
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर घरेलू राजनीति के दबाव में घिरते नजर आ रहे हैं। हाल ही में सामने आए एक बड़े सर्वेक्षण ने उनकी लोकप्रियता को लेकर कई चौंकाने वाले संकेत दिए हैं। सर्वे के मुताबिक, अमेरिका में ट्रंप की कुल अप्रूवल रेटिंग घटकर 37 प्रतिशत रह गई है, जबकि 62 प्रतिशत लोगों ने उनके कामकाज पर असहमति जताई है। यह आंकड़ा उनके दोनों कार्यकालों में सबसे खराब माना जा रहा है। ऐसे समय में यह गिरावट और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि अमेरिका में नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं।
‘वाशिंगटन पोस्ट-एबीसी न्यूज-इप्सोस’ के संयुक्त सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिकी जनता का बड़ा वर्ग ट्रंप की आर्थिक नीतियों, महंगाई पर नियंत्रण और ईरान से जुड़े तनावपूर्ण हालात को संभालने के तरीके से नाराज दिखाई दे रहा है। सर्वे में यह भी सामने आया कि 10 में से लगभग 4 अमेरिकी ही ट्रंप को पसंद कर रहे हैं, जबकि बाकी लोग या तो असंतुष्ट हैं या किसी राजनीतिक दल पर भरोसा नहीं जता रहे।
सबसे बड़ा झटका ट्रंप को अर्थव्यवस्था और महंगाई के मोर्चे पर लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की आर्थिक नीतियों को लेकर उनकी अप्रूवल रेटिंग घटकर 34 प्रतिशत रह गई है। वहीं महंगाई को नियंत्रित करने के मामले में यह आंकड़ा केवल 27 प्रतिशत तक पहुंच गया। जीवन-यापन की बढ़ती लागत पर लोगों की नाराजगी और भी ज्यादा देखने को मिली, जहां सिर्फ 23 प्रतिशत लोगों ने ट्रंप के कामकाज का समर्थन किया जबकि 76 प्रतिशत लोगों ने असहमति जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में बढ़ती ईंधन कीमतों और वैश्विक अस्थिरता का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। खासतौर पर ईरान के साथ बढ़ते तनाव ने अमेरिकी जनता के बीच चिंता पैदा कर दी है। सर्वेक्षण के अनुसार, 66 प्रतिशत अमेरिकियों ने ईरान से निपटने के ट्रंप के तरीके को गलत बताया, जबकि केवल 33 प्रतिशत लोगों ने उनका समर्थन किया।
हालांकि ट्रंप को पूरी तरह से नकारा भी नहीं जा रहा है। इमिग्रेशन यानी आव्रजन के मुद्दे पर उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला है। अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर उनकी सख्त नीतियों को 45 प्रतिशत लोगों ने सही माना, जबकि 54 प्रतिशत लोग इससे असहमत रहे। रिपब्लिकन समर्थकों के बीच ट्रंप की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है। सर्वे में 85 प्रतिशत रिपब्लिकन मतदाताओं ने ट्रंप के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।
सर्वेक्षण का एक और दिलचस्प पहलू यह रहा कि बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक अब किसी भी राजनीतिक दल पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। आव्रजन के मुद्दे पर 23 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें न रिपब्लिकन पर भरोसा है और न डेमोक्रेट्स पर। अर्थव्यवस्था के मामले में 27 प्रतिशत, अपराध पर 28 प्रतिशत और महंगाई पर 33 प्रतिशत लोगों ने दोनों दलों से दूरी दिखाई।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जैसे उभरते मुद्दों पर भी जनता का भरोसा राजनीतिक दलों से हटता नजर आया। करीब 51 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें AI को लेकर न रिपब्लिकन पार्टी पर भरोसा है और न ही डेमोक्रेटिक पार्टी पर। इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिकी जनता अब पारंपरिक राजनीतिक वादों से आगे बढ़कर वास्तविक नतीजे चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर ट्रंप आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था, महंगाई और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर स्थिति सुधारने में सफल नहीं होते, तो इसका असर नवंबर के चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी पर भी पड़ सकता है। हालांकि ट्रंप की कोर वोट बैंक पर पकड़ अब भी मजबूत मानी जा रही है, लेकिन स्वतंत्र और मध्यमार्गी मतदाताओं की नाराजगी उनके लिए चिंता का विषय बन सकती है।
कुल मिलाकर, यह सर्वे संकेत देता है कि ट्रंप के सामने अब केवल विपक्ष की चुनौती नहीं है, बल्कि आम अमेरिकी नागरिकों का भरोसा बनाए रखना भी बड़ी परीक्षा बन गया है। आने वाले महीनों में उनकी नीतियां और फैसले तय करेंगे कि उनकी लोकप्रियता दोबारा बढ़ती है या फिर राजनीतिक मुश्किलें और गहरी होती हैं।



