रुद्रपुर/काशीपुर। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में विदेश में नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर युवाओं को अवैध ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जाल में धकेलने का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ऊधमसिंह नगर पुलिस ने खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने वाले एक हाईप्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय ठगी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए उत्तर प्रदेश के दो सगे भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
आरोपियों ने पीड़ित युवक को दुबई में वर्क परमिट पर आकर्षक नौकरी दिलाने का झांसा दिया था, लेकिन वहां पहुंचने पर उसे टूरिस्ट वीजा पर अवैध रूप से लावारिस छोड़ दिया गया। जब युवक ने इसका विरोध किया, तो उसे खाड़ी देश में बंधक बनाकर प्रताड़ित किया गया और मारपीट की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के सख्त निर्देश पर काशीपुर कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया है।
₹2 लाख लेकर वर्क वीजा के नाम पर थमाया टूरिस्ट वीजा
पूरा मामला काशीपुर के मोहल्ला अल्ली खां इलाके का है। पुलिस को दी गई तहरीर में पीड़ित मंसूर आलम (पुत्र रियासत हुसैन) ने बताया कि उनके भाई मुशीर आलम को रोजगार की तलाश थी। इसी दौरान उनका संपर्क उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के टांडा बादली निवासी जाबिर (पुत्र साबिर) से हुआ। जाबिर ने मंसूर और उसके परिवार को झांसा दिया कि उसका सगा भाई नादिर दुबई में रहता है और वहां उसकी बड़ी पैठ है। जाबिर ने दावा किया कि नादिर दुबई में मुशीर को वर्क परमिट पर एक बेहद शानदार और मोटी सैलरी वाली नौकरी दिलवा देगा।
जाबिर के इस झांसे में आकर पीड़ित परिवार ने अपने उज्जवल भविष्य के लिए पाई-पाई जोड़कर यूपीआई (UPI) और अन्य माध्यमों से करीब ₹2 लाख की रकम जाबिर के खाते में ट्रांसफर कर दी। पैसे मिलने के बाद, १९ जुलाई २०२५ को मुशीर आलम को दिल्ली एयरपोर्ट से दुबई के लिए रवाना कर दिया गया। लेकिन मुशीर के पैर दुबई की धरती पर पड़ते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां उसे पता चला कि उसे काम करने के लिए वैध वर्क परमिट पर नहीं, बल्कि महज कुछ दिनों के टूरिस्ट वीजा पर भेजा गया है।
दुबई में विरोध करने पर मारपीट, ₹५० हजार की अतिरिक्त फिरौती
मुशीर आलम ने जब दुबई पहुंचते ही इस धोखे का विरोध किया और जाबिर के भाई नादिर से संपर्क किया, तो नादिर ने अपने असली रंग दिखा दिए। नादिर ने मुशीर के साथ गाली-गलौज की और उसे एक कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा।
इधर काशीपुर में जब भाई मंसूर आलम को इस बात की खबर लगी, तो उसने तुरंत भारत में मौजूद मुख्य आरोपी जाबिर और दुबई में बैठे नादिर से फोन पर बात की। लेकिन मदद करने और पैसे लौटाने के बजाय दोनों आरोपियों ने मंसूर को जान से मारने की धमकी दी। आरोपियों ने पीड़ित परिवार के सामने एक नई शर्त रख दी कि यदि मुशीर को जिंदा और सुरक्षित वापस भारत बुलाना है, तो इसके लिए अतिरिक्त ₹५० हजार की फिरौती देनी होगी, अन्यथा मुशीर को वहीं सड़ने के लिए छोड़ दिया जाएगा।
भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप से बची जान
घबराए पीड़ित परिवार ने हार नहीं मानी और अपने भाई की जान बचाने के लिए सीधे भारत सरकार के दरवाजे पर दस्तक दी। मंसूर आलम ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दुबई स्थित भारतीय दूतावास (Embassy of India, Dubai) को एक आपातकालीन ई-मेल भेजकर अपने भाई को रेस्क्यू करने की गुहार लगाई। इसके साथ ही भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) से भी लगातार संपर्क साधा गया।
“जब हमें दुबई में भाई के साथ मारपीट और बंधक बनाए जाने की खबर मिली, तो हमने तुरंत भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय को मेल भेजकर मदद मांगी। विदेश मंत्रालय ने हमें ढाढस बंधाया और स्थानीय पुलिस में मामला दर्ज कराने की सलाह दी। काफी जद्दोजहद और खुद के पैसों से हवाई टिकट का इंतजाम करने के बाद हम मुशीर को वापस भारत सुरक्षित ला पाए।” — मंसूर आलम, पीड़ित का भाई
भविष्य पर संकट: पासपोर्ट हुआ ‘ब्लैक लिस्ट’
हालांकि मुशीर किसी तरह अपनी जान बचाकर वतन वापस लौट आया है, लेकिन धोखेबाजों की इस करतूत ने उसका करियर पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। टूरिस्ट वीजा पर भेजे जाने और तय समय सीमा से अधिक समय तक दुबई में अवैध रूप से रहने (Overstay) के कारण संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नियमों के तहत मुशीर आलम के पासपोर्ट को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। इसका सीधा असर मुशीर के भविष्य पर पड़ेगा और अब वह आने वाले कई सालों तक किसी भी देश में रोजगार या यात्रा के लिए नहीं जा सकेगा।
पुलिस की सख्त कार्रवाई: BNS और आव्रजन अधिनियम में मुकदमा दर्ज
इस अंतरराष्ट्रीय ठगी और अवैध ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले पर काशीपुर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी है।
“एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने नामजद आरोपी नादिर और जाबिर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं समेत आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम २०२५ की धारा १० और २४ के तहत संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच उपनिरीक्षक (SI) देवेंद्र सिंह सामंत को सौंपी गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।” — प्रशांत कुमार, पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO), काशीपुर
इस घटना ने एक बार फिर उन रैकेट्स को बेनकाब किया है जो उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सीधे-साधे युवाओं को खाड़ी देशों में नौकरी का लालच देकर अपनी ठगी का शिकार बनाते हैं। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत एजेंट के झांसे में न आएं और विदेश जाने से पहले वीजा की प्रामाणिकता की जांच जरूर करें।



