योगी मंत्रिमंडल विस्तार 2.0: लखनऊ के गलियारों में हलचल तेज; 6 नए चेहरों की एंट्री और जातीय समीकरणों पर बड़ा दांव
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल के मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार अब किसी भी क्षण हो सकता है। सूत्रों की मानें तो अगले 24 से 48 घंटों के भीतर राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। मिशन 2027 को ध्यान में रखते हुए इस विस्तार के जरिए भाजपा न केवल क्षेत्रीय असंतुलन को साधने की कोशिश करेगी, बल्कि ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के अपने पुराने और सफल फॉर्मूले को भी नई धार देगी।
लोकसभा चुनाव के बाद खाली हुए पदों और आगामी विधानसभा चुनौतियों के बीच, यह कैबिनेट विस्तार उत्तर प्रदेश की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
रिक्तियों का गणित: 6 नए मंत्रियों की जगह
उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर मंत्रिमंडल में अधिकतम 60 सदस्य शामिल हो सकते हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री और दो उप-मुख्यमंत्रियों को मिलाकर कुल 54 मंत्री कार्यभार संभाल रहे हैं। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद और राज्यमंत्री अनूप प्रधान वाल्मीकि के सांसद चुने जाने के बाद मंत्रिमंडल में रिक्तियां बढ़ी हैं।
मौजूदा कैबिनेट की संरचना कुछ इस प्रकार है:
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कैबिनेट मंत्री: 21
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राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार): 14
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राज्यमंत्री: 19
इस समीकरण के अनुसार, मुख्यमंत्री के पास अभी 6 नए मंत्रियों को शामिल करने की गुंजाइश है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शीर्ष नेतृत्व ने इन छह नामों पर अपनी मुहर लगा दी है।
क्रॉस वोटिंग का इनाम? मनोज पांडेय और पूजा पाल की दावेदारी
इस विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा समाजवादी पार्टी से पाला बदलकर भाजपा खेमे में आए विधायकों की हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, 2024 के राज्यसभा चुनावों में भाजपा के पक्ष में ‘क्रॉस वोटिंग’ करने वाले विधायकों को योगी सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है।
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मनोज पांडेय: सपा के पूर्व मुख्य सचेतक और ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडेय का नाम कैबिनेट की रेस में सबसे आगे है। ब्राह्मण समुदाय के कद्दावर नेता के रूप में उनकी पहचान भाजपा को अवध क्षेत्र में मजबूती दे सकती है।
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पूजा पाल: प्रयागराज की चायल सीट से विधायक और पूर्व विधायक राजू पाल की पत्नी पूजा पाल को भी मंत्री बनाए जाने की प्रबल संभावना है। अतीक अहमद जैसे माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली पूजा पाल के जरिए भाजपा पिछड़ा वर्ग (OBC) और खास तौर पर ‘पाल’ समुदाय में बड़ा संदेश देना चाहती है।
संगठन और अनुभव का संगम: भूपेंद्र चौधरी और अन्य चेहरे
मंत्रिमंडल विस्तार में केवल दलबदल करने वाले ही नहीं, बल्कि भाजपा के अपने अनुभवी चेहरों को भी जगह मिलने की उम्मीद है।
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भूपेंद्र चौधरी: यूपी बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष रहे भूपेंद्र चौधरी का नाम लगभग तय माना जा रहा है। उनके अनुभव और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनकी पकड़ को देखते हुए उन्हें कैबिनेट रैंक की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
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अशोक कटारिया व कृष्णा पासवान: सूत्रों का कहना है कि अशोक कटारिया को पश्चिमी यूपी और कृष्णा पासवान को सुरक्षित सीटों और महिला प्रतिनिधित्व के तौर पर शामिल किया जा सकता है।
2027 का लक्ष्य: क्षेत्रीय और जातीय संतुलन
योगी सरकार का यह विस्तार मात्र रिक्तियों को भरने की कवायद नहीं है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछाने जैसा है। भाजपा का नेतृत्व इस बार क्षेत्रीय समीकरणों पर बारीकी से काम कर रहा है। बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के उन हिस्सों को प्रतिनिधित्व देने की योजना है जहां लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
साथ ही, चर्चा यह भी है कि विस्तार के साथ-साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बड़ा फेरबदल भी किया जा सकता है। जिन मंत्रियों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है, उनके विभागों को अधिक सक्रिय मंत्रियों को सौंपा जा सकता है।
विपक्ष की नजर और जनता की उम्मीदें
एक तरफ जहां भाजपा खेमे में उत्साह है, वहीं विपक्ष भी इस विस्तार को करीब से देख रहा है। दलबदलुओं को मंत्री बनाए जाने की खबरों पर सपा और कांग्रेस ‘नैतिकता’ का सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, भाजपा का तर्क है कि जो भी विकास की मुख्यधारा और प्रधानमंत्री मोदी के विजन के साथ आना चाहता है, उसका स्वागत है।
उत्तर प्रदेश की जनता की नजरें अब राजभवन की ओर टिकी हैं। क्या ये 6 नए चेहरे उत्तर प्रदेश के विकास की रफ्तार को और तेज कर पाएंगे? और क्या जातीय समीकरणों का यह मेल 2027 में भाजपा की राह आसान करेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में मिलने शुरू हो जाएंगे।


