उत्तराखंडक्राइमफीचर्ड

उत्तराखंड: फेसबुक पर वित्त मंत्री का फर्जी वीडियो दिखाकर साइबर ठगी, PWD के रिटायर्ड अफसर से 30 लाख रुपये ऐंठे

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और चौंकाने वाला तरीका अपनाते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक रिटायर्ड अधिकारी से करीब 30 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर निवेश से जुड़ा एक फर्जी वीडियो फेसबुक पर प्रसारित किया, जिसके झांसे में आकर पीड़ित ने लाखों रुपये गंवा दिए। मामले की शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार देहरादून के नेहरू कॉलोनी निवासी और लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी दर्शन लाल सिंह ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि फेसबुक स्क्रॉल करते समय उन्हें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का एक वीडियो दिखाई दिया, जिसमें निवेश कर अधिक मुनाफा कमाने की बात कही जा रही थी। वीडियो इतना वास्तविक लग रहा था कि उन्हें उस पर भरोसा हो गया।

वीडियो में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए उन्होंने कथित “ग्लोबल ट्रेडिंग” प्लेटफॉर्म पर अपना पंजीकरण कराया। इसके बाद 9 अप्रैल 2026 को उनका एक ऑनलाइन ट्रेडिंग अकाउंट खोला गया, जिसे एक वेबसाइट पर प्रदर्शित किया गया। शुरुआत में उन्हें बताया गया कि निवेश के जरिए कम समय में अच्छा लाभ कमाया जा सकता है।

ठगों ने विश्वास जीतने के लिए सबसे पहले उनसे 200 डॉलर जमा करवाए। उन्हें बताया गया कि यह एक बेसिक अकाउंट है और यदि वे अधिक राशि निवेश करेंगे तो उनका अकाउंट गोल्ड कैटेगरी में अपग्रेड हो जाएगा। साथ ही दावा किया गया कि गोल्ड अकाउंट में ज्यादा लाभ और विशेष सुविधाएं मिलेंगी।

धीरे-धीरे साइबर ठगों ने उन्हें अधिक निवेश के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया। हर दिन अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे रकम जमा करवाई जाती रही। पीड़ित को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मुनाफा दिखाया जाता था, जिससे उनका भरोसा और बढ़ता गया। इसी भरोसे के चलते उन्होंने लगातार धनराशि निवेश करनी जारी रखी।

शिकायत के मुताबिक 23 अप्रैल 2026 को अचानक उनका ट्रेडिंग अकाउंट फ्रीज कर दिया गया। उस समय तक वे लगभग 11,700 डॉलर यानी करीब 11 लाख रुपये जमा कर चुके थे। जब उन्होंने कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि खाते को दोबारा सक्रिय कराने के लिए अतिरिक्त धनराशि जमा करनी होगी। अपने पहले से जमा पैसे वापस पाने की उम्मीद में उन्होंने और रकम ट्रांसफर कर दी।

ठगों ने अलग-अलग शुल्क, टैक्स, वेरिफिकेशन फीस और अकाउंट अनफ्रीज कराने के नाम पर लगातार पैसे मांगने शुरू कर दिए। पीड़ित ने गूगल पे, डेबिट कार्ड और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से रकम भेजी। इस तरह धीरे-धीरे उनसे कुल 30 लाख रुपये से अधिक की राशि वसूल ली गई।

जब दर्शन लाल सिंह ने अपनी जमा पूंजी निकालने की कोशिश की तो उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बजाय तथाकथित एडवाइजर लगातार फोन कर और अधिक पैसा जमा करने का दबाव बनाता रहा। उन्हें भरोसा दिलाया जाता रहा कि नई राशि जमा करने के बाद उनका पूरा पैसा और मुनाफा एक साथ वापस कर दिया जाएगा। हालांकि समय बीतने के साथ उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

इसके बाद उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। जिन बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों में धनराशि ट्रांसफर की गई है, उनकी जांच की जा रही है। साथ ही साइबर अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले निवेश संबंधी विज्ञापनों और वीडियो पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। यदि किसी वीडियो में किसी बड़े नेता, मंत्री या प्रसिद्ध व्यक्ति का चेहरा दिखाई दे रहा हो, तब भी उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करना जरूरी है, क्योंकि आजकल साइबर ठग एआई और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को आसानी से झांसे में ले रहे हैं।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली साइबर ठगी लगातार नए रूप ले रही है और सतर्कता ही इससे बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button