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संसद में होता रहा विरोध सरकार ने आधी रात को लागू किया ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’, जारी की अधिसूचना

The Hill India News
Last updated: April 17, 2026 2:35 am
The Hill India News
Published: April 17, 2026
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नई दिल्ली। भारतीय संसदीय इतिहास और महिला सशक्तीकरण की दिशा में 16 अप्रैल, 2026 की तारीख एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है। संसद में जारी तीखे गतिरोध और हंगामे के बीच, केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए महिला आरक्षण अधिनियम-2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा गुरुवार आधी रात को जारी इस गजट नोटिफिकेशन के साथ ही लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का कानूनी मार्ग प्रशस्त हो गया है।

Contents
कानून मंत्रालय की अधिसूचना: क्या है तकनीकी संदेश?हंगामे के बीच बड़ा फैसला: विपक्ष की घेराबंदी और सरकार का रुखपरिसीमन का पेंच: अभी क्यों नहीं मिलेगा लाभ?ऐतिहासिक संदर्भ: दशकों का इंतजार और ‘नारी शक्ति’

कानून मंत्रालय की अधिसूचना: क्या है तकनीकी संदेश?

केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए 16 अप्रैल, 2026 को वह तिथि नियुक्त की है, जिससे इस ऐतिहासिक कानून के प्रावधान प्रभावी होंगे।

सरकारी गलियारों में इस अचानक आई अधिसूचना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, इसे ‘तकनीकी प्रक्रिया’ का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे सरकार के एक रणनीतिक कदम के रूप में देख रहे हैं। इस अधिसूचना ने उन कयासों पर विराम लगा दिया है जो इसके क्रियान्वयन की समय सीमा को लेकर लगाए जा रहे थे।

हंगामे के बीच बड़ा फैसला: विपक्ष की घेराबंदी और सरकार का रुख

संसद के वर्तमान सत्र में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त तकरार देखने को मिल रही है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि इस आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए और इसमें ओबीसी (OBC) कोटा भी शामिल हो। वहीं, सरकार ने साफ कर दिया था कि यह कानून जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही धरातल पर उतरेगा।

संसद में जब इस कानून के क्रियान्वयन को 2029 से सुनिश्चित करने वाले संशोधनों पर बहस चल रही थी, उसी दौरान महिला आरक्षण कानून अधिसूचना 2026 का जारी होना सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

परिसीमन का पेंच: अभी क्यों नहीं मिलेगा लाभ?

भले ही कानून आधिकारिक तौर पर ‘लागू’ घोषित कर दिया गया हो, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसका लाभ वर्तमान लोकसभा या तत्काल होने वाले चुनावों में नहीं मिलेगा। अधिसूचना जारी होने के बावजूद, कानून के क्रियान्वयन की राह में दो प्रमुख बाधाएं हैं:

  1. जनगणना (Census): कानून के प्रावधानों के अनुसार, आरक्षण लागू करने के लिए नई जनगणना के आंकड़े अनिवार्य हैं।

  2. परिसीमन (Delimitation): जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा, जिसके बाद ही 33 प्रतिशत सीटों को महिलाओं के लिए चिन्हित (Mark) किया जा सकेगा।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि, “अधिनियम को लागू करना एक संवैधानिक अनिवार्यता थी ताकि प्रशासनिक प्रक्रियाएं शुरू की जा सकें। परिसीमन की जटिल प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह सुनिश्चित होगा कि कौन सी सीटें आरक्षित होंगी।”

ऐतिहासिक संदर्भ: दशकों का इंतजार और ‘नारी शक्ति’

महिला आरक्षण का मुद्दा भारतीय राजनीति में पिछले तीन दशकों से लंबित था। 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान इसे भारी बहुमत से पारित किया गया था। इस कानून के तहत:

  • लोकसभा की कुल सीटों में से 33% महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

  • यही प्रावधान सभी राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा पर भी लागू होगा।

  • यह आरक्षण फिलहाल 15 वर्षों की अवधि के लिए होगा, जिसे संसद बाद में बढ़ा सकती है।

सरकार द्वारा आधी रात को इस कानून को लागू करने की अधिसूचना जारी करना एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। जहाँ सरकार इसे ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ता कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे जनगणना और परिसीमन के नाम पर देरी करने की रणनीति करार दे रहा है।

अब सबकी नजरें आगामी जनगणना और परिसीमन आयोग के गठन पर टिकी हैं। यह स्पष्ट है कि 16 अप्रैल 2026 की यह अधिसूचना भविष्य की भारतीय राजनीति की तस्वीर बदलने वाली है। भारतीय लोकतंत्र में अब महिलाओं की भागीदारी ‘प्रतीकात्मक’ न रहकर ‘संवैधानिक’ रूप से अनिवार्य हो चुकी है।

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