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उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई मजबूती: ग्राम प्रधानों को दिया जाएगा तकनीकी प्रशिक्षण

The Hill India News
Last updated: April 24, 2026 7:37 am
The Hill India News
Published: April 24, 2026
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देहरादून: आपदा संवेदनशील राज्यों में शामिल उत्तराखंड को हर साल भूकंप, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। इन आपदाओं के कारण जान-माल का भारी नुकसान होता है और कई बार राहत एवं बचाव कार्यों में देरी से स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है, जिसके तहत पंचायती राज विभाग और आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग मिलकर काम करेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्राम स्तर पर आपदा से निपटने की क्षमता को मजबूत करना और स्थानीय लोगों को त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार करना है।

इस योजना के पहले चरण में राज्य के ग्राम प्रधानों को आपदा प्रबंधन का व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण उन्हें आपदा की स्थिति में ‘फर्स्ट रिस्पांडर’ के रूप में तैयार करेगा, ताकि किसी भी आपदा के तुरंत बाद वे राहत और बचाव कार्यों की शुरुआत कर सकें और पेशेवर टीमों के पहुंचने तक स्थिति को नियंत्रित बनाए रख सकें। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत तैयारी ही आपदा के प्रभाव को कम करने में सबसे अहम भूमिका निभाती है।

हाल ही में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने देहरादून स्थित यूएसडीएमए (उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) में विश्व बैंक सहायतित यू-प्रिपेयर परियोजना के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा बैठक की। इस बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्धता पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों और निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं।

विशेष रूप से लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जा रहे पुलों के निर्माण कार्यों पर मंत्री ने विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन निर्माण कार्यों में सुरक्षा और गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि आपदा के समय यही बुनियादी ढांचा राहत कार्यों की रीढ़ बनता है। इसके अलावा, जिन परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया लंबित है, उन्हें जल्द पूरा करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी न हो।

आपदा शेल्टरों के निर्माण को लेकर भी सरकार बेहद गंभीर नजर आ रही है। मंत्री ने कहा कि शेल्टरों के लिए स्थान का चयन करते समय भौगोलिक स्थिति, आपदा जोखिम और स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके लिए सभी जिलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, यूएसडीएमए भवन में प्रस्तावित अत्याधुनिक राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (State Emergency Operation Center) के कार्य को भी जल्द शुरू करने पर जोर दिया गया।

राज्य के सभी जिलों में स्थापित जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों को आधुनिक तकनीकों से लैस करने की भी योजना है। मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केवल मानव संसाधन ही नहीं, बल्कि आधुनिक उपकरण और तकनीक भी जरूरी हैं। इसी दिशा में लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, एसडीआरएफ और अन्य संबंधित एजेंसियों को उनकी जरूरत के अनुसार अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। उनका मानना है कि जब तक इन विभागों की क्षमता मजबूत नहीं होगी, तब तक आपदा प्रबंधन को प्रभावी नहीं बनाया जा सकता।

सरकार की इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गांवों को आपदा सुरक्षित बनाना भी है। प्रशिक्षण प्राप्त ग्राम प्रधान अपने-अपने गांवों में जागरूकता फैलाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन की योजनाएं तैयार करेंगे। इससे गांवों को भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य संभावित आपदाओं के लिए पहले से तैयार किया जा सकेगा। इस दिशा में ‘आपदा सुरक्षित गांव’ विकसित करने की योजना पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यू-प्रिपेयर परियोजना के तहत चल रहे कार्यों की यह पहली व्यापक समीक्षा बैठक थी, जिसमें मंत्री ने विभागीय कार्यों को गहराई से समझा और कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने यह भी कहा कि आपदा केंद्रों का निर्माण ऐसे स्थानों पर किया जाए, जहां उनका बहुउद्देश्यीय उपयोग हो सके। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

मंत्री मदन कौशिक ने यह भी स्पष्ट किया कि वे स्वयं राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर परियोजनाओं की प्रगति का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए और उनका सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए। साथ ही, उन्होंने समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्यों पर विशेष जोर दिया।

उत्तराखंड जैसे आपदा संभावित राज्य में इस तरह की पहल न केवल आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाएगी, बल्कि राज्य के सतत विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ग्राम स्तर पर क्षमता निर्माण और आधुनिक तकनीकों के समावेश से राज्य भविष्य की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना करने के लिए तैयार हो सकेगा।

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