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Reading: परिसीमन, SIR और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर सियासत तेज: कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप
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परिसीमन, SIR और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर सियासत तेज: कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप

The Hill India News
Last updated: April 20, 2026 5:07 am
The Hill India News
Published: April 20, 2026
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नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बार फिर चुनावी सुधारों को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्यों ने केंद्र सरकार की नीतियों—परिसीमन, मतदाता सूची के ‘समरी इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’—पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि ये सभी कदम भारतीय जनता पार्टी (BJP) को दीर्घकालिक राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से उठाए जा रहे हैं। वहीं, पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह Rahul Gandhi के नेतृत्व में चल रहे ‘संविधान बचाओ’ अभियान को और तेज करेगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बी.के. हरि प्रसाद ने कहा कि परिसीमन, SIR और ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे मुद्दे अलग-अलग सुधार नहीं हैं, बल्कि ये एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। उनका दावा है कि इन उपायों के जरिए चुनावी संतुलन को प्रभावित करने और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इन कदमों को लोकतंत्र के लिए खतरा मानता है और इसका संगठित तरीके से विरोध करेगा।

इस बीच, कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने हाल ही में लोकसभा में एक महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को रोकने को अपनी बड़ी राजनीतिक जीत बताया है। यह विधेयक लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने और नए परिसीमन से जुड़ा था। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए कुछ राज्यों को अनुचित लाभ देना चाहती थी।

विपक्षी दलों का कहना है कि महिला आरक्षण कानून—‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’—के नाम पर परिसीमन को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहती है, तो वह मौजूदा 543 सीटों में ही इसे लागू क्यों नहीं करती। पार्टी नेताओं ने कहा कि तीन साल तक इस कानून को लागू न करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस मुद्दे पर विपक्ष पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं को उनका अधिकार देने से रोका है। इसके जवाब में कांग्रेस ने कहा कि सरकार केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है।

मतदाता सूची के ‘समरी इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर भी कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए, जिससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ा। हरि प्रसाद ने दावा किया कि 2024 के चुनावों में भी इस तरह की गड़बड़ियां देखने को मिलीं और कई लोगों को मतदान से वंचित होना पड़ा।

कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह ने भी इसी तरह की चिंताएं जताईं। उन्होंने कहा कि असम जैसे राज्यों में मतदाता सूची संशोधन और परिसीमन की प्रक्रिया ने कई सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि इन कदमों का उद्देश्य विपक्ष को कमजोर करना और सत्तारूढ़ गठबंधन को फायदा पहुंचाना है।

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी का कहना है कि जब चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव एक ही समय पर नहीं कराए जा सके, तो पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की बात व्यावहारिक नहीं लगती। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह विचार केवल राजनीतिक लाभ के लिए प्रचारित किया जा रहा है।

कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ जैसे मंच का उपयोग विपक्ष पर निशाना साधने के लिए किया, जो उचित नहीं है। उनका कहना है कि इस तरह के आरोप राजनीतिक रैलियों में लगाए जा सकते हैं, लेकिन आधिकारिक मंच का इस्तेमाल देश के गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए होना चाहिए।

पार्टी ने महंगाई, बेरोजगारी और एलपीजी संकट जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा और कहा कि जनता के असली सवालों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे राजनीतिक मुद्दों को उछाला जा रहा है।

कांग्रेस ने साफ किया है कि वह महिलाओं के आरक्षण, निष्पक्ष चुनाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। पार्टी का कहना है कि पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने का काम कांग्रेस ने किया था और वही उन्हें संसद और विधानसभाओं में भी उनका अधिकार दिलाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में परिसीमन, SIR और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ जैसे मुद्दे भारतीय राजनीति के केंद्र में रहेंगे। एक तरफ सरकार इन सुधारों को जरूरी बताती है, वहीं विपक्ष इन्हें लोकतंत्र के लिए खतरा मान रहा है। ऐसे में यह टकराव आने वाले चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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