देशफीचर्ड

24 घंटे में दूसरी बार PM मोदी की देशवासियों से बड़ी अपील: ‘तेल-सोना कम खरीदें, विदेशी मुद्रा बचाएं और युद्ध के असर को हराएं’

नई दिल्ली/वडोदरा: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से एक विशेष और संयमित व्यवहार अपनाने की अपील की है। पिछले 24 घंटों में दूसरी बार देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सोने की खरीदारी टालने और विदेशी मुद्रा बचाने का आह्वान किया है। पीएम ने मौजूदा वैश्विक हालातों की तुलना कोरोनाकाल की चुनौतियों से करते हुए देशवासियों को सर्तक रहने का संदेश दिया है।

पश्चिम एशिया संकट: क्यों चिंतित है भारत?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध की आहट ने दुनिया भर के बाजारों में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान का प्रस्ताव ठुकराने और इजरायल द्वारा हमले के संकेतों के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुस’ (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही पर संकट आ सकता है।

यदि यह समुद्री मार्ग बाधित होता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति ठप हो सकती है, जिससे कीमतें आसमान छू सकती हैं। प्रधानमंत्री ने इन्हीं भविष्य की चुनौतियों को भांपते हुए देशवासियों से अपनी आदतों में बदलाव लाने की अपील की है ताकि देश पर युद्ध का आर्थिक असर न्यूनतम हो सके।

कोरोनाकाल के फार्मूले पर लौटने का सुझाव

हैदराबाद और वडोदरा के अपने कार्यक्रमों में पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिस प्रकार देश ने एकजुट होकर कोविड-19 महामारी का सामना किया था, उसी प्रकार हमें इस वैश्विक संकट से भी निपटना होगा। उन्होंने नागरिकों को एक बार फिर वर्क फ्रॉम होम (Work From Home), ऑनलाइन क्लास और वर्चुअल मीटिंग जैसे उपायों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री का मानना है कि इन उपायों से सड़क पर वाहनों की संख्या कम होगी, जिससे सीधे तौर पर ईंधन की खपत में भारी कटौती की जा सकेगी।

ईंधन और सोने की खरीदारी पर ब्रेक लगाने का आह्वान

प्रधानमंत्री ने वडोदरा में जनता को संबोधित करते हुए एक कड़ा लेकिन आवश्यक संदेश दिया। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे व्यक्तिगत स्तर पर आयातित वस्तुओं का उपयोग कम करें।

  • ईंधन की बचत: पीएम ने सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के अधिक उपयोग पर जोर दिया।

  • सोने की खरीदारी: उन्होंने लोगों से अपील की कि वे फिलहाल सोने की खरीदारी को टाल दें। भारत में सोने का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है, जिससे देश की विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा बाहर चला जाता है।

  • विदेशी मुद्रा भंडार: पीएम ने साफ किया कि हमें उन सभी गतिविधियों से बचना होगा जिनमें विदेशी मुद्रा खर्च होती है, ताकि भारत का खजाना संकट के समय मजबूत बना रहे।

किसानों और परिवारों के लिए विशेष संदेश

हैदराबाद में अपने संबोधन के दौरान पीएम ने खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि साल 2025-26 में भारत ने 1.85 लाख करोड़ रुपये का खाद्य तेल आयात किया है। पीएम ने कहा, “यदि हर परिवार अपने रसोई घर में तेल की खपत में थोड़ी भी कमी लाता है, तो देश का विदेशी मुद्रा भंडार काफी हद तक सुरक्षित रह सकता है।”

साथ ही, उन्होंने देश के अन्नदाताओं से उर्वरक (Fertilizer) का इस्तेमाल 50 फीसदी तक कम करने का ऐतिहासिक आह्वान किया। पीएम ने इसके तीन मुख्य लाभ गिनाए:

  1. अनाज की गुणवत्ता में सुधार होगा।

  2. जमीन की उपजाऊ शक्ति (Soil Fertility) बढ़ेगी।

  3. खाद की किल्लत और आयात पर निर्भरता कम होगी।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत न केवल इस संकट से उबरेग, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं (Global Supply Chains) में एक प्रमुख और विश्वसनीय भागीदार बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि सरकार देश को रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिन-रात काम कर रही है, लेकिन इस राष्ट्रीय यज्ञ में नागरिकों की आहुति भी अनिवार्य है।

पश्चिमी एशिया का यह संकट भले ही इस दशक की सबसे बड़ी चुनौती हो, लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार अब “निवारक रणनीति” (Preventive Strategy) पर काम कर रही है। अब यह देश के नागरिकों पर निर्भर करता है कि वे प्रधानमंत्री की इस अपील को किस तरह एक जन-आंदोलन में बदलते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button