
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित ‘जन आक्रोश महिला पद यात्रा’ और रैली के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्षी दलों पर जमकर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘दुर्योधन’ और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को ‘दुशासन’ की संज्ञा देकर राजनीतिक बयानबाजी को और तेज कर दिया। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देने के संकेत दिए हैं।
रैली में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं की भागीदारी देखने को मिली, जिन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के खिलाफ नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि जब देश में महिलाओं के अधिकारों को सशक्त बनाने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा हो रही थी, तब कांग्रेस और उसके नेताओं का रवैया महिलाओं के सम्मान के विपरीत था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महिलाओं के मुद्दों पर गंभीर नहीं है और केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को उठाता है।
सीएम धामी ने अपने भाषण में महाभारत का उदाहरण देते हुए कांग्रेस की तुलना कौरवों की सेना से की। उन्होंने कहा कि जैसे महाभारत में कौरवों ने अन्याय और अहंकार का रास्ता चुना था, उसी तरह आज कांग्रेस भी सत्ता के लिए जनता के हितों की अनदेखी कर रही है। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की कमी दिखाई देती है, जो ‘दुर्योधन’ जैसी मानसिकता को दर्शाती है। वहीं अखिलेश यादव को ‘दुशासन’ बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के कई नेता महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के प्रति गंभीर नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के परिवारवाद पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में महिला सशक्तिकरण केवल एक परिवार तक सीमित है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वह नेहरू-गांधी परिवार से न होतीं, तो शायद उन्हें वह अवसर नहीं मिलता। धामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा आम परिवारों की महिलाओं को पीछे रखा और केवल अपने परिवार की महिलाओं को आगे बढ़ाया।
इसके साथ ही उन्होंने प्रियंका गांधी के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जब संसद में महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने का मौका आया, तो कांग्रेस पीछे हट गई। धामी ने इसे कांग्रेस की “दोहरी नीति” करार दिया और कहा कि यह जनता को भ्रमित करने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। उन्होंने ‘उज्ज्वला योजना’, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘जनधन योजना’ जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन पहलों से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाया गया है। उन्होंने दावा किया कि आज देश की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ी है।
रैली के बाद मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक पदयात्रा भी निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। इस दौरान महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला और उन्होंने नारी सम्मान के समर्थन में जोरदार नारे लगाए। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के खिलाफ नाराजगी भी खुलकर सामने आई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के तीखे बयान आने वाले चुनावों को देखते हुए राजनीतिक माहौल को और गरमा सकते हैं। विपक्षी दलों की ओर से भी इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया आने की संभावना है, जिससे राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, देहरादून की यह रैली केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसमें दिए गए बयानों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि इस बयानबाजी का आगामी चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है और विपक्ष इसका किस तरह से जवाब देता है।



