नई दिल्ली: देश के पांच राज्यों की सात विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे। इन सीटों पर हुए चुनावों को आगामी बड़े राजनीतिक बदलावों और राज्य सरकारों के लिटमस टेस्ट (परीक्षा) के रूप में देखा जा रहा है। ये चुनाव मुख्य रूप से मौजूदा विधायकों के असमय निधन के कारण खाली हुई सीटों पर कराए गए हैं। इन सीटों पर मतदान दो चरणों में 9 अप्रैल और 23 अप्रैल को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ था।
इन उपचुनावों में सबसे प्रमुख नाम महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का है, जिनका इसी साल जनवरी में एक दुखद विमान दुर्घटना में निधन हो गया था। इस घटना के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में उपजी सहानुभूति और नए समीकरणों को लेकर सभी दलों की नजरें नतीजों पर टिकी हुई हैं। इसके अलावा कर्नाटक, गुजरात, नागालैंड और त्रिपुरा की सीटों के नतीजे भी संबंधित राज्यों के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।
महाराष्ट्र उपचुनाव: बारामती की प्रतिष्ठा की लड़ाई
महाराष्ट्र की दो सीटों पर उपचुनाव हुए हैं, जिनमें ‘बारामती’ राज्य की सबसे हॉट सीट बनी हुई है। बारामती को पवार परिवार का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी और वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार यहां से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की उम्मीदवार हैं। दिलचस्प बात यह है कि सुनेत्रा पवार बारामती विधानसभा उपचुनाव में किसी प्रमुख राजनीतिक दल की एकमात्र उम्मीदवार हैं। हालांकि, एनसीपी नेता धनंजय मुंडे की अलग रह रहीं पत्नी करुणा मुंडे सहित 22 निर्दलीय उम्मीदवार भी इस सीट से मैदान में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय प्रतीत होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बारामती में जीत का अंतर यह तय करेगा कि क्षेत्र में अजित पवार की विरासत कितनी मजबूती से कायम है।
वहीं, महाराष्ट्र की राहुरी विधानसभा सीट पिछले साल अक्टूबर में भाजपा विधायक शिवाजी करदिले के निधन के बाद से खाली है। उनके बेटे अक्षय करदिले भाजपा के उम्मीदवार के रूप में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। उनका कड़ा मुकाबला एनसीपी (शरद पवार गुट) के उम्मीदवार गोविंद मोकाटे और वंचित बहुजन अघाड़ी के संतोष चालके से है। राहुरी में जातिगत समीकरण और स्थानीय मुद्दों की अहम भूमिका रही है, जिससे इस सीट का परिणाम बेहद अप्रत्याशित माना जा रहा है।
कर्नाटक उपचुनाव: कांग्रेस बनाम भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर
कर्नाटक में दो वरिष्ठ कांग्रेस विधायकों—एच.वाई. मेटी (बागलकोट) और शमनूर शिवशंकरप्पा (दावणगेरे दक्षिण)—के निधन के बाद उपचुनाव की नौबत आई। कांग्रेस के लिए इन दोनों सीटों को बचाए रखना अपनी साख का सवाल है, क्योंकि राज्य में कांग्रेस की सरकार है और यह चुनाव उनके शासन के कामकाज का एक तरह से आकलन माना जा रहा है।
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बागलकोट: इस सीट पर भाजपा से वीरभद्रैया चरंतिमठ और कांग्रेस से उमेश मेटी के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला है। बागलकोट में लिंगायत और वोक्कालिगा मतदाताओं की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है।
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दावणगेरे दक्षिण: भाजपा ने यहां से नए चेहरे श्रीनिवास टी. दासकरियप्पा को उतारा है, जबकि कांग्रेस की ओर से समर्थ मल्लिकार्जुन मैदान में हैं। दावणगेरे दक्षिण में युवाओं का रुझान और स्थानीय विकास के मुद्दे मुख्य केंद्र बिंदु रहे हैं।
गुजरात: उमरेठ विधानसभा उपचुनाव
गुजरात के आनंद जिले की उमरेठ विधानसभा सीट पर भाजपा विधायक गोविंद परमार के निधन के बाद चुनाव हुआ। यहाँ मुख्य मुकाबला भाजपा के हर्षद परमार (दिवंगत विधायक के बेटे) और कांग्रेस के भृगुराजसिंह चौहान के बीच है। उमरेठ में भाजपा के लिए यह सीट बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि कांग्रेस ने इस क्षेत्र में अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय किया है। उमरेठ के नतीजों का असर पूरे मध्य गुजरात के राजनीतिक परिदृश्य पर पड़ सकता है।
नागालैंड: कोरिडांग विधानसभा उपचुनाव
नागालैंड के मोकोकचुंग जिले में कोरिडांग विधानसभा सीट पर उपचुनाव मौजूदा भाजपा विधायक इमकोंग एल. इमचेन के निधन के कारण हुआ है। इस सीट के लिए चुनावी मैदान में कुल छह उम्मीदवार हैं, जिनमें भाजपा प्रत्याशी दाओचियर आई. इमचेन मुख्य भूमिका में हैं; उन्हें नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के नेतृत्व वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक एलायंस (PDA) सरकार का सर्वसम्मत उम्मीदवार बनाया गया है।
इनके अलावा, कांग्रेस की ओर से टी चालुकुंबा आओ और एनपीपी (NPP) की तरफ से आई अबेनजांग मैदान में हैं, जबकि इमचातोबा इमचेन, इम्तीवापांग और तोशिकाबा निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस सीट के नतीजे नागालैंड के क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय दलों के बीच के संबंधों को नया आयाम दे सकते हैं।
त्रिपुरा: धर्मनगर विधानसभा उपचुनाव
त्रिपुरा की धर्मनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव पिछले दिसंबर में विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा विधायक बिस्वा बंधु सेन के निधन के कारण हुआ है। असम और मिजोरम की सीमाओं से सटा यह चुनावी क्षेत्र साल 2008 से ही या तो कांग्रेस या फिर भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। इस बार यहाँ मुकाबला त्रिकोणीय है, जिसमें सत्ताधारी भाजपा के जहर चक्रवर्ती, कांग्रेस के चयन भट्टाचार्जी और सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के अमिताभ दत्ता के बीच सीधी टक्कर है। धर्मनगर में वामपंथी दलों की वापसी की कोशिश और भाजपा के मजबूत प्रचार अभियान के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।
गोवा: पोंडा सीट पर रद्द हुआ चुनाव
वहीं, गोवा की पोंडा सीट पर होने वाला उपचुनाव, जो 9 अप्रैल को निर्धारित था, मतदान से कुछ ही घंटे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा रद्द कर दिया गया था। इस फैसले के बाद से इस सीट पर चुनाव की अगली तारीख और कानूनी प्रक्रिया को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
चुनावी नतीजों का राष्ट्रीय महत्व
इन उपचुनावों के परिणाम केवल स्थानीय विधायकों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये उपचुनाव परिणाम 2026 के रूप में देश भर के मतदाताओं के मिजाज को भी दर्शाते हैं। बारामती से लेकर बागलकोट और धर्मनगर तक, सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अब देखना यह है कि जनता किस उम्मीदवार पर अपना भरोसा जताती है और किसकी राजनीतिक जमीन मजबूत होती है। सभी मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और दोपहर तक रुझान स्पष्ट होने की पूरी उम्मीद है।



