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मानसून से पहले उत्तराखण्ड को बड़ी सौगात: सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम से अलर्ट का सफल परीक्षण

The Hill India News
Last updated: May 2, 2026 3:01 pm
The Hill India News
Published: May 2, 2026
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देहरादून: उत्तराखण्ड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्य के लिए मानसून से ठीक पहले एक बड़ी और ऐतिहासिक सौगात सामने आई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DoT) ने शनिवार को पूरे देश के साथ-साथ उत्तराखण्ड में भी ‘सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम’ के माध्यम से अलर्ट का सफल परीक्षण किया।

Contents
क्या है सेल ब्रॉडकास्टिंग तकनीक और यह कैसे काम करेगी?सीएम धामी ने केंद्रीय मंत्रियों का जताया आभारउत्तराखण्ड में क्यों खास है यह तकनीक?आपदा प्रबंधन में गेम-चेंजर

प्रातः 11:46 बजे प्रसारित किए गए इस संदेश के साथ ही राज्य में आपदाओं के दौरान आम जनमानस तक त्वरित और सटीक चेतावनी पहुंचाने का आधिकारिक शुभारंभ हो गया है। उत्तराखण्ड सरकार ने इस आधुनिक तकनीक को जल्द से जल्द लागू करने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष जोरदार पैरवी की थी।


क्या है सेल ब्रॉडकास्टिंग तकनीक और यह कैसे काम करेगी?

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने जानकारी देते हुए बताया कि सेल ब्रॉडकास्टिंग तकनीक एक ऐसी उन्नत प्रणाली है, जिसके माध्यम से किसी भी आपातकालीन स्थिति में प्रभावित क्षेत्र के सभी मोबाइल टावरों की सीमा में आने वाले उपभोक्ताओं को स्वतः ही अलर्ट प्राप्त हो जाता है।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘स्थान-विशिष्ट’ (Location-Specific) चेतावनी प्रसारण को सक्षम बनाती है। इसका अर्थ है कि यदि किसी विशेष घाटी या क्षेत्र में खतरा है, तो केवल उसी क्षेत्र के मोबाइल उपभोक्ताओं को संदेश भेजा जाएगा। इससे अनावश्यक भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है।

  • तत्काल अलर्ट: यह संदेश सीधे नेटवर्क के माध्यम से प्रसारित होता है, जिससे इंटरनेट न होने की स्थिति में भी अलर्ट मोबाइल स्क्रीन पर फ्लैश हो जाता है।

  • समय की बचत: इस तकनीक के जरिए एक साथ लाखों लोगों तक एक ही सेकंड में चेतावनी पहुंचाई जा सकती है।


सीएम धामी ने केंद्रीय मंत्रियों का जताया आभार

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तकनीक उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए एक ‘वरदान’ साबित होगी।

“राज्य सरकार का लगातार यह प्रयास था कि मानसून प्रारंभ होने से पूर्व यह तकनीक उत्तराखण्ड को उपलब्ध हो, ताकि संभावित आपदाओं के प्रति जनमानस को समय रहते सचेत किया जा सके। चारधाम यात्रा और मानसून सीजन के दौरान यह प्रणाली यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगी।”

— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड


उत्तराखण्ड में क्यों खास है यह तकनीक?

उत्तराखण्ड का भौगोलिक स्वरूप बेहद संवेदनशील है। यहाँ हर साल मानसून के दौरान भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी आपदाएं देखने को मिलती हैं। इसके अलावा, चारधाम यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु प्रदेश में मौजूद रहते हैं।

चूंकि राज्य द्वारा इस तकनीक को लागू करने के लिए विशेष अनुरोध किया गया था, इसलिए इसका प्रथम परीक्षण भी सबसे पहले उत्तराखण्ड में ही किया गया था। इस दौरान प्राप्त तकनीकी और व्यावहारिक फीडबैक को एनडीएमए और सी-डॉट के साथ साझा किया गया, जिसके आधार पर इसे अंतिम रूप दिया गया।


आपदा प्रबंधन में गेम-चेंजर

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने इस पहल को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक ‘गेम-चेंजर’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस आधुनिक प्रणाली के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक समय पर चेतावनी पहुंचाना अब संभव हो सकेगा।

सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने इस तकनीक के संचालन के लिए अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। विशेषज्ञों को एनडीएमए के दिशा-निर्देशन में विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।


सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम का यह सफल परीक्षण उत्तराखण्ड के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। मानसून 2026 और मौजूदा चारधाम यात्रा को देखते हुए यह सिस्टम यात्रियों की सुरक्षा और जोखिम न्यूनीकरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले दिनों में इस तकनीक के माध्यम से राज्य में जनहानि को न्यूनतम करने में बड़ी सफलता मिलेगी।

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