
एफएमसीजी सेक्टर की बड़ी कंपनी डाबर इंडिया ने अपने उपभोक्ताओं को झटका देते हुए अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी और पैकेट में मिलने वाली मात्रा (ग्रामेज) में कटौती का फैसला किया है। इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो रोजमर्रा की जरूरतों जैसे टूथपेस्ट, हेयर ऑयल, शहद, ग्लूकोज, रियल जूस और अन्य घरेलू उत्पादों का उपयोग करते हैं। कंपनी ने साफ किया है कि बढ़ती इनपुट लागत और वैश्विक स्तर पर महंगाई के दबाव के कारण यह निर्णय लेना जरूरी हो गया था।
डाबर इंडिया के मुताबिक कंपनी अपने पूरे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में लगभग 4 प्रतिशत तक कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई उत्पाद पहले 100 रुपये का था तो अब उसकी कीमत करीब 104 रुपये हो जाएगी। इसी तरह 150 रुपये का सामान लगभग 156 रुपये में मिलेगा। हालांकि यह बढ़ोतरी अलग-अलग उत्पादों पर अलग-अलग प्रभाव डाल सकती है, लेकिन औसतन पूरे बाजार में इसका असर दिखाई देगा।
कंपनी ने केवल कीमतें ही नहीं बढ़ाई हैं, बल्कि छोटे पैक जैसे 10 रुपये और 20 रुपये वाले उत्पादों में मात्रा भी कम करने का निर्णय लिया है। इसे बिजनेस की भाषा में “ग्रामेज कट” कहा जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि उपभोक्ताओं को कीमत में बड़ा बदलाव महसूस न हो, लेकिन कंपनी बढ़ती लागत का बोझ कुछ हद तक संतुलित कर सके। उदाहरण के तौर पर अब वही 10 रुपये का पैक पहले की तुलना में कम मात्रा में मिलेगा।
कंपनी के इस फैसले से खासतौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि वे छोटे पैक पर अधिक निर्भर रहते हैं। रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले उत्पाद जैसे टूथपेस्ट, बालों का तेल और स्वास्थ्य संबंधी जूस जैसी चीजें अब या तो महंगी मिलेंगी या फिर कम मात्रा में उपलब्ध होंगी।
डाबर ने अपने इस कदम के पीछे मुख्य कारण कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को बताया है। कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई जरूरी कच्चे पदार्थों की कीमतों में तेजी आई है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव ने भी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिससे इनपुट कॉस्ट में और बढ़ोतरी हुई है। कंपनी के अनुसार वर्तमान में उन्हें लगभग 10 प्रतिशत तक की महंगाई का सामना करना पड़ रहा है।
डाबर के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया कि कंपनी को लगातार बढ़ती लागतों का दबाव झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल डाबर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे FMCG सेक्टर पर असर डाल रही है। विशेष रूप से होम केयर, पर्सनल केयर और हेल्थकेयर जैसी श्रेणियों में लागत का दबाव अधिक देखने को मिल रहा है।
सीईओ ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में बाजार में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि कंपनियां लगातार अपनी कीमत नीति और पैकेजिंग रणनीति को संतुलित करने की कोशिश कर रही हैं। उनका मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल, पैकेजिंग मटेरियल और अन्य जरूरी संसाधनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर उपभोक्ता बाजार पर पड़ता है।
इसके अलावा कंपनी ने यह भी बताया कि मौसमी परिस्थितियां भी उत्पादों की मांग को प्रभावित कर रही हैं। गर्मियों में रियल जूस और ग्लूकोज जैसे उत्पादों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इस बार उत्तर भारत में बेमौसम बारिश और आंधी-तूफान के कारण मांग में अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, कंपनी को उम्मीद है कि यदि तापमान बढ़ता है और एल नीनो जैसी परिस्थितियां प्रभाव डालती हैं, तो इन उत्पादों की बिक्री में दो अंकों की वृद्धि हो सकती है।
कुल मिलाकर डाबर का यह फैसला उपभोक्ताओं और बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ जहां कंपनी अपने मुनाफे और लागत को संतुलित करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं को अब अपने बजट को और सावधानी से मैनेज करना होगा। रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं में यह बदलाव धीरे-धीरे लोगों की खरीदारी की आदतों को भी प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य FMCG कंपनियां भी इसी तरह की रणनीति अपना सकती हैं, जहां कीमतों में हल्की बढ़ोतरी और पैकेट साइज में बदलाव के जरिए लागत और बिक्री के बीच संतुलन बनाया जाएगा।



