हरिद्वार: उत्तराखंड की पावन नगरी हरिद्वार से एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ कनखल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध प्रेमनगर आश्रम के समीप गंगा नदी में नहाते समय एक 19 वर्षीय युवक तेज बहाव की चपेट में आ गया और देखते ही देखते गहरे पानी में समा गया। इस अचानक हुए हरिद्वार गंगा नदी हादसा के बाद घाट पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों द्वारा शोर मचाने पर आनन-फानन में पुलिस और रेस्क्यू टीमों को सूचित किया गया।
लापता युवक की पहचान 19 वर्षीय सेन मलिक पुत्र महबूब के रूप में हुई है, जो हरिद्वार के ही ग्राम जियापोता का निवासी बताया जा रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही युवक के परिजनों में कोहराम मच गया और वे रोते-बिलखते घटनास्थल पर पहुंच गए। देर रात तक जल पुलिस, स्थानीय गोताखोरों और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की टीमों ने संयुक्त रूप से नदी में सघन तलाशी अभियान चलाया, लेकिन लापता युवक का सुराग नहीं लग सका।
गंगा का रौद्र रूप: तेज बहाव की चपेट में आने से पल भर में ओझल हुआ युवक
प्रत्यक्षदर्शियों और आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह दर्दनाक हरिद्वार गंगा नदी हादसा 19 मई की दोपहर बाद घटित हुआ। भीषण गर्मी से राहत पाने और पवित्र गंगा में डुबकी लगाने के उद्देश्य से सेन मलिक प्रेमनगर घाट के पास पहुंचा था। घाट के किनारे पानी में उतरकर नहाने के दौरान, युवक को नदी की गहराई और पानी के अत्यधिक वेग का अंदाजा नहीं मिल सका।
जैसे ही उसने थोड़ा आगे कदम बढ़ाया, वह गंगा के शक्तिशाली और तेज बहाव की चपेट में आ गया। पानी का करंट इतना तेज था कि युवक खुद को संभाल नहीं पाया और नदी की मुख्य धारा में बहते हुए गहराई में लापता हो गया। घाट पर मौजूद अन्य श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों ने जब युवक को डूबते देखा, तो तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी।
सूचना मिलते ही एक्शन में प्रशासन: जल पुलिस और SDRF ने संभाला मोर्चा
हादसे की भयावहता को देखते हुए कनखल थाना पुलिस और स्थानीय जल पुलिस के जवान अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। शुरुआती स्तर पर स्थानीय गोताखोरों की मदद से पानी में खोजबीन शुरू की गई। हालांकि, नदी की गहराई और मटमैले पानी के कारण सफलता नहीं मिली, जिसके बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपदा कंट्रोल रूम को वायरलेस संदेश भेजा गया।
आपदा प्रबंधन केंद्र से हरी झंडी मिलते ही उत्तराखंड की कुशल रेस्क्यू विंग ‘SDRF’ (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) की एक विशेष टीम आवश्यक रेस्क्यू बोट और गोताखोरी के साजो-सामान के साथ घटनास्थल पर उतरी। टीम ने बिना वक्त गंवाए नदी के विशाल पाट में आधुनिक तकनीकों और मोटर बोट की मदद से व्यापक सर्चिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया।
डीप डाइविंग और तकनीकी माध्यमों से तलाश, मगर चुनौतियां अपार
घटनास्थल पर मौजूद राष्ट्रीय मीडिया के प्रतिनिधियों के अनुसार, SDRF की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन को वैज्ञानिक और रणनीतिक तरीके से अंजाम दिया। नदी के जिन हिस्सों में पानी का ठहराव या गहरे भंवर (Whirlpool) बनने की संभावना होती है, वहां गोताखोरों द्वारा ‘डीप डाइविंग’ (Deep Diving) की गई। ऑक्सीजन सिलेंडरों से लैस गोताखोरों ने नदी के तलहटी तक जाकर युवक को ढूंढने का प्रयास किया।
इसके अतिरिक्त, जल धाराओं के रुख को समझने के लिए विभिन्न तकनीकी माध्यमों और स्थानीय इनपुट्स का भी सहारा लिया गया। लेकिन पहाड़ों से पिघलकर आ रहे पानी के कारण गंगा का जलस्तर और बहाव दोनों ही इस समय बेहद तीव्र हैं, जिसने रेस्क्यू टीम के सामने भारी चुनौती खड़ी कर दी है। पानी के नीचे दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण भी खोजकर्ताओं को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, घाट पर उमड़ी भारी भीड़
जैसे-जैसे यह खबर जियापोता गांव और आसपास के इलाकों में फैली, वैसे-वैसे प्रेमनगर घाट पर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का हुजूम जुटना शुरू हो गया। लापता सेन मलिक के माता-पिता और भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। मां का क्रंदन और पिता की बेबसी देखकर वहां मौजूद हर आंख नम हो गई।
घाट पर मौजूद सैकड़ों लोग भगवान से युवक की सकुशल बरामदगी के लिए सामूहिक रूप से प्रार्थना करते नजर आए। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी लगातार पीड़ित परिवार को ढांढस बंधा रहे थे और रेस्क्यू ऑपरेशन की पल-पल की प्रगति से उन्हें अवगत करा रहे थे।
अंधेरा होने के कारण रोकना पड़ा अभियान, सुबह फिर शुरू होगी जंग
देर शाम तक डूबने वाले स्थान से लेकर कई किलोमीटर आगे तक नदी के चप्पे-चप्पे को खंगाला गया। लेकिन, सूरज ढलने और रात का अंधेरा घिरने की वजह से पानी के भीतर सर्च ऑपरेशन चलाना असंभव हो गया। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए देर रात रेस्क्यू ऑपरेशन को अस्थाई रूप से रोकना पड़ा।
“हमें जैसे ही घटना की आधिकारिक सूचना मिली, हमारी टीम सभी आवश्यक लाइफ-सेविंग गियर्स और उपकरणों के साथ तत्काल प्रेमनगर घाट पहुंची। युवक की तलाश में हर उस संभावित स्थान पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है जहाँ पानी के बहाव के कारण शरीर के अटकने की गुंजाइश होती है। गोताखोरों की मदद से नदी के निचले और तटीय क्षेत्रों में लगातार छानबीन की जा रही है। अंधेरे के कारण अभियान रोका गया है, जिसे कल सुबह की पहली किरण के साथ ही पूरी ताकत से दोबारा शुरू किया जाएगा ताकि युवक का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके।” — आशीष त्यागी, उपनिरीक्षक (SI), SDRF उत्तराखंड
इस तरह का हरिद्वार गंगा नदी हादसा कोई पहली घटना नहीं है। गर्मी के मौसम में अक्सर देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु और स्थानीय युवा सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर बैठते हैं। हरिद्वार प्रशासन द्वारा लगातार विभिन्न माध्यमों से यह चेतावनी जारी की जाती है कि गंगा के जिन घाटों पर सुरक्षा जंजीरें (Safety Chains) नहीं लगी हैं, या जहाँ पानी का बहाव अत्यधिक तेज है, वहाँ स्नान करने से बचें।
राष्ट्रीय मीडिया हाउस होने के नाते हम अपने सभी पाठकों से अपील करते हैं कि नदियों में स्नान करते समय अत्यधिक सावधानी बरतें और केवल उन्हीं घाटों का चयन करें जो प्रशासन द्वारा पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए गए हैं। सेन मलिक की तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें कटिबद्ध हैं, और उम्मीद है कि जल्द ही इस अभियान का कोई ठोस परिणाम सामने आएगा।



