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नैनीताल में धारी के दुदली गांव में 50 फीट गहरी खाई में गिरा वाहन, 2 की मौत 4 घायल; बदहाल सड़क पर फूटा गुस्सा

नैनीताल: उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों पर बेलगाम रफ्तार और बदहाल बुनियादी ढांचा एक बार फिर मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ा है। नैनीताल जिले के धारी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले दुदली गांव में सोमवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहाँ एक अनियंत्रित मैक्स वाहन सड़क से फिसलकर करीब 50 फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस हृदयविदारक दुर्घटना में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों में एक पिता भी शामिल हैं, जिनके दो बच्चे इस समय अस्पताल में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

सोमवार की सुबह चीख-पुकार में बदली

यह दर्दनाक हादसा सोमवार, 27 अप्रैल को उस समय हुआ जब एक मैक्स वाहन बाजार से ग्रामीणों को लेकर गांव की ओर लौट रहा था। दुदली गांव के समीप पहुंचते ही चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और देखते ही देखते गाड़ी पलटते हुए गहरी खाई में समा गई। हादसे की आवाज इतनी भयानक थी कि आस-पास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण तुरंत मौके की ओर दौड़े। खाई में गाड़ी के परखच्चे उड़ चुके थे और अंदर फंसे लोग मदद के लिए गुहार लगा रहे थे।

रेस्क्यू ऑपरेशन और पुलिस की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम दलबल के साथ मौके पर पहुंची। दुर्गम ढलान होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से तत्परता दिखाते हुए सभी 6 घायलों को खाई से बाहर निकाला।

पुलिस टीम ने सभी को तत्काल ‘प्राथमिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पदमपुरी’ पहुंचाया। केंद्र के प्रभारी डॉक्टर हिमांशु कांडपाल ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही दो लोगों ने दम तोड़ दिया था। मृतकों की पहचान हरीश बेलवाल और लता शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने पंचनामा भरकर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

टूट गया परिवार: बच्चों के सामने ही पिता ने तोड़ा दम

इस नैनीताल सड़क हादसा की सबसे मार्मिक तस्वीर बेलवाल परिवार की है। मृतक हरीश बेलवाल अपने बेटे सुभाष और बेटी नेहा के साथ बाजार से घर लौट रहे थे। किसे पता था कि चंद मिनटों का यह सफर पिता और बच्चों के बीच आखिरी सफर बन जाएगा। हादसे में हरीश की मौत हो गई, जबकि उनके दोनों बच्चे, नेहा और सुभाष, गंभीर रूप से जख्मी हो गए। बच्चों की आंखों के सामने पिता की मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।

घायलों की स्थिति: हादसे में घायल हुए अन्य लोगों की पहचान निम्न रूप में हुई है:

  • नेहा बेलवाल

  • सुभाष बेलवाल

  • कमल शर्मा

  • दिनेश शर्मा

पदमपुरी में प्राथमिक उपचार के बाद, इन चारों की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल (हायर सेंटर) रेफर कर दिया है।

बदहाल सड़क: प्रशासन की लापरवाही पर ग्रामीणों का आक्रोश

हादसे के बाद दुदली और आस-पास के ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय लोगों का स्पष्ट आरोप है कि यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन की अनदेखी के चलते हुई ‘हत्या’ है। ग्रामीणों ने बताया कि धारी विकासखंड की यह सड़क लंबे समय से जर्जर स्थिति में है।

हादसे के प्रमुख कारण:

  1. सड़क पर जानलेवा गड्ढे: सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिससे वाहनों का संतुलन बिगड़ना आम बात हो गई है।

  2. क्रैश बैरियर का अभाव: पहाड़ी रास्ता होने के बावजूद खाई वाली तरफ कोई सुरक्षा दीवार या क्रैश बैरियर नहीं लगाया गया है।

  3. मरम्मत की अनदेखी: ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सड़क की सुध नहीं ली।

स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत नहीं की गई और सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

कानूनी जांच और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

पुलिस प्रशासन ने फिलहाल चालक की लापरवाही और तकनीकी खराबी जैसे पहलुओं पर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर, जिला प्रशासन ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है, लेकिन सवाल अभी भी वही बना हुआ है कि आखिर कब तक उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इन ‘मौत की सड़कों’ पर अपनी जान गंवाते रहेंगे?

नैनीताल सड़क हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या केवल चालक की गलती ही ऐसे हादसों की वजह होती है? पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार को न केवल नई सड़कों के जाल बिछाने होंगे, बल्कि मौजूदा सड़कों के रखरखाव पर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा। जब तक बुनियादी ढांचा दुरुस्त नहीं होगा, तब तक देवभूमि की शांत वादियां ऐसे ही चीख-पुकार से गूंजती रहेंगी।

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