By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: उत्तराखंड में ‘एक्सटेंशन कल्चर’ पर फिर बहस तेज, ऊर्जा विभाग में सेवा विस्तार की नई कोशिशों से उठे सवाल
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड में ‘एक्सटेंशन कल्चर’ पर फिर बहस तेज, ऊर्जा विभाग में सेवा विस्तार की नई कोशिशों से उठे सवाल
उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड में ‘एक्सटेंशन कल्चर’ पर फिर बहस तेज, ऊर्जा विभाग में सेवा विस्तार की नई कोशिशों से उठे सवाल

The Hill India News
Last updated: April 24, 2026 8:13 am
The Hill India News
Published: April 24, 2026
Share
SHARE

देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी विभागों में अधिकारियों को सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) देने की परंपरा एक बार फिर चर्चा और विवाद के केंद्र में आ गई है। खासतौर पर ऊर्जा विभाग में हालिया घटनाक्रम ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में तीन वरिष्ठ अधिकारियों के सेवा विस्तार को समाप्त कर सख्त संदेश देने की कोशिश की थी, वहीं दूसरी ओर अब उसी विभाग में एक और अधिकारी को एक्सटेंशन देने की प्रक्रिया शुरू होने की खबरें सामने आ रही हैं।

दरअसल, मामला किच्छा में तैनात उपखंड अधिकारी दिनेश चंद गुरुरानी से जुड़ा हुआ है, जो 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। रिटायरमेंट की तारीख नजदीक आते ही उनके लिए सेवा विस्तार दिलाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले में सिर्फ विभागीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि बाहरी स्तर पर भी पैरवी की जा रही है। व्यापारी संगठनों के अलावा नैनीताल से सांसद अजय भट्ट द्वारा भी अधिकारी के पक्ष में पत्र लिखे जाने की बात सामने आई है।

ऊर्जा विभाग में इस संबंध में फाइल भी आगे बढ़नी शुरू हो गई है। निदेशक परिचालन एम.आर. आर्य ने मुख्य अभियंता से इस मामले में रिपोर्ट तलब की है। हालांकि यह प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में बताई जा रही है, लेकिन जिस तेजी से घटनाक्रम आगे बढ़ रहा है, उसने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।

गौरतलब है कि उत्तराखंड के ऊर्जा विभाग में सेवा विस्तार को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले भी कई अधिकारियों को लंबे समय तक एक्सटेंशन दिए जाने के उदाहरण सामने आए हैं। कभी अधूरी परियोजनाओं का हवाला दिया गया, तो कभी अधिकारियों की विशेषज्ञता और अनुभव को आधार बनाकर सेवा विस्तार दिया गया। हालांकि, इन फैसलों का लगातार विरोध भी होता रहा है, खासकर विभागीय कर्मचारियों और संगठनों की ओर से।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक प्रीतम सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिन अधिकारियों को बार-बार सेवा विस्तार दिया जा रहा है, वे सरकार के लिए “दुधारू गाय” बन चुके हैं। उनका आरोप है कि सरकार अपने चहेते अधिकारियों को बनाए रखने के लिए नियमों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी ऊर्जा विभाग में कुछ अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद उनका एक्सटेंशन खत्म किया गया था।

बीते महीने मुख्यमंत्री धामी द्वारा ऊर्जा विभाग के तीन बड़े अधिकारियों के सेवा विस्तार को समाप्त किया गया था। इनमें उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल, उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के एमडी अनिल यादव और यूपीसीएल के निदेशक अजय अग्रवाल शामिल थे। इस फैसले को सरकार की सख्ती और पारदर्शिता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना गया था। उम्मीद जताई जा रही थी कि आगे भी सरकार इस तरह के मामलों में स्पष्ट नीति अपनाएगी।

लेकिन अब फिर से सेवा विस्तार की कवायद शुरू होने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या सरकार वास्तव में इस परंपरा को खत्म करना चाहती है या फिर राजनीतिक दबाव और सिफारिशों के चलते फैसले प्रभावित हो रहे हैं। सांसद अजय भट्ट ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारी के पक्ष में पत्र जरूर लिखा है, लेकिन अंतिम निर्णय सरकार को ही लेना है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में कई कर्मचारियों को सेवा विस्तार दिया गया है, ऐसे में अन्य अधिकारी भी इसी आधार पर प्रयास कर रहे हैं।

