पर नाखुशी जताते हुए निर्देश दिए कि जलभराव निस्तारण के लिए जो भी कार्य पूर्व में स्वीकृत किए गए हैं, उन्हें बिना किसी देरी के तत्काल धरातल पर शुरू किया जाए।

बजट की स्थिति साफ: जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया, “आईटी पार्क क्षेत्र में ड्रेनेज और निर्माण कार्यों के भुगतान के लिए जिला योजना (District Plan) से वित्तीय स्वीकृति पहले ही प्रदान की जा चुकी है। अब बजट का कोई बहाना नहीं चलेगा। लोनिवि के अधिकारी तुरंत काम शुरू कराएं।” इसके साथ ही उन्होंने रिस्पना पुल के पास की समस्या के लिए नगर निगम और लोनिवि के अधिकारियों को संयुक्त रूप से मौका मुआयना कर 48 घंटे के भीतर साझा रिपोर्ट सौंपने का भी आदेश दिया।

नदी-नालों की सफाई के लिए ‘टाइम-बाउंड’ डेडलाइन

जलभराव की एक मुख्य वजह शहर के प्राकृतिक नालों और ड्रेनेज सिस्टम का चोक होना है। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए डीएम ने नगर निगम देहरादून, ऋषिकेश और अन्य सभी नगर निकायों व नगर पंचायतों को मानसून से पूर्व एक व्यापक और सघन सफाई अभियान (Mega Cleaning Drive) चलाने का जिम्मा सौंपा है।

उन्होंने निर्देश दिए कि:

  1. अवरोधों को हटाना: सभी बरसाती नालों, नदियों के किनारों और मुख्य जल निकासी मार्गों में यदि कोई अवैध निर्माण या कचरे का अवरोध है, तो उसे तुरंत हटाया जाए।

  2. सुचारू प्रवाह: वर्षा जल (Rain Water) का प्रवाह प्राकृतिक रूप से हो सके, इसके लिए नालों की तली तक सफाई सुनिश्चित की जाए।

  3. सर्टिफिकेट और रिपोर्ट: काम पूरा होने के बाद सभी निकायों को काम की प्रामाणिक रिपोर्ट और फोटोग्राफ जिला प्रशासन को सौंपने होंगे।

आपदा प्रबंधन और जनधन की सुरक्षा ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’

हिमालयी राज्यों में मानसून केवल जलभराव नहीं, बल्कि अपने साथ कई तरह की प्राकृतिक आपदाएं भी लेकर आता है। इस मानवीय पहलू और संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन पूर्ण संवेदनशीलता और पूरी गंभीरता के साथ ‘जीरो कैजुअल्टी’ (शून्य जनहानि) के सिद्धांत पर काम कर रहा है।

सभी विभागों को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि वे मानसून की पूरी अवधि के दौरान चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रहेंगे। इसके लिए हर विभाग को एक ‘क्विक रिस्पांस सिस्टम’ (त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र) विकसित करना होगा, ताकि कहीं भी जलभराव या दीवार गिरने जैसी घटना हो, तो राहत दल तुरंत मौके पर पहुंच सके। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए जेसीबी मशीनों, पंपों, आवश्यक संसाधनों और पर्याप्त मानवबल (मैनपावर) की एडवांस में उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से देखें तो देहरादून जैसे तेजी से बढ़ते और अनियोजित शहरीकरण (Unplanned Urbanization) से जूझ रहे शहर के लिए मानसून किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता। डीएम डॉ. आशीष चौहान का यह प्री-मानसून एक्शन प्लान कागजी तौर पर बेहद मजबूत और व्यावहारिक नजर आता है, खासकर तब जब बजट की बाधाओं को जिला योजना से दूर कर दिया गया है। हालांकि, इस Dehradun Waterlogging Pre Monsoon Action Plan की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पीडब्ल्यूडी और नगर निगम जैसे जमीनी विभाग नौकरशाही के सुस्त ढर्रे से बाहर निकलकर मानसून की पहली बारिश से पहले इन 61 हॉटस्पॉट को कितना सुरक्षित बना पाते हैं। जिला प्रशासन की इस कड़ी निगरानी से देहरादून की जनता को इस बार जलभराव से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

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