
रुद्रपुर (उधम सिंह नगर): उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में भूमि विवाद और भू-माफियाओं के बढ़ते हौसले कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। ताजा मामला जनपद उधम सिंह नगर के किच्छा क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ एक बेसहारा विधवा महिला की बेशकीमती जमीन और वहां बने भवन पर स्थानीय दबंगों द्वारा जबरन कब्जा करने का सनसनीखेज प्रयास किया गया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। पीड़िता की तहरीर पर त्वरित संज्ञान लेते हुए स्थानीय पुलिस ने कई नामजद और रसूखदार आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की कमान संभाल ली है।
यह पूरा रुद्रपुर जमीन कब्जा मामला किच्छा कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक रिहायशी और व्यावसायिक महत्व वाले इलाके का है। पीड़िता ने पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए अपनी और अपने परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता महिला की स्वामित्व वाली जमीन पर उसके व्यावसायिक प्रतिष्ठान के कर्मचारियों के रहने के लिए बकायदा आवासीय भवन बने हुए हैं। घटना वाले दिन संयोगवश सभी कर्मचारी अपने-अपने परिवारों के साथ किसी सामाजिक कार्य के सिलसिले में गांव गए हुए थे। परिसर को पूरी तरह खाली और सूना देखकर आरोपियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत इस वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई।
तहरीर के मुताबिक, आरोपी पूरी तैयारी के साथ अवैध हथियारों से लैस होकर मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने मुख्य द्वार का ताला तोड़कर भवन के भीतर जबरन प्रवेश करने और पूरी संपत्ति पर अवैध रूप से काबिज होने की कोशिश की। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि आरोपियों का मकसद खाली पड़ी इस प्राइम लोकेशन की जमीन को रातों-रात अपने नियंत्रण में लेना था, ताकि बाद में इस पर कानूनी पेंच फंसाया जा सके।
घटना की भनक लगते ही जब पीड़िता के परिवार के कुछ सदस्य और शुभचिंतक मौके पर पहुंचे और उन्होंने इस अवैध कृत्य का कड़ा विरोध किया, तो दबंगों ने पीछे हटने के बजाय उन्हें सीधे तौर पर धमकाना शुरू कर दिया। आरोप है कि हथियारों के बल पर पूरे परिवार को आतंकित किया गया और मामले को दबाने के लिए जान से मारने की सीधी धमकी दी गई।
पीड़िता ने किच्छा कोतवाली में दी गई अपनी लिखित शिकायत में क्षेत्र के कई रसूखदार और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को नामजद किया है। महिला द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित लोग शामिल हैं:
जोगेंद्र सिंह (निवासी: आजाद नगर) और उनका बेटा।
अमनदीप सिंह विर्क (पुत्र: राजपाल सिंह, निवासी: बिगवाड़ा)।
अजिता सिंह संधु उर्फ लाड्डी (पुत्र: अमर सिंह, निवासी: ग्राम उत्तम नगर)।
इंद्रपाल सिंह (पुत्र: राजपाल सिंह, निवासी: बिगवाड़ा)।
महिला का यह भी आरोप है कि इन नामजद आरोपियों के साथ कई अन्य अज्ञात और बाहरी गुर्गे भी शामिल थे, जो लाठी-डंडों और अवैध हथियारों से लैस थे।
पुलिस को सौंपी गई तहरीर में विधवा महिला ने एक बेहद गंभीर पहलू की ओर इशारा किया है। उन्होंने बताया कि इस रुद्रपुर जमीन कब्जा मामला के मुख्य आरोपी बेहद आक्रामक और आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। इनमें से कुछ आरोपियों के खिलाफ पहले भी विभिन्न थानों में संगीन आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज हैं। ऐसे में आरोपियों की समाज में धमक और उनके आपराधिक इतिहास को देखते हुए पीड़िता का पूरा परिवार इस समय अत्यधिक मानसिक तनाव और गहरे खौफ के साए में जीने को मजबूर है।
महिला ने पुलिस के उच्चाधिकारियों से अपील की है कि वह एक विधवा और असहाय महिला हैं, इसलिए उन्हें भू-माफियाओं के इस आतंक से मुक्ति दिलाई जाए और उनकी भूमि व भवन का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
मामले की संवेदनशीलता और एक विधवा महिला से जुड़े होने के कारण किच्छा पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आ गई है। पुलिस ने महिला की तहरीर को गंभीरता से लेते हुए सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और कानून सम्मत कार्रवाई को आगे बढ़ा दिया है।
“पीड़िता की शिकायत के आधार पर मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और मामले की विवेचना जारी है। पुलिस पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से जांच कर रही है। घटनास्थल के आस-पास के सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों की भूमिका की गहनता से पड़ताल की जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
— रवि सैनी, प्रभारी निरीक्षक, किच्छा कोतवाली
उत्तराखंड (देवभूमि) अपनी शांतिप्रिय छवि के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से उधम सिंह नगर और आसपास के मैदानी जिलों से जमीन की धोखाधड़ी और जबरन कब्जे के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी गई है। इस तरह के रुद्रपुर जमीन कब्जा मामला न केवल स्थानीय पुलिसिंग पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि अपराधियों के मन से कानून के डर के खत्म होने का भी संकेत देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक कमजोर और बेसहारा वर्गों की संपत्तियों पर मंडराता यह खतरा कम नहीं होगा। अब देखना यह होगा कि उधम सिंह नगर पुलिस प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता से नामजद आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजता है और पीड़ित विधवा महिला को न्याय दिला पाता है।