विशेषज्ञों और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि सेवा विस्तार देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होगा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। सबसे बड़ा नुकसान युवा और नए अधिकारियों को होता है, जिन्हें आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिल पाते। जब रिटायर हो चुके अधिकारियों को बार-बार एक्सटेंशन दिया जाता है, तो पदोन्नति की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।

उत्तराखंड में “एक्सटेंशन कल्चर” अब एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह इस परंपरा को समाप्त कर एक स्पष्ट और पारदर्शी नीति लागू करे, जिससे योग्य अधिकारियों को समय पर अवसर मिल सके और प्रशासनिक व्यवस्था में संतुलन बना रहे।

अब देखना यह होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है—क्या वह सख्ती दिखाते हुए इस परंपरा पर रोक लगाएगी या फिर हर बार की तरह यह मामला भी सिफारिशों और दबाव के बीच उलझ कर रह जाएगा। फिलहाल, ऊर्जा विभाग में चल रही हलचल ने इस बहस को फिर से जीवंत कर दिया है और आने वाले दिनों में इस पर सरकार के फैसले पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

You Might Also Like

विपक्ष पर हमला बोलते हुए सदन में भड़के रेल मंत्री, कहा- ‘हम रील बनाने वाले नहीं…’
उत्तराखंड में रोजगार के नए क्षितिज: मुख्यमंत्री धामी ने 1456 अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र
New Delhi: जेल में बंद सत्येंद्र जैन की तबीयत बिगड़ी, फ़ौरन सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंची पुलिस
जनसंख्या पर संग्राम: ‘4 बच्चे’ वाले बयान पर ओवैसी का नवनीत राणा को करारा जवाब, कहा- “हमें कौन रोक रहा है, मेरे खुद 6 बच्चे हैं”
विधानसभा उपचुनाव के तीनों सीटों पर, BJP ने जारी की उम्मीदवारों की लिस्ट
TAGGED:bureaucracyDehradunEnergy DepartmentExtension CulturegovernanceService ExtensionUttarakhand
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

सरकार से बनी सहमति, आंदोलन समाप्त: सीजेपी ने वापस लिया विरोध, मंगलवार तक बाकी मांगें पूरी होने का भरोसा

The Hill India News
The Hill India News
July 25, 2026
कांवड़ यात्रा पर सीएम योगी का सख्त अल्टीमेटम: हुड़दंग, अफवाह और अव्यवस्था फैलाने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई, सुरक्षा से सुविधाओं तक व्यापक तैयारी
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से सियासत में हलचल: विपक्ष ने बताया युवाओं की जीत, शिक्षा सुधार की नई उम्मीद जगी
UTU पेपर लीक पर कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन: गणेश गोदियाल समेत कई नेता हिरासत में, सुद्धोवाला जेल भेजे गए
थार में बैठाकर पत्नी की हत्या, फिर नहर में फेंका शव! मुरादाबाद हत्याकांड ने उड़ाए होश, जांच में हो रहे चौंकाने वाले खुलासे
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न: अभिजीत दीपके बोले— “झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए”
NEET विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, युवाओं के नाम भावुक पत्र में बोले— ‘देश के किसी भी छात्र के भविष्य से नहीं होने दूंगा अन्याय’
देहरादून में नशे के कारोबार पर बड़ा प्रहार: हॉटस्पॉट क्षेत्रों में होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, युवाओं को बचाने के लिए प्रशासन का व्यापक अभियान
कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को नमन: सीएम धामी ने ‘रन फॉर कारगिल हीरोज’ मैराथन को दिखाई हरी झंडी, युवाओं से राष्ट्र सेवा का किया आह्वान
CJP प्रदर्शन पर सख्ती: हत्या के प्रयास की धारा वाली FIR से बढ़ा विवाद, जंतर-मंतर बना सुरक्षा छावनी
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?