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उत्तराखंड में आज से शुरू हुआ मकान सूचीकरण और गणना अभियान: जनगणना 2027 की दिशा में बड़ा कदम

देहरादून: उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत आज यानी 25 अप्रैल 2026 से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। यह अभियान 24 मई तक चलेगा और इस दौरान राज्य भर में तैनात प्रगणक (Enumerator) घर-घर जाकर 33 निर्धारित सवालों के आधार पर जानकारी एकत्र करेंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न होगी, जो इस जनगणना को ऐतिहासिक और आधुनिक बनाती है।

क्या है मकान सूचीकरण और गणना अभियान?

जनगणना के पहले चरण में मकान सूचीकरण (House Listing) और मकान गणना (Housing Census) की जाती है। इसका उद्देश्य राज्य के हर घर और परिवार की बुनियादी जानकारी एकत्र करना होता है। इस दौरान मकान की स्थिति, उपयोग, सुविधाएं, परिवार की संरचना जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाती हैं। इसके लिए प्रत्येक प्रगणक को एक निश्चित क्षेत्र सौंपा गया है जिसे हाउस लिस्टिंग ब्लॉक कहा जाता है।

हाउस लिस्टिंग ब्लॉक की भूमिका

हाउस लिस्टिंग ब्लॉक एक निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र होता है जिसमें करीब 150 से 180 परिवार शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी घर या परिवार छूट न जाए। उत्तराखंड में कुल 29,567 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स बनाए गए हैं, जिनमें से 24,566 ग्रामीण क्षेत्रों में और 5,001 नगर निगम क्षेत्रों में स्थित हैं।

इन सभी ब्लॉक्स को HLBC (House Listing Block Creator) पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप से मैप किया गया है, जिससे कार्य में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित हो सके।

कितने कर्मचारी लगाए गए हैं?

इस व्यापक अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य भर में कुल 20,859 प्रगणक और 3,670 सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं। इनकी तैयारी के लिए 27,006 कर्मचारियों को 555 प्रशिक्षण बैचों के माध्यम से ट्रेनिंग दी गई है। यह प्रशिक्षण डिजिटल एप्लिकेशन के उपयोग और डेटा संग्रह की प्रक्रिया को समझाने के लिए दिया गया।

जिलेवार तैयारियां

राज्य के सभी जिलों में अलग-अलग संख्या में हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स बनाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर:

  • अल्मोड़ा में 2,426 ब्लॉक्स
  • बागेश्वर में 1,069 ब्लॉक्स
  • चमोली में 1,465 ब्लॉक्स
  • देहरादून में 1,951 ब्लॉक्स
  • हरिद्वार में 3,075 ब्लॉक्स
  • नैनीताल में 1,767 ब्लॉक्स
  • पिथौरागढ़ में 1,846 ब्लॉक्स
  • टिहरी में 2,184 ब्लॉक्स
  • उधम सिंह नगर में 2,636 ब्लॉक्स

हर जिले में प्रगणकों और सुपरवाइजर्स की संख्या भी उसी अनुपात में तय की गई है ताकि कार्य समय पर पूरा किया जा सके।

नगर निगम क्षेत्रों में व्यवस्था

नगर निगम क्षेत्रों में भी अलग से ब्लॉक्स बनाए गए हैं। देहरादून नगर निगम में सबसे अधिक 1,948 ब्लॉक्स हैं, जबकि हल्द्वानी, काशीपुर, रुद्रपुर और हरिद्वार जैसे शहरों में भी बड़ी संख्या में ब्लॉक्स बनाए गए हैं।

डिजिटल जनगणना: एक नया अध्याय

इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है। प्रगणक अपने मोबाइल फोन के जरिए विशेष एप्लिकेशन में डेटा दर्ज करेंगे। इसके साथ ही ‘जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली’ (CMMS Portal) का उपयोग निगरानी और संचालन के लिए किया जाएगा।

यह पहली बार होगा जब भारत में जनगणना 100% डिजिटल तरीके से होगी, जिससे डेटा की सटीकता और प्रोसेसिंग की गति दोनों में सुधार होगा।

स्व-गणना (Self Enumeration) की भूमिका

इस अभियान से पहले राज्य सरकार ने 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक स्व-गणना का विकल्प भी दिया था। इस दौरान कुल 62,626 परिवारों ने स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की।

इन परिवारों को एक SE ID (Self Enumeration ID) प्रदान की गई है। जब प्रगणक उनके घर पहुंचेंगे, तो उन्हें केवल यह आईडी देना होगा, जिससे पहले से भरी गई जानकारी स्वतः एप में डाउनलोड हो जाएगी और सत्यापन के बाद सबमिट कर दी जाएगी।

प्रगणकों के लिए दिशा-निर्देश

  • प्रत्येक प्रगणक को लगभग 150 से 200 घरों का जिम्मा दिया गया है।
  • उन्हें एक महीने के भीतर यह कार्य पूरा करना होगा।
  • यह कार्य पार्ट-टाइम ड्यूटी के रूप में किया जाएगा, इसलिए उन्हें पूरी तरह छुट्टी नहीं दी जाएगी।

जनता के लिए जरूरी जानकारी

जनगणना निदेशालय ने जनता से अपील की है कि वे प्रगणकों को सही और सटीक जानकारी दें। यह डेटा भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

ध्यान देने योग्य बातें:

  • किसी भी प्रकार के दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी।
  • परिवार के मुखिया द्वारा दी गई जानकारी ही दर्ज की जाएगी।
  • कोई भी प्रगणक OTP नहीं मांगेगा।
  • प्रगणक के पास आधिकारिक पहचान पत्र होगा।

यदि किसी को कोई समस्या या सवाल हो, तो वे टोल फ्री नंबर 1855 पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।

भारत में जनगणना का इतिहास

भारत में पहली जनगणना 1872 में हुई थी, जबकि स्वतंत्रता के बाद पहली जनगणना 1951 में आयोजित की गई। 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण नहीं हो सकी थी, इसलिए अब 2027 की जनगणना को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

यह भारत की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी। साथ ही, इस बार जातिगत जनगणना भी की जाएगी, जिससे सामाजिक और आर्थिक नीतियों को और बेहतर तरीके से बनाया जा सकेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?

मकान सूचीकरण और गणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भविष्य की विकास योजनाओं की नींव है। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि किस क्षेत्र में कितनी आबादी है, किन सुविधाओं की कमी है और किन क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

इस डेटा के आधार पर ही शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की योजनाएं बनाई जाती हैं।

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