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Reading: चंपावत कथित गैंगरेप केस में बड़ा खुलासा: षड्यंत्र का पर्दाफाश, मुख्य आरोपी और उसकी महिला मित्र गिरफ्तार
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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > चंपावत कथित गैंगरेप केस में बड़ा खुलासा: षड्यंत्र का पर्दाफाश, मुख्य आरोपी और उसकी महिला मित्र गिरफ्तार
उत्तराखंडफीचर्ड

चंपावत कथित गैंगरेप केस में बड़ा खुलासा: षड्यंत्र का पर्दाफाश, मुख्य आरोपी और उसकी महिला मित्र गिरफ्तार

The Hill India News
Last updated: May 8, 2026 2:30 pm
The Hill India News
Published: May 8, 2026
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Photo: Champawat Police
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खटीमा/चंपावत: उत्तराखंड के चंपावत जिले में जिस कथित नाबालिग गैंगरेप प्रकरण ने पूरे प्रदेश की सियासत और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया था, उसमें पुलिस की जांच ने एक चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। पुलिस की वैज्ञानिक और तकनीकी तफ्तीश में यह पूरा मामला एक सुनियोजित षड्यंत्र (Conspiracy) निकला है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता कमल सिंह रावत और उसकी एक महिला मित्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच में सामने आया है कि व्यक्तिगत रंजिश और बदले की भावना के चलते निर्दोष लोगों को जघन्य अपराध के झूठे मुकदमे में फंसाने के लिए यह पूरी पटकथा रची गई थी।

Contents
रंजिश की वेदी पर ‘नाबालिग’ का इस्तेमालपुलिस की सख्त कार्रवाई: पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ींतकनीक और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने खोली पोलसामाजिक और राजनीतिक निहितार्थ

रंजिश की वेदी पर ‘नाबालिग’ का इस्तेमाल

पुलिस की जांच के अनुसार, यह मामला केवल एक झूठी प्राथमिकी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें एक नाबालिग बालिका को मोहरा बनाया गया। जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि नाबालिग को बंधक बनाकर उसका एक वीडियो शूट किया गया और उसे सोशल मीडिया पर सुनियोजित तरीके से वायरल किया गया ताकि समाज में आक्रोश पैदा किया जा सके और पुलिस पर दबाव बनाया जा सके।

थाना चंपावत में राम सिंह रावत की तहरीर के आधार पर पुलिस ने इस गहरी साजिश की परतों को खोलना शुरू किया। पुलिस ने मुख्य आरोपी कमल सिंह रावत, उसकी महिला मित्र और आनंद सिंह मेहरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस की सख्त कार्रवाई: पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ीं

मामले की संवेदनशीलता और साजिश की भयावहता को देखते हुए पुलिस ने विवेचना के दौरान मुकदमे में पॉक्सो एक्ट की धारा 16 और 17 को भी जोड़ा है। ये धाराएं किसी अपराध को उकसाने या उसमें सहायता करने से संबंधित हैं। इसके तत्काल बाद, पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कमल सिंह रावत और उसकी महिला मित्र को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। मामले के तीसरे नामजद आरोपी के खिलाफ पुलिस की विधिक कार्रवाई और तलाश जारी है।

तकनीक और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने खोली पोल

चंपावत पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए डिजिटल फुटप्रिंट्स और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। वीडियो के वायरल होने के समय, लोकेशन और आरोपियों के आपसी संवाद ने पुलिस के संदेह को पुख्ता कर दिया। चंपावत की पुलिस अधीक्षक (SP) रेखा यादव ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि कानून का दुरुपयोग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि समाज में भ्रम फैलाने और निर्दोषों को प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ पुलिस का अभियान जारी रहेगा।

सामाजिक और राजनीतिक निहितार्थ

इस खुलासे के बाद प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। पिछले कुछ दिनों से विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे, लेकिन अब जांच की दिशा बदलने से समीकरण बदल गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ‘हनीट्रैप’ या ‘फेक रंजिश’ के मामलों से वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में कठिनाई होती है और जांच एजेंसियों का समय भी नष्ट होता है।

चंपावत पुलिस की इस सक्रियता ने यह सिद्ध कर दिया है कि आधुनिक जांच प्रणालियों के युग में किसी को झूठे जाल में फंसाना अब आसान नहीं रहा। फिलहाल, पुलिस इस साजिश के पीछे के अन्य संभावित चेहरों और उनके उद्देश्यों की गहराई से जांच कर रही है।

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TAGGED:Champawat Police NewsKamal Singh Rawat ArrestedSections 16 and 17 of the POCSO ActSP Rekha Yadav ChampawatUttarakhand Fake Rape Case Conspiracy
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