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उत्तराखंडदुर्घटनाफीचर्ड

उत्तराखंड: भिकियासैंण के पास दर्दनाक हादसा, जागर से लौट रहे जगरियों की कार गहरी खाई में गिरी, तीन लोगों की मौत

The Hill India News
Last updated: May 7, 2026 5:47 am
The Hill India News
Published: May 7, 2026
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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में गुरुवार तड़के एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। भिकियासैंण तहसील क्षेत्र में रापड़–गंगोड़ा–चमड़खान मोटर मार्ग पर एक कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में कार सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। मृतक जागर कार्यक्रम में शामिल होकर वापस अपने घर लौट रहे थे।

जानकारी के अनुसार हादसा सुबह करीब साढ़े चार बजे हुआ। कार संख्या UK04 T 6683 में तीन लोग सवार थे, जो नौघरिया (सिनौड़ा) क्षेत्र से जागर कार्यक्रम संपन्न कर चमड़खान की ओर लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि वाहन चालक ने अचानक नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद कार सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण दुर्घटना काफी भयावह थी और वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और SDRF की टीम मौके के लिए रवाना हुई। तहसीलदार बर्खा जलाल के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। SDRF की टीम ने कठिन परिस्थितियों में खाई में उतरकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। काफी मशक्कत के बाद तीनों लोगों को वाहन से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

SDRF प्रभारी महिपाल सिंह ने बताया कि दुर्घटनास्थल काफी दुर्गम क्षेत्र में था, जिससे बचाव कार्य में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। टीम ने पूरी सावधानी के साथ शवों को बाहर निकाला और आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंप दिया। हादसे की सूचना मिलने के बाद भतरौंजखान थाने के प्रभारी अवनीश कुमार भी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दुर्घटना की जांच शुरू कर दी गई।

मृतकों की पहचान भुवन पुत्र दीवान राम निवासी ग्राम सनेटी, तहसील रानीखेत तथा कैलाश चंद्र पुत्र बहादुर राम निवासी ग्राम दौड़ाखाल, तहसील रानीखेत के रूप में हुई है। कैलाश चंद्र की उम्र लगभग 32 वर्ष बताई जा रही है। तीसरे मृतक की पहचान करने के प्रयास जारी हैं। पुलिस परिजनों से संपर्क कर आवश्यक जानकारी जुटा रही है।

बताया जा रहा है कि तीनों लोग पेशे से “जगरी” थे। वे ग्राम चमोली पुसैला में आयोजित जागर कार्यक्रम में शामिल हुए थे और पूरी रात धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने के बाद वापस अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में यह हादसा हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार मृतक क्षेत्र में काफी सम्मानित थे और धार्मिक आयोजनों में उनकी विशेष भूमिका रहती थी।

उत्तराखंड की संस्कृति में “जगरी” का विशेष महत्व होता है। जगरिए पारंपरिक लोक गायक और धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले लोग होते हैं। वे हुड़के की थाप पर देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं और जागर की परंपरा को जीवित रखते हैं। जागर उत्तराखंड की प्राचीन लोक धार्मिक परंपरा है, जिसमें स्थानीय देवी-देवताओं की स्तुति और पूजा की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग विशेष अवसरों पर जगरियों को आमंत्रित करते हैं।

गर्मी के मौसम में जब लोग मैदानी इलाकों से अपने गांव लौटते हैं, तब गांवों में जागर कार्यक्रमों का आयोजन अधिक होता है। ऐसे आयोजनों में जगरियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यही कारण है कि इस हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में दुख और शोक का माहौल है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि कई मोटर मार्गों पर सुरक्षा दीवारें और चेतावनी संकेत नहीं होने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। लोगों ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की भी मांग की है।

फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है। शुरुआती अनुमान के अनुसार दुर्घटना का कारण वाहन से नियंत्रण खोना माना जा रहा है, हालांकि तकनीकी जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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