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टिहरी झील में बरगी डैम जैसा हादसा: डोबरा-चांठी में आंधी-तूफान से क्षतिग्रस्त हुए फ्लोटिंग हटमेंट, एसडीआरएफ ने बचाई 30 लोगों की जान

टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड: मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम पर हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद, अब उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल से भी एक ऐसी ही भयावह तस्वीर सामने आई है। टिहरी झील में डोबरा-चांठी के पास अचानक आए तेज आंधी-तूफान के कारण पानी की सतह पर तैरने वाले फ्लोटिंग हटमेंट (Floating Huts) क्षतिग्रस्त हो गए। इस हादसे में करीब 25 से 30 पर्यटक बीच झील में फंस गए थे। हालांकि, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की तत्परता और त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन के चलते एक बड़ा हादसा टल गया और सभी पर्यटकों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने एक बार फिर से पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


टिहरी झील में कैसे बिगड़े हालात?

मिली जानकारी के अनुसार, टिहरी झील के डोबरा-चांठी पुल के निकट का मौसम अचानक बदल गया। तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के कारण पानी की लहरें उग्र हो गईं और फ्लोटिंग हटमेंट अपनी जगह से खिसककर टूटने लगे। इनमें मौजूद पर्यटकों में उस समय अफरातफरी मच गई, जब उन्हें लगा कि वे गहरे पानी में फंस गए हैं।

आपदा कंट्रोल रूम, टिहरी गढ़वाल को जैसे ही इस घटना की सूचना मिली, प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया। एसडीआरएफ की पोस्ट कोटी कॉलोनी से एसआई नरेंद्र राणा के नेतृत्व में एक विशेष रेस्क्यू टीम आवश्यक उपकरणों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुई। टीम ने बिना समय गंवाए फ्लो बोट और पर्यटन विभाग की नावों की मदद से बचाव कार्य शुरू किया।


एसडीआरएफ बनी देवदूत, टला बड़ा संकट

एसडीआरएफ की सक्रियता के कारण ही जबलपुर के बरगी डैम जैसी त्रासदी की पुनरावृत्ति होने से बच गई। बरगी डैम पर 30 अप्रैल की शाम को आए तूफान में क्रूज पलटने से कई लोगों की जान चली गई थी। टिहरी झील हादसे में एसडीआरएफ के जवानों ने जान जोखिम में डालकर सभी 30 पर्यटकों को सुरक्षित कोटी कॉलोनी तक पहुंचाया।

एसडीआरएफ के अधिकारियों ने बताया कि सभी पर्यटकों को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। फिलहाल किसी भी प्रकार की जनहानि की कोई सूचना नहीं है, जिससे स्थानीय प्रशासन और पर्यटकों के परिजनों ने राहत की सांस ली है।


भिलंगना ब्लॉक में किसानों पर मौसम की मार

टिहरी जिले के निचले और सीमांत क्षेत्रों में भी मौसम का कहर देखने को मिला। जिले के भिलंगना ब्लॉक के सीमांत गेंवाली गांव में दोपहर के समय हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। अचानक हुई इस बारिश के कारण गांव का गदेरा (पहाड़ी नाला) उफान पर आ गया।

गदेरे का मटमैला पानी सीधे खेतों में घुस गया, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा है।

“गदेरे का तेज बहाव सीधे खेतों में घुसने से गेहूं की तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसानों की महीनों की मेहनत पर एक झटके में पानी फिर गया है।” — बचन सिंह रावत, पूर्व ग्राम प्रधान


मुआवजे और सुरक्षा समीक्षा की मांग

किसानों की इस बर्बादी को देखते हुए ग्रामीणों में भारी रोष और चिंता का माहौल है। पूर्व प्रधान बचन सिंह रावत ने प्रशासन से तुरंत नुकसान का आकलन करने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

दूसरी ओर, टिहरी झील में हुए हादसे के बाद पर्यटन विभाग भी हरकत में आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी भी विपरीत मौसम के दौरान पर्यटकों की जान जोखिम में न पड़े।

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